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गांवों में कोरोना:तिंवरी की 26 ग्राम पंचायतों के केवल 22% घरों का ही सर्वे; मई में 5,644 टेस्ट में 32% पॉजिटिव, फिर भी सैंपलिंग कम

जोधपुर24 दिन पहलेलेखक: राजेश त्रिवेदी
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बालरवा में अस्थायी पुलिस नाका लगाकर बाहरी लोगों पर नजर रख रहे, बाहर घूमने वालों को कवारेंटाइन भी कर रहे है। - Dainik Bhaskar
बालरवा में अस्थायी पुलिस नाका लगाकर बाहरी लोगों पर नजर रख रहे, बाहर घूमने वालों को कवारेंटाइन भी कर रहे है।
  • गांवों में कोरोना की घातक दूसरी लहर में भी गंभीरता नहीं, तीसरी लहर आई तो संभाले नहीं संभलेंगे हालात
  • हेल्थ स्ट्रक्चर ऐसा; 2 सीएचसी, 3 पीएचसी और 31 उप स्वास्थ्य केंद्र... लेकिन डॉक्टर सिर्फ 14

गांवों में कोरोना का कहर इस बार ज्यादा असर दिखा रहा है। पहली लहर में गांवों में कोरोना संक्रमण तेजी से नहीं फैला, लेकिन दूसरी लहर में संक्रमण की दर तेजी से तो फैली ही, लेकिन इस आपदा में प्रशासन की लापरवाही और लचर हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर के चलते मौतों का आंकड़ा भी तेजी से बढ़ता गया। दूसरी लहर के घातक होने पर प्रशासन ने इन गांवों में डोर-टू-डोर सर्वे तो करवाया, लेकिन गति बहुत ही धीमी रखी।

पहले ही सर्वे में लक्षण वाले मरीजों का आंकड़ा देखकर भी प्रशासन नहीं संभला। तब लक्षण वाले मरीजों का आंकड़ा लगभग साढ़े 6% फीसदी निकला। यह तो गनीमत रही कि लक्षण वाले अधिकांश मरीज गंभीर हालत में नहीं पहुंचे, वरना उपचार के अभाव में हालात बिगड़ जाते और गांव मौत से सिहर उठते। भास्कर टीम ने 26 ग्राम पंचायतों में हेल्थ इन्फ्रास्ट्रक्चर का सिटी स्कैन किया तो हालात बहुत ही विकट नजर आए। इन गांवों में मई में अब तक केवल 5,644 टेस्ट ही किए गए। इसमें भी 32% यानी 1,792 पॉजिटिव पाए गए, फिर भी सैंपलिंग कम है।

हालांकि इन गांवों में दूसरी लहर के बाद भामाशाह, दानदाताओं व समाजसेवियों की वजह से सुविधाएं तो बढ़ी, लेकिन डॉक्टरों, नर्सिंग कर्मचारियों व स्टॉफ की हालत यहीं रही तो आने वाली तीसरी लहर में हालात नियंत्रण में रख पाना शायद मुश्किल होगा। हालांकि अभी हालात तो नियंत्रण है, लेकिन एक्टिव केस आज भी ज्यादा हैं।

तिंवरी तहसील वैसे तो ओसिंया ब्लॉक के अधीन है, लेकिन इसकी 26 ग्राम पंचायतों में से 2 पर सीएचसी, 3 पर पीएचसी और 31 जगह उप स्वास्थ्य केंद्र हैं, लेकिन अधिकांश में चिकित्सा स्टाफ का टोटा हैं। सीएचसी, पीएचसी व उप स्वास्थ्य केंद्र में सिर्फ 14 डॉक्टर ही हैं। इनमें से सर्वाधिक 6 डॉक्टर मथानिया, 3 तिंवरी, पांचला व चराई में 2-2 और जेलू-गगाड़ी में एक डॉक्टर हैं। शेष जगह डॉक्टर भी नहीं हैं। यहीं हालात नर्सिंग कर्मचारियों व स्टाफ की हैं। इसलिए घातक हुई कोरोना की दूसरी लहर में इन गांवों के गंभीर मरीज जोधपुर के अस्पतालों में पहुंचे। कुछ गंभीर मरीज तत्काल उपचार नहीं मिलने पर रास्ते में ही दम तोड़ दिया था।

सैंपलिंग पर कम ध्यान, वैक्सीनेशन पर भी फोकस नहीं
तिंवरी तहसील की 26 ग्राम पंचायतों के 40 हजार मकानों में 1 अप्रैल से 12 मई तक करवाए गए सर्वे में 2,559 मरीज लक्षण ग्रस्त मिले, लेकिन प्रशासन ने सैंपलिंग पर कम ध्यान दिया। अप्रैल माह में 4,334 लोगों की सैंपलिंग हुई, जिसमें से 1,488 की रिपोर्ट पॉजिटिव आई थी, इसमें से 100 ही रिकवर हुए और 15 डेथ हुई। यानी कुल सैंपलिंग सिर्फ 2.47% हुई। मई माह में कुल 5,644 लोगों की सैंपलिंग हुई। इनमें से 1,792 पॉजिटिव निकले। 2035 मरीज रिकवर भी हुए। सरकारी आंकड़ों में 13 डेथ दर्ज हुई। यहीं हाल वैक्सीनेशन का रहा। कुल 28 ग्राम पंचायतों में 45 वर्ष के ऊपर के करीब 21 हजार लोगों को वैक्सीन लगी, वहीं 18 वर्ष के ऊपर के सिर्फ 550 के ही टीका लग पाया हैं।

सैंपलिंग ज्यादा होती तो कम होती मौतें
अप्रैल में कुल 2.47% सैंपलिंग हुई। वहीं मई माह में अप्रैल से सिर्फ 0.75 ही बढ़ पाई। यानी 3.22% ही सैंपलिंग हो पाई। इस लापरवाही का नतीजा गांवों ने भुगता। 26 ग्राम पंचायतों में खुद सरकारी आंकड़ों में कोविड से होने वाली कुल मौतें 58 बताई गई हैं, जबकि 177 मौतें नॉन कोविड से बताई हैं, यानी एक माह में कुल 235 मौतें हुई। गांवों में यह पहला मौका है, जब एक माह में इतनी मौतें हुई हैं। मथानिया में सर्वाधिक 28 मौतें हुई, लेकिन गागाड़ी व जुड़ में अब तक एक भी मौत नहीं हुई।

लापरवाही; घर-घर सर्वे में 2,559 लोगों में लक्षण मिले, गनीमत रही कि कोई गंभीर नहीं, वरना उपचार के अभाव में हालात बिगड़ जाते
नतीजा; 26 ग्राम पंचायतों में ऐसा पहली बार जब एक माह में 235 मौतें, सरकारी आंकड़ों में कोरोना से 58, शेष 177 मौत अन्य बीमारियों से

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