अस्पतालों में बेड फुल:सरकारी वेब पोर्टल पर जो बेड खाली दिख रहे, अस्पतालों में उन पर पहले से भर्ती हैं मरीज

जोधपुर6 महीने पहले
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एमजीएच की इमरजेंसी 
में बुधवार को बेड के इंतजार 
में मरीज और उनके परिजन। - Dainik Bhaskar
एमजीएच की इमरजेंसी में बुधवार को बेड के इंतजार में मरीज और उनके परिजन।
  • सरकारी पोर्टल सरकारी अस्पतालों तक की सही जानकारी नहीं दे पा रहा, दैनिक भास्कर ने अस्पतालों में जाकर देखा तो मरीजाें से भरे मिले

कोराेना संक्रमण की चपेट में आ रहे लोग अस्पतालों में भर्ती होने के लिए बेड की तलाश में मारे-मारे फिर रहे हैं। ऐसे लोगों को राहत देने के लिए सरकारी वेब पोर्टल पर अस्पतालों में बेड की स्थिति बताने की सुविधा तो दी है लेकिन यह खुद बेडसाइट बन गई है।

बात करें जोधपुर की तो वेबसाइट पर जिन अस्पतालों में बेड उपलब्ध बताए गए, भास्कर ने जब उन अस्पतालों में जाकर बेड देखे तो वे मरीजों से भरे हुए मिले। सरकारी पोर्टल तो सरकारी अस्पतालों तक की सही जानकारी नहीं दे पा रहा।

एक निजी अस्पताल में बुधवार दोपहर दो बजे 15 बेड खाली बताए गए, पता करने पर खुलासा हुआ कि वहां तो ऑक्सीजन ही नहीं है, मरीज भर्ती हो ही नहीं सकते। इधर, एमडीएमएच व एमजीएच में दो-चार खाली बेड की सूचना पोर्टल पर मिलती है, मरीज पहुंचते हैं तो पता चलता है कि वे कतार में हैं। एम्स में 60 बेड खाली बताए, हकीकत में इतने नहीं : पाेर्टल पर एम्स में दोपहर 2 बजे 60 ऑक्सीजन बेड खाली दिख रहे थे। जब एम्स से पूछा गया तो बताया गया कि इतने बेड तो खाली नहीं हैं। एम्स अधीक्षक डॉ. एमके गर्ग का कहना था कि वेबसाइट के बारे में उन्हें जानकारी ही नहीं हैं। यह डेटा कहां से लिया यह भी नहीं पता।

इधर, एमजीएच ओपीडी से भर्ती मरीज इमरजेंसी में कतार में है
एमजीएच ओपीडी में आने वाले सभी मरीजों को डॉक्टर तुरंत सेचुरेशन के आधार पर भर्ती कर रहे हैं, ताकि उन्हें तुरंत इलाज मिल सकें। लेकिन इमरजेंसी में सभी मरीज घंटाें कतार में हैं।

दरअसल एमजीएच की ओपीडी में आ रहे मरीजाें का गार्ड सेचुरेशन और ऑक्सीजन लेवल लेकर डाॅक्टर काे बताते हैं, जिसके बाद यदि सेचुरेशन 90 से नीचे हाेता है ताे तुरंत डाॅक्टर उसे भर्ती कर इमरजेंसी में जाने के लिए बाेलते हैं। जहां मरीजाें काे घंटाें लंबी कतार में इंतजार करना पड़ता है।

क्याेंकि इमरजेंसी में लगे सभी बेड मरीजाें से भरे हुए हैं। यहीं नहीं इमरजेंसी के पास बने एमओटी और ऑब्जरवेशन रूम में भी मरीज बेड पर हैं। एमओटी के सामने खाली जगह पर व्हीलचेयर और स्ट्रेचर पर मरीज ऑक्सीजन ले रहे हैं। पूरा अस्पताल कोविड मरीजों से भरा है।

निजी अस्पताल ने कहा, ऑक्सीजन हाे तो मरीज भर्ती करें
इधर, मेडिसिटी हॉस्पिटल के 27 में से 15 ऑक्सीजन बेड उपलब्ध बताए जा रहे थे। अस्पताल संचालक डॉ. साबिर अली के मुताबिक इतने बेड खाली जरूर हैं, लेकिन मरीज भर्ती नहीं किए जा सकते। ऑक्सीजन सिलेंडर ही नहीं मिल रहे तो मरीजों की जान क्यों संकट में डाली जाए?
दोपहर में जुड़े बोरानाडा के 172 बेड, अभी राहत यहीं: जिला प्रशासन ने बोरानाडा में इंतजाम करके दोपहर दो बजे की स्थिति में यहां के 172 ऑक्सीजन बेड जोड़ दिए। तब तक यहां 18 बेड पर मरीज थे, जिन्हें दूसरे अस्पतालों से रेफर किया गया था। यहां सीधे भर्ती नहीं हो सकते, ऐसे में पहले सरकारी अस्पताल जाना होगा, वहां से ही उन मरीजों को रेफर किया जाएगा जिनको ऑक्सीजन की जरूरत है।

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