पूरे गांव के सामने दर्ज होते हैं नाम:गांवों में आज भी संरक्षित है दशकों से चली आ रही जन्म मृत्यु पंजीकरण की परंपरा

जोधपुर11 दिन पहले
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ग्रामीण करते हैं उपहार भेंट। - Dainik Bhaskar
ग्रामीण करते हैं उपहार भेंट।

जन्म मृत्यु पंजीकरण की सरकार की व्यवस्था से इतर गांवों में आज भी ग्रामीणों की अपनी परंपरा और व्यवस्था है। यह काम बही भाट (रावजी) कर रहे हैं। बाकायदा घर में परिवार के नए सदस्य का नाम जोड़ने के लिए रावजी को बुलाया जाता है और ग्रामीणों की मौजूदगी में बच्चे का नाम लिखा जाता है।

वंशजों को सुनाने की (राव) बही प्रथा सदियों से जारी है। इस बही में पीढ़ी दर पीढ़ी जानकारी संकलित है। गांवों में विभिन्न जातियों के वंशजों में (राव) के आने पर परिवार में त्योहार जैसे माहौल होता है। आज भी लोग रावों लिए विशेष भोजन की दावत देते हैं। सृष्टि की उत्पत्ति एवं भगवान का अवतार से चंद्र व सूर्यवंशी भागों में बांटकर पीढ़ी दर पीढ़ी जन्म तारीख, ननिहाल, ससुराल व जातियों की विस्तृत विवरण डिगल एव पिंगल भाषा में बहियों में दर्ज किया जा रहा है।

बही का सामूहिक वाचन प्रत्येक समाज के अलग-अलग बही रावों द्वारा किया जा रहा है। परिवारों में भोजन के बाद रावों द्वारा परिवार की प्राचीन कोटड़ी में बैठकर बही का वाचन किया जाता है। इसमें पूर्वजों के बारे में भी पूरी जानकारी दी जाती है। राव वंशजों के यशगान एवं पीढ़ियों का वाचन करते हैं। इस दौरान युवा पीढ़ी अपने पुरखों के बारे में जानकारी लिखते भी हैं।

विशेष भोज…रावों की रोटी
गांवों में बही (राव) के लिए बनाए जाने वाले विशिष्ट भोजन को ‘रावों की रोटी’ कहा जाता है। रावों को सम्बन्धित वंशजों द्वारा परिवार के सभी घरों में भोजन के लिए न्यौता दिया जाता है। भोजन में हलवा, खीर और कई प्रकार के व्यंजन तैयार किए जाते ोपरिवार को मंगलकामना एवं खुशहाली का आशीर्वाद प्रदान करते हैं।

| राव की बही में परिवार के नए सदस्य का नाम दर्ज करते समय रावों को जेवर एवं वस्त्र भेंट किए जाते हैं। पूर्व के समय में रावों को नजराने में ऊट-घोड़े एवं स्वर्ण मुद्राएं भी दी जाती थी। चेराई गांव में कुमावत बुग (चौहान) परिवार में बही वाचन के दौरान रुपये, वस्त्र एवं जेवरात भेंट किए गए। इस दौरान राव सांवरदान, महावीर, सरपंच प्रतिनिधि अचलाराम पालीवाल, किशनसिंह करनोत, केसाराम, धनाराम, मुलाराम, खेताराम, मोहनराम, चनणाराम, हस्तीराम, बशीलाल, मांगीलाल, मुलाराम, भंवरलाल, झुमरलाल, सताराम, शंकरलाल, ओमप्रकाश, अशोक सहित ग्रामीण मौजूद थे।

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