पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें

देसी जुगाड़ से बोरवेल में फंसे बच्चे को बचाया:कुएं से मोटर निकालने वाले माधाराम ने 25 मिनट में 4 साल के मासूम को 90 फीट के बोरवेल से निकाला

सांचौर(जालोर)3 महीने पहले
सांचौर क्षेत्र में एक बोरवेल में सोलह घंटे तक फंसे रहे बालक को सकुशल बाहर निकाल दिया गया। फोटो ओमप्रकाश विश्नोई, सांचौर  
  • बड़ोदरा व गांधीधाम के अलावा अजमेर से आई एनडीआरएफ की टीमों के प्रयास विफल हो जाने के बाद माधाराम ने प्रशासन से एक मौका देने का आग्रह किया तो वह सफल हो गया

जालोर जिले के लाछड़ी गांव में बोरवेल में गिरे चार वर्षीय बालक अनिल को सोलह घंटे बाद सकुशल बाहर निकाल लिया गया। जब सब आधुनिक तकनीक से काम नहीं बना तो गांव के ठेठ देसी आदमी माधाराम उर्फ जुगाड़ी बोस की तकनीक काम आई और उन्होंने महज पच्चीस मिनट में अनिल को सकुशल बाहर निकाल लिया। बच्चे के बाहर निकलते ही मौके पर मौजूद दो से तीन हजार लोगों ने जुगाड़ी बोस के लिए जमकर जयकारे लगाए। बच्चे को बाहर देखते ही उसकी माता-पिता की आंखों से आंसू बह निकले।

माधाराम सुथार उर्फ जुगाड़ी बोस।
माधाराम सुथार उर्फ जुगाड़ी बोस।

90 फीट के बोरवेल में 80 फीट की गहराई पर फंसे बालक अनिल को निकालना आसान नहीं था। बड़ोदरा व गांधीधाम के अलावा अजमेर से आई एनडीआरएफ की टीमों के प्रयास विफल हो जाने के बाद माधाराम ने प्रशासन से एक मौका देने का आग्रह किया। इसके बनाए देसी जुगाड़ ने करिश्मा कर दिया। महज पच्चीस मिनट में ही अनिल बोरवेल से बाहर था। माधाराम सुथार क्षेत्र में जुगाड़ी बोस के नाम से प्रसिद्ध है। जालोर जिले के बागौड़ा क्षेत्र निवासी माधाराम को पूरे क्षेत्र के लोग खेती-किसानी के मामलों में अटकने पर याद करते है। माधाराम भी किसी को निराश नहीं करते। लोगों के बुलाते ही मौके पर पहुंच जाते है। माधाराम ने कई बार इस प्रकार के रेस्क्यू किए हैं। वो राज्यस्तर व जिलास्तर पर सम्मानित भी हो चुके हैं। इनका मुख्य कार्य बोरवेल से मोटर निकालने का है। इसके साथ साथ जब भी आवश्यकता पड़ी इन्होंने अपने हुनर से कई लोगों की जान बचाने का कार्य किया है। माधाराम को वन एवं पर्यावरण मंत्री सुखराम बिश्नोई ने फोन पर बधाई दी। उन्होंने मासूम की जान बचाने पर सम्मानित करने का भी आश्वासन दिया।

90 फीट नीचे मौत को हराकर आया:राजस्थान के जालोर में बोरवेल में फंसा 4 साल का बच्चा रात 2.20 बजे सुरक्षित निकाला, स्थानीय जुगाड़ ही आया काम; माधाराम ने 25 मिनट में ही किया रेस्क्यू

माधाराम ने इस तरह तीन पाइप को जोड़ जुगाड़ तैयार किया। इसमें बच्चे को फंसा कर ऊपर खींचा गया।
माधाराम ने इस तरह तीन पाइप को जोड़ जुगाड़ तैयार किया। इसमें बच्चे को फंसा कर ऊपर खींचा गया।

ऐसे बनाया जुगाड़

बालक को बाहर निकालने के लिए जलापूर्ति के लिए काम आने वाले पीवीसी के नब्बे-नब्बे फीट के तीन पाइप मंगाए। उसने तीनों पाइप के आगे एक टी को जोड़ा। इनके बीच में एक रस्सी बांध दी गई। साथ ही कैमरे को भी इससे जोड़ा गया। अब रात 1.55 पर जुगाड़ी बोस ने मोर्चा संभाला। अस्सी फीट तक इस जुगाड़ को पहुंचाने के बाद टी को बालक के सिर से होते हुए पेट तक पहुंचाया गया। सीने तक पहुंचते ही रस्सी को खींचा गया। इससे तीनों पाइप के बीच में बच्चा फंस गया। इसके बाद रस्सी को खींचने का काम शुरू हुआ। रस्सी के साथ तीनों पाइप भी बाहर आते रहे। थोड़ी देर में बच्चा माधाराम के हाथ में था। इस रेस्क्यू ऑपरेशन में महज पच्चीस मिनट का समय लगा।

इस तरह आगे बढ़ा रेस्क्यू ऑपरेशन

  • पहला प्रयास माधाराम सुथार ने जुगाड़ से किया। कुछ फीट तक बच्चे को ऊपर लाने में कामयाब रहा, लेकिन वहां मौजूद लोग उत्साह से चिल्लाने लगे और रस्सी ढीली पड़ गई। इसके साथ ही बच्चा अपनी पुरानी जगह पर जाकर अटक गया।
  • दूसरा प्रयास गांधीनगर से आई एनडीआरएफ की टीम ने किया, लेकिन विफल रही।
  • तीसरा प्रयास जोधपुर के मथानियां की जुगाड़ टीम ने किया, लेकिन वे भी विफल रहे।
  • चौथा प्रयास एनडीआरएफ की अजमेर व गुजरात की टीम ने एक बार फिर मोर्चा संभाला। वे बच्चे के हाथ तक पहुंच भी गई, लेकिन बाहर नहीं निकाल पाए।
  • परिजनों के आग्रह पर जिला कलेक्टर व पुलिस अधीक्षक ने माधाराम को एक और मौका देने का फैसला किया। पच्चीस मिनट में नतीजा सबके सामने था।
  • सोलह घंटे तक बोरवेल में फंसे बालक को जिंदा रखने के लिए ब्लॉक चिकित्सा अधिकारी ओमप्रकाश सुथार व डॉ दीपाराम चौधरी ने ऑक्सीजन की कमी नही आने दी। यहीं कारण रहा कि बालक अनिल अस्सी फीट की गहराई पर फंसे रहने के बावजूद सोलह घंटे तक जिंदा रह सका।
  • कंटेंट व फोटो- ओमप्रकाश विश्नोई, सांचौर
खबरें और भी हैं...