रोज एक लाख मिर्ची बड़े खा जाता है जोधपुर:एक हजार से ज्यादा दुकानें, 100 करोड़ से ज्यादा का सालाना कारोबार, लंदन में होता है फेस्टिवल

जोधपुर7 महीने पहलेलेखक: पूर्णिमा बोहरा

खंडों और खावण खंडों (खाने-पीने में माहिर) के शहर जोधपुर का हर जायका निराला है। यहां के खान-पान की बात हो और मिर्ची बड़े का जिक्र न हो, ऐसा हो ही नहीं सकता। आपको हैरानी होगी कि अकेले जोधपुर में हर रोज करीब एक लाख से ज्यादा मिर्ची बड़े खाए जाते हैं। मिर्ची बड़े के दीवाने केवल जोधपुर में ही नहीं देश और विदेशों में भी है। यहां तक कि लंदन में तो जोधपुरी मिर्ची बड़ा फेस्टिवल भी हो चुका है। तो इस बार राजस्थानी जायका की कड़ी में ले चलते हैं जी ललचा देने वाले मिर्ची बड़े के स्वाद की यात्रा पर....

चाहे सर्दी का मौसम हो या गर्मी का। तेज बारिश पड़ रही हो या घना कोहरा छाया हो। सोजती गेट, नई सड़क, सरदारपुरा, जालोरी गेट, जलजोग चौराहा, कबूतरों का चौक, खांडा फलसा, जूनी मंडी, आड़ा बाजार से लेकर शहर का ऐसा कोई कोना नहीं, जहां मिर्ची बड़ा नहीं बिकता हो। हर दुकान पर इसके शौकीनों की जबरदस्त भीड़ रहती है। ताजा हरी मिर्च में आलू का मसाला भरकर बेसन के घोल में डिप कर तेल में फ्राई के बाद तैयार हुए गरमा-गरम मिर्ची बड़े को खाने के लिए ग्राहक घंटों का इंतजार भी कर लेते हैं।

जोधपुर के ह्रदय स्थल सोजती गेट से नई सड़क की ओर रुख करते ही दूसरी दुकान जनता स्वीट होम की है। यहां दिन में किसी भी समय चले जाएं मिर्ची बड़े खाने वालों की भीड़ हमेशा रहेगी। मालिक सत्यनारायण अग्रवाल ने बताया कि बीते 45 वर्षों से उनके यहां मिर्ची बड़ा बिक रहा है। इसका क्रेज लोगों में बढ़ा ही है। उनके पिताजी के दादाजी ने शहर के परकोटे के अंदर जूनी मंडी में छोटी से दुकान की शुरुआत की थी। आज उनकी चौथी पीढ़ी भी इसी काम से जुड़ी है।

गृहणी ने ईजाद की थी यह डिश
कहा जाता है मिर्ची बड़ा किसी गृहणी की रेसिपी है, हलवाई की नहीं। 80 वर्षीय गोविंद कल्ला बताते हैं खाने-पीने का शौक जोधपुर की लोक संस्कृति का हिस्सा है। जो चीज लोक संस्कृति बन जाती है, उसकी शुरुआत कहां से हुई इसका पता नहीं चलता। लेकिन इसके बनने के पीछे गृहणियों की पाक कला का योगदान है। महिलाएं ही ज्यादा एक्सपेरिमेंट करती हैं। बेसन के पकौड़ों को मारवाड़ी में बड़े बोलते हैं। वह बनाते-बनाते बड़ी मिर्ची को बेसन में डुबोकर मिर्ची बड़ा बनाया गया था। स्वाद में अच्छा लगने पर इसमें आलू का मसाला भरकर फिर बेसन में डुबोकर तला गया तो जायका और भी बढ़ गया। धीरे-धीरे घर की रसोई से निकलकर यह जायका बाजारों में पहुंचा। आज यह जोधपुर की पहचान बन गया है।

ऐसे बनता है मिर्ची बड़ा
आलू को उबाल कर, उसे मैश कर स्वादानुसार नमक, मिर्च, हींग, राई, साबुत धनिया आदि मसाले डाल कर उसे मिक्स किया जाता है। बारीक प्याज, पुदीना व हरा धनिया भी काट कर डाला जाता है। मसाले में काजू टुकड़ी डालकर मसाला तैयार होता है। साबुत बड़ी हरी मिर्च लेकर उसमें चाकू से चीरा लगाकर आलू का मसाला भरते हैं। जितनी मिर्ची हो उसके अनुपात में बेसन का घोल तैयार करते हैं। बेसन के घोल में स्वादानुसार नमक व मिर्च पाउडर डालते है। मसाले से भरी मिर्च को बेसन के घोल में डिप कर गरम खौलते तेल की कढ़ाई में तला जाता है। अच्छे से तलने के बाद उसे कड़ाही से बाहर निकालकर खाने के लिए सर्व किया जाता है। स्वाद बढ़ाने के लिए हरी और मीठी चटनी भी सर्व की जाती है।

शादी से लेकर बर्थ-डे पार्टी में भी डिमांड
किसी की बर्थ-डे पार्टी हो या कितने भी बड़े उद्योगपति की शादी। जोधपुरी मिर्ची बड़े का जायका जरूर मिलेगा। देश के किसी भी शहर से अलग यहां हर आयोजनों में मिर्ची बड़े की डिमांड रहती है।

करोड़ों रुपए के मिर्ची बड़े खा जाते हैं लोग
जोधपुर में करीब एक हजार दुकानों पर मिर्ची बड़ा बनता है। इनमें करीब 45-50 दुकानें ऐसी है जो कि पीढ़ी दर पीढ़ी यही काम करती आ रही है। एक मिर्ची बड़े की कीमत 15 से 25 रुपए है। रोजाना करीब 1 लाख से ज्यादा मिर्ची बड़े बिक जाते हैं। अगर सालाना कारोबार की बात करें तो ये करीब 100 करोड़ है। पर्यटक हो या जोधपुर के लोग इस गरमा गरम मिर्ची बड़े को खरीदने के लिए घंटों इंतजार करते हैं।

विदेशों तक हो रहा कारोबार
मिर्ची बड़ा वैसे तो जोधपुर का ही प्रसिद्ध है, लेकिन कॉमन रेसिपी ने इसका स्वाद देश के कोने-कोने तक पहुंचा दिया है। आज लोग घरों में भी मिर्ची बड़ा बड़े चाव से बनाते हैं। जोधपुर के कई लोग विदेश जाकर बस चुके हैं, लेकिन यहां से अपने साथ मिर्ची बड़ा जरूर लेकर जाते हैं। बीते साल 18 जुलाई 2020 में लंदन में बसे प्रवासी राजस्थानियों ने तो जोधपुरी मिर्ची बड़ा फेस्टिवल आयोजित किया था, जिसमें 300 से ज्यादा लंदन वासियों ने भी इसका स्वाद चखा था।

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