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  • The Officers Themselves Leave The Office By Closing The Gate For The Public, People Have Not Done 26 Out Of 29 Public Interest Works Sent By The CM.

भास्कर रियलिटी चैक:जनता के लिए गेट बंद कर खुद भी ऑफिस से निकल जाते हैं अफसर, लोग तो दूर सीएम के भेजे 29 जनहित कार्यों में से भी 26 नहीं किए

जोधपुर12 दिन पहले
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राइट टू सीएम योजना में मुख्यमंत्री के बताए काम करने में भी जेडीए सबसे फिसड्‌डी। - Dainik Bhaskar
राइट टू सीएम योजना में मुख्यमंत्री के बताए काम करने में भी जेडीए सबसे फिसड्‌डी।
  • जेडीए में 11 से 1 बजे के बाद मनमर्जी का लॉकडाउन लगा अफसर-कर्मचारी कुछ इस तरह काम करते हैं

अनलॉक-4 में भी जेडीए में मनमर्जी का लॉकडाउन जारी है। जनता के लिए तो जेडीए में प्रवेश दोपहर 1 बजे बंद कर दिया जाता है। जनता को भेजकर जेडीए अफसर और कर्मचारी किस तरह काम में जुटते हैं, यह जांचने भास्कर रिपोर्टर दोपहर 1 से शाम 4 बजे तक वहीं रुके। सामने आया कि दोपहर 1 बजे जनता के लिए गेट बंद कर अफसर खुद भी जेडीए से निकल जाते हैं।

जेडीए में लंच का समय दोपहर डेढ़ से दो बजे तक निर्धारित है, लेकिन लंच के बहाने से निकले अफसर दोपहर तीन बजे के बाद ही लौटते हैं। भास्कर ने इन अफसरों के निकलने और लौटने पर नजर रखी तो जेडीए आयुक्त, उपायुक्त, सचिव के साथ-साथ सिविल विंग के अफसर भी दोपहर तीन बजे के बाद ही वापस लौटते नजर आए।

ऐसे में लोगों के काम तो दूर, मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के बताए काम भी नहीं हो रहे हैं। यह तब है जब कोरोनाकाल में जनसुनवाई बंद हुई तो खुद मुख्यमंत्री ने पहल कर राइट टू सीएम योजना पर काम शुरू किया। मुख्यमंत्री ने लोगों से कहा-अपनी बात मुझे लिखो। इसमें आई शिकायतों में सर्वाधिक लंबित मामले जेडीए में ही रहे।

सीएमओ ने जेडीए से जुड़े 29 मामले भेजे, जिनमें से 26 अब भी लंबित हैं। इनमें से भी 16 मामले तो छह माह से ज्यादा हो गए, जिनका निस्तारण अभी तक नहीं हो सका है। भास्कर ने जेडीए की ऑनलाइन कार्यशैली को भी जांचा। इसमें भी साढ़े छह माह में एकल खिड़की पर 2328 आवेदन प्राप्त हुए, उनमें से सिर्फ 948 का ही निस्तारण हो पाया।
अन्य अफसरों पर वर्जन देने की रोक, जेडीसी ने ही दी सफाई
इस मामले में सचिव सहित उपायुक्त से बातचीत नहीं हो पाई। जेडीए में अफसरों-कर्मचारियों पर वर्जन देने और बाहर लोगों से बातचीत पर जेडीए आयुक्त ने मना कर रखा है। उनका मानना है कि हर मामलों में वे ही ऑफिशियल बातचीत करेंगे। इसलिए जेडीए का पक्ष जानने को भास्कर ने आयुक्त कमर चौधरी से ही बात की।

उन्होंने कहा कि हमारी प्राथमिकता पेंडेंसी खत्म करने की रहती है। अधिकांश प्रकरणों को ऑनलाइन कर निस्तारण शुरू किया। इसकी रोजाना मॉनिटरिंग भी होती है। बेचान अनुमति सहित कुछ अन्य मामलों काे भी ऑनलाइन किया गया, यह सरकार के सूची में नहीं था, फिर भी हमने अपने स्तर पर इसको ऑनलाइन कर लोगों को राहत देने का प्रयास किया है।

कमर उर चौधरी - पद: आयुक्त

जिम्मेदारी
ऑलओवर मॉनिटरिंग, जनहित के कार्यों के त्वरित निस्तारण की जिम्मेदारी
उपस्थिति
दोपहर 1 बजकर 48 मिनट पर निकले, शाम 4 बजे तक नहीं लौटे

हरभान मीणा - पद: सचिव

जिम्मेदारी
प्रशासनिक व्यवस्था को सुव्यवस्थित करना, कर्मचारियों पर नियंत्रण रखना।
उपस्थिति
दोपहर 2 बजकर 8 मिनट पर निकले, साढ़े तीन बजे लौटे

​​​​​​​राजेंद्रसिंह - पद: उपायुक्त

जिम्मेदारी
अपने जोन में अवैध निर्माण व अतिक्रमण रोकने के साथ जनहित से जुड़े सभी मामलों का त्वरित निस्तारण।
उपस्थिति
दोपहर 2 बजे से पहले निकले, साढ़े तीन बजे के बाद लौटे।
अनिल पूनिया - पद: उपायुक्त

जिम्मेदारी
अपने जोन में अवैध निर्माण और अतिक्रमण रोकने के साथ जनहित से जुड़े सभी मामलों का त्वरित निस्तारण।
उपस्थिति
दोपहर 2 बजे बाद निकले, 4 बजे तक लौटे।

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