ग्रीन कॉरिडोर बनाकर लाए ऑक्सीजन टैंकर:जोधपुर में अलवर से 16 टन लिक्विड ऑक्सीजन पहुंची, रास्ता साफ मिलने से 20 के बजाय 11 घंटे में आ गया टैंकर

जोधपुर9 महीने पहले
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जोधपुर में मंगलवार को लिक्विड ऑक्सीजन लेकर पहुंचे टैंकर को खाली किया जा रहा है। - Dainik Bhaskar
जोधपुर में मंगलवार को लिक्विड ऑक्सीजन लेकर पहुंचे टैंकर को खाली किया जा रहा है।

कोरोना संक्रमित होकर इलाज करवा रहे लोगों की सांसों को लेकर एक टैंकर मंगलवार को जोधपुर पहुंचा। अलवर के भिवाड़ी से 16 टन लिक्विड ऑक्सीजन लेकर आए इस टैंकर को ग्रीन कॉरिडोर बनाकर यहां तक लाया गया। ग्रीन कॉरिडोर की वजह से यह 20 के बजाय 11 घंट में जोधपुर पहुंच गया। लिक्विड ऑक्सीजन की इस खेप का जोधपुर में बड़ी शिद्दत के साथ इंतजार किया जा रहा था।

ऐसे बनाया गया ग्रीन कॉरिडोर

प्रशासन के अनुरोध पर भिवाड़ी से सोलह टन की लिक्विड ऑक्सीजन से भरे टैंकर को वहां से रवाना किया गया। इस टैंकर को कम से कम समय में जोधपुर लाने के लिए प्रशासन ने रास्ते में पड़ने वाले जिलों की पुलिस से मदद मांगी। पूरे मार्ग में पुलिस ने सहयोग प्रदान दिया और ग्रीन कॉरिडोर बना टैंकर को तेजी के साथ आगे बढ़ाया। इस टैंकर के आगे एक-एक वाहन में पुलिस व आरटीओ स्वयं चलते रहे। आगे चलते हुए ये दोनों वाहन ऑक्सीजन टैंकर के लिए रास्ता बनाते रहे। बीच में आने वाले अन्य वाहनों को इन्होंने साइड में खड़ा करवाते हुए टैंकर के लिए रास्ता पूरी तरह से बाधा रहित रखा। इस कारण टैंकर अपने निर्धारित समय से काफी पहले जोधपुर पहुंच गया। ऑक्सीजन का पर्याप्त भंडार पहुंचने के साथ जिला व अस्पताल प्रशासन ने राहत महसूस की।

ये है जोधपुर में ऑक्सीजन की स्थिति

महात्मा गांधी अस्पताल में ऑक्सीजन व्यवस्था के प्रभारी अरविंद अपूर्वा ने बताया कि कल दोपहर हमने लिक्विड गैस टैंकर की डिमांड भेजी थी। जोधपुर में ऑक्सीजन के तीनों सप्लायर्स के पास इसकी कमी होना शुरू हो गई थी। अस्पताल में भी लिक्विड गैस नहीं थी। अस्पताल में इस समय 350 कोरोना संक्रमित भर्ती है। इसमें से 310 को ऑक्सीजन दी जा रही है। कल महात्मा गांधी अस्पताल में 725 सिलेंडर के बराबर ऑक्सीजन की खपत हुई थी। कुछ मरीजों की संख्या बढ़ने के अलावा हाई फ्लो मरीज भी बढ़ने से आज कुल खपत 850 सिलेंडर तक पहुंचने की उम्मीद है। उन्होंने बताया कि ऐसी परिस्थितियों में ऑक्सीजन टैंकर का जल्दी से जल्दी यहां पहुंचना आवश्यक था, ताकि इसका संकट खड़ा न हो सके। ऐसे में हमने ग्रीन कॉरिडोर का सुझाव दिया। इस सुझाव को मान प्रशासन व पुलिस ने पूरा प्रयास किया और इसके बेहतर नतीजे अब सभी के सामने है कि गैस पर्याप्त मात्रा में पहुंच गई। अपूर्वा का कहना है कि आज यहां पहुंची लिक्विड ऑक्सीजन में से 7.5 टन जोधपुर गैसेज की दी गई। वहां से इसे सिलेंडर में भर अन्य अस्पतालों को भेजी जाएगी। वर्तमान में अस्पताल के पास करीब साढ़े चार सौ सिलेंडर है। इनके खाली होते ही रिफिलिंग के लिए वापस भेज दिया जाता है। आज पहुंची लिक्विड ऑक्सीजन अगले 28 से 30 घंटों के लिए ही पर्याप्त है। उन्होंने बताया कि और लिक्विड ऑक्सीजन की डिमांड भेज दी गई है।

क्या होती है मेडिकल ऑक्सीजन

वैसे तो ऑक्सीजन हवा और पानी दोनों में मौजूद होती है। हवा में 21 प्रतिशत ऑक्सीजन होती है और 78 प्रतिशत नाइट्रोजन होती है। इसके अलावा 1 प्रतिशत अन्य गैसें होती हैं। इनमें हाइड्रोजन, नियोन और कार्बन डाईऑक्साइड भी होती है। पानी में भी ऑक्सीजन होती है। पानी में घुली ऑक्सीजन की मात्रा अलग-अलग जगहों पर अलग हो सकती है। ऑक्सीजन प्लांट में, हवा में से ऑक्सीजन को अलग कर लिया जाता है। इसके लिए एयर सेपरेशन की तकनीक का इस्तेमाल किया जाता है। यानी हवा को कंप्रेस किया जाता है और फिर फिल्टर किया जाता है, ताकि अशुद्धियां उसमें से निकल जाएं। अब इस फिल्टर हुई हवा को ठंडा किया जाता है। इसके बाद इस हवा को डिस्टिल किया जाता है, ताकि ऑक्सीजन को बाकी गैसों से अलग किया जा सके। इस प्रक्रिया में ऑक्सीजन लिक्विड बन जाती है और इसी स्थिति में ही उसे इकट्ठा किया जाता है। सिलेंडर में वैपराइज्ड़ गैस होती है। लिक्विड को वैपर फॉर्म में सिलेंडर में भरा जाता है। ऑक्सीजन के एक सिलेंडर की क्षमता सिर्फ 47 लीटर होती है, मगर इसमें प्रेशर से करीब 5000 लीटर ऑक्सीजन भरी जाती है।