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कोरोना से इंसानियत भी मर रही:मां का शव ले जाने को अस्पताल से एंबुलेंस नहीं मिली, रोड पर गिड़गिड़ाती बेटियों को देखकर भी कोई नहीं रुका, लोडिंग टैक्सी चालक ने मोक्षधाम पहुंचाया

जोधपुर13 दिन पहले
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लोडिंग टैक्सी में मां के शव पर विलाप करती बेटी। - Dainik Bhaskar
लोडिंग टैक्सी में मां के शव पर विलाप करती बेटी।

कोरोना का खौफ इंसानों ही नहीं बल्कि इंसानियत की भी जान ले रहा है। इस संकटकाल में इंसानियत, मदद आदि को तोड़कर रख देने वाली शर्मनाक घटनाएं सामने आ रही हैं। अपणायत के शहर में दिल को झकझोर देने वाली ऐसी घटना मंगलवार को घटित हुई। यहां सैनिक अस्पताल में बुजुर्ग मां की मौत के बाद उनकी तीन बेटियाें पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा।

सैनिक अस्पताल प्रशासन ने शव को प्लास्टिक बैग में कवर कर मोर्चरी में रखवा दिया। अस्पताल पहुंचने के पूर्व मृत्यु होने के चलते सैनिक अस्पताल प्रशासन ने बनाड़ पुलिस को सूचना दी। शाम 4 बजे बाद शव को बेटियों को सौंप दिया। बेटियों ने एंबुलेंस की मांग की, लेकिन नहीं मिली। बाद में दोनों बेटियां अपनी मां के शव को श्मशान घाट तक पहुंचाने के लिए सड़क पर गिड़गिड़ाती रहीं।

इस दौरान उन्होंने वहां से गुजरने वाले 10-15 वाहनों को रोका, लेकिन कोरोना संक्रमित शव को ले जाने के लिए कोई तैयार नहीं हुआ। आखिरकार एक लोडिंग टैक्सी चालक का कलेजा पसीजा। उसने शव को सिवांची गेट श्मशान घाट तक पहुंचाया। पूरे रास्ते दोनों बेटियां शव के साथ लोडिंग टैक्सी से ही श्मशान पहुंचीं। यहां शाम को हिंदू सेवा मंडल के श्मशान घाट पर दाह संस्कार हुआ।

बड़ी बेटी तो दाह संस्कार के पहले तक टैक्सी में शव के साथ बैठी अकेली रोती रही, लेकिन छोटी बेटी ने हौंसला रखकर अपने पिता के परिचित के साथ पीपीई किट पहनकर दाह संस्कार की रस्म अदा की। दाह संस्कार के अंतिम दर्शन यूपी में बैठे पिता व परिजनों को भी मोबाइल पर लाइव करवाए।

यूपी में बैठे बेबस पिता को वीडियो कॉल से मां के अंतिम दर्शन करवाए

थानाराम ने अपने परिचित कानसिंह को रोका और शव को श्मशान घाट पहुंचाने को कहा। कानसिंह व सहयोगी प्रवीणसिंह निर्वाण शव के साथ बिलखती बेटियों को देख पिघल गए और बिना किराया शव को श्मशान घाट के लिए रवाना हुए। बीच रास्ते में डीजल खत्म हो गया। थानाराम ने अपने भतीजे के साथ डीजल मंगवाया।

इसके बाद दोनों बेटियां लोडिंग टैक्सी में ही मां के शव के साथ ही श्मशान घाट पहुंची। उन्होंने पीपीई किट पहने और दोनों बेटियों को भी पीपीई किट पहनाया। संक्रमण के खौफ के बीच बेटियों के साथ वृद्धा को कुछ देर कांधा दिया। इसके बाद शव को कोविड प्राेटोकॉल के तहत राजेंद्र सिंह की मदद से दाह संस्कार करवाया। तीसरी बेटी सलोनी घर पर ही रही।

हॉस्पिटल के रास्ते में ही दम तोड़ा
यूपी के अकबपुर जिले के रहने वाले राजीवकुमार चतुर्वेदी सेना से रिटार्यड सूबेदार हैं। उनकी पत्नी संतोष लता अपनी तीन बेटियों के साथ शिकारगढ़ में किराए के मकान में रहती थीं। दो बेटियां आर्मी स्कूल में टीचर हैं, ऐसे में परिवार को जोधपुर में ही छोड़कर राजीव पिछले साल जनवरी में ही अपने गांव खेती-बाड़ी करने लौट गए। सोमवार रात को उनकी पत्नी की तबीयत अचानक खराब हुई।

बेटियों ने रात भर मां की देखभाल की। सुबह 5 बजे जब सांस लेने में तकलीफ होने लगी तो बेटियां मां को गंभीर अवस्था में ऑटाे से लेकर सैनिक अस्पताल पहुंची। रास्ते में ही मां ने दम तोड़ दिया। सैनिक अस्पताल के प्रशासन ने पुलिस को इत्तला कर दी।
एंबुलेंस चालकों ने भी आने से मना किया
संतोष लता की मृत्यु के बाद बेटियां सुप्रिया व दीपिका एकबारगी बेसुध हो गईं। दीपिका ने सुबह 7 बजे अपने पहले के मकान मालिक भाखरराम के भाई थानाराम छिणंग को फोन पर घटनाक्रम बताया। वे तत्काल अपने सहयोगी नंदकुमार पालीवाल व नारायण पालीवाल के साथ सैनिक अस्पताल पहुंचे।

थानाराम ने कुछ एंबुलेंस चालकों को भी फोन किए, लेकिन इनकार कर दिया। इसके बाद दीपिका व सुप्रिया ने थानाराम के साथ सड़क पर एक के बाद एक कर 10 से 15 वाहनों को रोका, सड़क पर खड़ी होकर शव को श्मशान घाट तक पहुंचाने की गुहार लगाती रही, लेकिन एक का भी कलेजा नहीं पिसा।

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