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इंटरव्यू में नर्वस थे RAS सिद्धार्थ:बोर्ड मेंबर ने पहले किया नॉर्मल और फिर सहज माहौल में पूछे गए सवाल; इंटरव्यू में देखा जाता है एटीट्यूड

जोधपुर20 दिन पहले
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आरएएस परीक्षा में दसवीं रैंक हासिल करने वाले सिद्धार्थ सांदू। - Dainik Bhaskar
आरएएस परीक्षा में दसवीं रैंक हासिल करने वाले सिद्धार्थ सांदू।

राजस्थान प्रशासनिक सेवा के जारी हुए परिणाम में जोधपुर में निवास करने वाले सिद्धार्थ सांदू ने दसवीं रैंक हासिल की है। नागौर जिले के गोटन कस्बे के शिव गांव के रहने वाले सिद्धार्थ का इंटरव्यू भी काफी शानदार रहा। उनका कहना है कि इंटरव्यू देने के लिए रूम में प्रवेश करते समय काफी नर्वस था मैं। लेकिन बोर्ड मेंबर ने मुझे नॉर्मल किया और फिर शुरू हुआ सवाल-जवाब की सिलसिला।

करीब बीस मिनट तक चले इंटरव्यू के बारे में उनका कहना है कि हमें पूरा ईमानदार रहना चाहिए। बनावटीपन नहीं लाना चाहिए। वास्तव में बोर्ड मेंबर हमारी काबिलियत तो परीक्षा में मिले अंकों के आधार पर पहले से परख चुके होते हैं। वे हमारी एटीट्यूड देखते है। साथ ही किसी मसले को कैसे हल कर सकते है। ऐसे में एकदम सहज होकर इंटरव्यू देना चाहिए। वे स्वयं इन दिनों आईएएस परीक्षा के अगस्त में प्रस्तावित इंटरव्यू की तैयारी में जुटे हैं।

उन्ही की जुबानी कैसे आगे बढ़ा इंटरव्यू...

कमरे में प्रवेश करते समय सामने बोर्ड के चार सदस्य बैठे नजर आए। उनको नमस्कार किया तो बैठने को कहा गया। बैठने के बाद चेयरमैन ने मेरी शिक्षा से जुड़ी फाइल निकाली और चर्चा चल पड़ी। मैने इकोनॉमिक्स में गोल्ड मेडल के साथ पीजी कर रखी है। इसकी चर्चा चलते हुए एक मेंबर ने पहला सवाल किसान बिल को लेकर दागा। इसके बारे में मेरे विस्तार से जवाब देने पर किसान आंदोलन की भी चर्चा चल पड़ी। इसके बाद पूअर इकोनॉमी से जुड़े कुछ सवाल पूछे गए। जवाब में से सवाल निकलते रहे और बातचीत चलती रही। इसके बाद एक मेंबर ने मेरी हॉबी के बारे में पूछा। मैने बताया कि रीडिंग व फिल्म देखने का शौक है। इस पर सवाल आया हाल ही कौनसी मूवी देखी है। मैने कुछ दिन पूर्व युद्ध आधारित हॉलीवुड मूवी 1917 को देखा था। उसके बारे में संक्षिप्त चर्चा हुई। इसके बाद हाल ही में पढ़ी गई किताबों के बारे में पूछा गया। मैने अर्थशास्त्र से जुड़ी किताब ग्रोथ माइंड सैट का जिक्र किया। फिर इस किताब से जुड़े विषय की चर्चा चल निकली। मैं मूलत नागौर जिले से हूं। ऐसे में तीसरे मेंबर ने नागौर के प्रसिद्ध बैलों को लेकर कई सवाल किए। मसलन वर्तमान में इनकी उपयोगिता समाप्त हो रही है। इसके अलावा नागौर के बारे में कुछ और सवाल पूछे गए।

सच कहूं तो अंदर प्रवेश करते समय मैं काफी नर्वस महसूस कर रहा था, लेकिन वहां से उठने के बाद एकदम सहज महसूस कर रहा था। बाहर आते ही मेरे पापा सुभाष, जिनका दो माह पूर्व कोरोना के कारण निधन हो गया, ने पहला सवाल दागा कैसा रहा। फिर मेरा चेहरा देख ही वे समझ गए कि सब कुछ बेहतरीन ही रहा है। फिर मैने उनसे सारे सवाल-जवाब पर चर्चा की। मैं निश्चित था कि इंटरव्यू बेहतरीन रहा है और मेरा चयन हो सकता है। आखिरकार ऐसा ही हुआ। इसमें कोई दो राय नहीं है कि अगस्त में आईएएस परीक्षा के इंटरव्यू के दौरान यह अनुभव मेरे बहुत काम आएगा।

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