आसाराम की झलक पाने की फिराक में चाहने वाले:अस्पताल के अंदर घुसने के लिए उतावले हुए समर्थक, 2 महिलाओं को थाने ले गई पुलिस

जोधपुर6 महीने पहले
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महात्मा गांधी अस्पताल परिसर में पुलिस से बहस करती आसाराम की समर्थक दो महिलाएं।

जेल में बंद आसाराम को इलाज के लिए महात्मा गांधी अस्पताल में भर्ती कराने के बाद उनके समर्थक चारों तरफ मंडराने शुरू हो गए हैं। सुबह से अलग-अलग समूह में लोग अस्पताल के चारों तरफ घूम रहे हैं। साथ ही किसी तरह अंदर घुसने की राह तलाश रहे हैं। पहले से सतर्क पुलिस ने ऐसे सभी लोगों को अस्पताल के बाहर से खदेड़ दिया। कुछ के वाहन सीज किए गए। वहीं, दो महिलाओं को पकड़ कर थाने भेज दिया।

कोरोना संक्रमित होने के बाद देर रात ऑक्सीजन लेवल घटने पर आसाराम को महात्मा गांधी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। उसे अस्पताल लाए जाने की जानकारी मिलते ही रात को भी कुछ समर्थक अस्पताल के बाहर आकर एकत्र हो गए थे। आज सुबह से एक बार फिर उनका मजमा लगना शुरू हो गया। पकड़े जाने के भय से ये समर्थक दो-चार की संख्या में एक साथ रहते हुए अस्पताल के बाहर व परिसर में मंडराना शुरू हो गए। बड़ी संख्या में तैनात पुलिस ने वहां आने वाले लोगों से पूछताछ शुरू की और उन्हें वहां से भगाना शुरू कर दिया। समर्थकों के कुछ वाहनों को सीज किया गया। वहीं, सोशल डिस्टेंसिंग की पालना नहीं करने वाले समर्थकों का चालान भी काटा गया।

पुलिस ने महिला को वापस भेजा तो फिर आकर बैठ गई

आसाराम की दो महिला समर्थक अस्पताल परिसर में डट गई। पुलिस ने उन्हें वहां से कई बार रवाना किया, लेकिन वे थोड़ी देर बाद फिर आकर बैठ जाती। आखिरकार पुलिस दोनों को पकड़ कर थाने ले गई। उनसे पूछताछ की जा रही है। समर्थक किसी तरह जुगाड़ भिड़ा आसाराम के पास पहुंचना चाहते है। परिसर के बाहर बड़ी संख्या में पुलिस तैनात है। साथ ही जहां वे भर्ती है उस वार्ड के बाहर भी पुलिस तैनात है। पूरी तहकीकात कर ही वहां भर्ती अन्य मरीजों के परिजनों को अंदर जाने दिया जा रहा है।

उल्लेखनीय है कि वर्ष 2013 में पहली बार गिरफ्तार कर आसाराम को यहां लाया गया। उसके बाद से देशभर से आने वाले उसके समर्थक पुलिस के लिए हमेशा परेशानी खड़ी करते रहे है। पहले आसाराम को रोजाना जेल से कोर्ट लाया जाता था। इस दौरान सौ से अधिक पुलिस जवान तैनात करने पड़ते। जेल से कोर्ट तक के रास्ते में समर्थकों की भारी भीड़ रहती। कोर्ट परिसर में कई बार पुलिस को डंडे फटकार इन लोगों को भगाना पड़ा था।

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