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अलविदा कैप्टन, यादें अंकित:साथियों में बहादुरी के किस्से परिवार और नवविवाहिता के जेहन में अमिट स्मृतियां छोड़ गए

जोधपुर11 दिन पहले
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कैप्टन अंकित का वैवाहिक जीवन महज 45 दिन ही रह पाया - Dainik Bhaskar
कैप्टन अंकित का वैवाहिक जीवन महज 45 दिन ही रह पाया

कैप्टन अंकित गुप्ता मौत के बाद भी अपने नाम को चरितार्थ कर गए। अपने सैनिक साथियों में वीरता के किस्से, 45 दिन की नवविवाहिता और परिवार के जेहन में अमिट यादें अंकित कर गए। अपने एक बहादुर व टॉप कमांडो को खोना सेना के लिए बड़ी क्षति है। वहीं परिवार के लिए यह एक गहरा सदमा है। सेना ने तखतसागर में डूबे अपने बेहतरीन कमांडो को खोजने में संसाधन पूरी तरह झोंक दिए थे।

सर्च ऑपरेशन से जुड़े जवानों व अधिकारियों ने अथक मेहनत के साथ भगवान के दर पर अरदास में भी कोई कसर नहीं छोड़ी। रोज सुबह अभियान शुरू करने से पहले पूजा की जाती। अभियान की सफलता के लिए अधिकारी ने सोमवार को व्रत भी रखा। सोमवार सुबह तखतसागर के निकट स्थित मंदिर में जाकर पूजा अर्चना कर वहां मौजूद संत से आशीर्वाद भी लिया।

इतने प्रयासों के बाद जब कैप्टन अंकित निर्जीव मिले तो टीम सदस्यों की आंखें आंसुओं में डूब गई। उन्होंने अपने कमांडो के शव को एंबुलेंस में रख विदा किया। दोपहर पश्चात कैप्टन अंकित का शव मिल जाने के बाद अधिकारियों ने बुझे मन से परिजनों को इसकी सूचना दी।

अंकित के पिता ने हिम्मत कर अन्य परिजनों को संभाला और चल पड़े मिलिट्री अस्पताल की तरफ। परिवार अभी यह तय नहीं कर पाया है कि अपने लाड़ले का अंतिम संस्कार जोधपुर में ही करे या फिर उसे लेकर गुरुग्राम जाए। परिवार के निर्णय के आधार पर सेना व्यवस्था करेगी।
45 दिन ही रह पाया वैवाहिक जीवन
कैप्टन अंकित का वैवाहिक जीवन महज 45 दिन ही रह पाया। 23 नवंबर को वे विवाह बंधन में बंधे थे और सात जनवरी को पानी में ऐसे समाए कि उनकी बॉडी ही बाहर आई। गहरे सदमे में डूबी अंकित की नवविवाहित पत्नी को संभालना परिवार के लिए भारी पड़ रहा है। शादी के चंद दिनों बाद भाई के साथ जीवन के अगले पच्चीस बरस की योजना पर विचार करने वाले अंकित इस तरह अलविदा हो गए।
हर रोज तखतसागर पर उम्मीद लेकर आता था परिवार
कैप्टन अंकित गुप्ता के लापता होने के बाद नवविवाहित पत्नी, माता-पिता, ससुर सहित अन्य परिजन बहुत बुरे दौर से गुजरे। पति, बेटा व दामाद के मिलने की आस में ये लोग तखतसागर पहुंचते। एक तरफ खड़े होकर अपने लाडले को खोजने में जुटे जवानों की गतिविधियोंं को पथराई आंखों से देखते रहते। फिर सेना के लोग उन्हें समझाकर वापस ले जाते थे। 6 दिन से लगातार ऐसा हो रहा था।
पूरा एरिया सील कर चला सर्च, छठे दिन यूं मिली बॉडी

  • कैप्टन की खोज के लिए शहर के एक उद्यमी ने बेहतरीन क्षमता का कंप्रेशर सेना को निशुल्क उपलब्ध कराया।
  • इसका एक दिन का किराया 30 हजार रु. है। 1500 फीट पाइप भी पहुंचाया।
  • इस पाइप को तलहटी में डालकर उच्च दाब की हवा छोड़ने से अंदर का पूरा पानी हिलाया गया।
  • पानी हिलने से शव ने अपनी जगह को थोड़ा छोड़ा। अन्यथा यह तलहटी में पड़े बड़े पहाड़ी पत्थरों के बीच दबा था।
  • पानी में हरकत होने से इसने अपनी जगह छोड़ी और इसका पता चल पाया।

कैप्टन की तलाश के लिए सेना ने तखतसागर व आस-पास की पहाड़ियों को सील कर दिया था। सेना की पूरी मशीनरी तलाश में जुटी थी। पार्थिव देह मिली तो सेना की एंबुलेंस में मिलिट्री हॉस्पिटल ले गए।

लापता रहते एक आस थे

कैप्टन अंकित 7 जनवरी को लापता हुए तो अनहोनी की आशंका के बीच एक क्षीण सी आशा भी थी। यह आस उनके सैनिक साथियांे और परिवार के साथ पूरे शहर को भी थी। देश के सपूत से शहरवासियों के अनाम फिक्र के धागे जुड़ गए थे। उनके इतने दिनों से लापता रहने की चर्चा और सकुशल मिलने की एक आशा चहुंओर थी। दैनिक भास्कर ने भी इन 6 दिनों में अपनी खबरों में कैप्टन अंकित को हमेशा लापता ही बताया, पता लगने की आस के साथ। लेकिन मंगलवार को यह आस भी टूट गई।

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