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बिन मौसम तबादले, दोनों निगम के IAS आयुक्त हटाए:तोमर की पटरी कांग्रेसी मेयर-बाेर्ड से नहीं बैठती, यादव का भाजपा मेयर से तालमेल निर्णायक रहा

जोधपुर6 दिन पहलेलेखक: राजेश त्रिवेदी
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आगे प्रशासन शहराें के संग में RAS कमिश्नर अहम रहेंगे। - Dainik Bhaskar
आगे प्रशासन शहराें के संग में RAS कमिश्नर अहम रहेंगे।
  • 7 माह में बने कारण और आगे की रणनीति भी...

मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के गृहनगर जोधपुर में दोनों नगर निगम (उत्तर-दक्षिण) के आईएएस आयुक्त को बुधवार को अचानक हटाने की चर्चा पूरे शहर में हो रही है। शहर के दाे निगम में से एक में भाजपा बाेर्ड एवं एक में कांग्रेस बोर्ड है। बिना तबादलों के मौसम के इस तरह दोनों ही आयुक्त को हटाने के पीछे पिछले 7 महीनों में बनी परिस्थितियां हैं। इसके साथ ही सरकार अपने आगामी महत्वाकांक्षी अभियान ‘प्रशासन शहरों के संग’ के लिए भी अभी से पूरी तरह फील्डिंग कर रही है। दो निगम-दो मेयर के फैसले के बाद पहली बार लगाए दोनों ही आईएएस कोरोनाकाल के कारण ज्यादा कुछ नहीं कर पाए थे। नगर निगम उत्तर आयुक्त रोहिताश्वसिंह तोमर की मेयर कुंती परिहार के साथ पटरी नहीं बैठ रही थी। निमाज हवेली प्रकरण के बाद से ही वे सरकार की आंख में खटक रहे थे। उधर नगर निगम दक्षिण के आयुक्त डॉ. अमित यादव का भाजपा महापौर को तव्वजो देना भी रास नहीं आ रहा था। प्रदेश में कांग्रेस की सरकार व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के गृहनगर में अधिकारियों द्वारा जनप्रतिनिधियों की सुनवाई नहीं करना भी चर्चा में रहा।

1. आयुक्त उत्तर: महापौर के फैसले से अलग कार्यप्रणाली, मेयर-पार्षदों ने जयपुर में शिकायतें भी कीं

उत्तर नगर निगम में कांग्रेस का बोर्ड काबिज है। यहां कांग्रेस नेता मानसिंह देवड़ा की पुत्री कुंती परिहार के महापौर बनने से पहले ही रोहिताश्वसिंह तोमर आयुक्त थे। हालांकि आयुक्त व महापौर की पटरी नहीं बैठी। दोनों में दूरियां इतनी बढ़ गई कि महापौर के फैसले से आयुक्त अलग ही कार्यप्रणाली रख रहे थे। सार्वजनिक तौर पर दोनाें भले ही साथ बैठते, लेकिन दोनों की कार्यप्रणाली दो ध्रुवों की तरह हो गई। तोमर की कार्यप्रणाली से नाराज महापौर एवं कांग्रेस के अधिकांश पार्षद जयपुर जाकर उनकी शिकायत कर चुके थे।

2. आयुक्त दक्षिण: सरकार की योजना से असहमति, भाजपा मेयर के बताए कार्य करते, खुद भी सलाह लेते

दक्षिण नगर निगम में भाजपा का बोर्ड काबिज हैं। कोनकोर की निदेशक और भाजपा महिला मोर्चा की प्रदेशाध्यक्ष रहीं वनिता सेठ के महापौर बनने के बाद आईएएस डॉ. अमित यादव को राज्य सरकार ने दक्षिण निगम आयुक्त पद पर लगाया था। डॉ. यादव व महापौर में शुरू से ही तालमेल देखने को मिला। डॉ. यादव महापौर के बताए किसी भी काम से इनकार नहीं करते थे। खुद भी कोई अभियान या कोई नीतिगत फैसला लेते तो महापौर की सलाह जरूर लेते थे। यह बात यहां से सरकार के कानों तक भी लगातार पहुंच रही थी।

दरारें यूं शुरू हुईं: मेयर की उपस्थिति में पार्षद ने की आयुक्त से भयंकर तकरार

चैनपुरा में 10 फरवरी को उत्तर नगर निगम के पहले ही स्वच्छता अभियान चल रहा था। यहां आयुक्त तोमर की कांग्रेस के एक पार्षद से कहासुनी हो गई। बात हाथापाई तक पहुंच गई थी। महापौर व अन्य जनप्रतिनिधियों के बीच-बचाव से मामला शांत हुआ। आयुक्त ने इसे अपने आत्मसम्मान से जोड़कर देखा। इसके बाद से ही आयुक्त ने कांग्रेस के अधिकांश पार्षदों को तव्वजो देना बंद कर दिया। यही सामूहिक नाराजगी तबादले का एक कारण बनी।

भाजपा पार्षद बोले- अच्छा काम कर रहे थे, क्यों हटाया?

चौथी बार चुनकर आए पार्षद सुरेश जोशी ‘छोटसा’ बोले-आयुक्त अच्छा काम कर रहे थे, फिर क्यों हटाया। तोमर भाजपा के सभी पार्षदों की सुनते भी थे, और जो काम बताते तो करते भी थे।

महापौर कुंती ने ट्रांसफर के कारणों का जवाब ही नहीं दिया

भास्कर ने आयुक्त के तबादले पर बात करने के लिए मेयर कुंती परिहार को फोन लगाया। पूछने पर उन्होंने जवाब दिया कि वे चांदपोल में किसी कार्यक्रम में हैं। थोड़ी देर में बात करने का कहा। बाद में कई फोन भी लगाए, लेकिन उन्होंने नहीं उठाया।

दरारें यूं शुरू हुईं: आरक्षित दरों, निर्माण अनुमति पर सरकारी मंशा विरूद्ध असहमति जताई

आखलिया योजना को लेकर दक्षिण आयुक्त की असहमति से नाराजगी बढ़ गई। पहले आरक्षित दरों के निर्धारण के बाद विवाद खड़ा होने और बाद में योजना के तहत अतिरिक्त निर्माण की इजाजत देने के मामले में असहमति जताने से कांग्रेस के स्थानीय नेताओं से लेकर जयपुर तक नाराजगी हुई। प्रदेश में कांग्रेस सरकार के बावजूद कांग्रेस के पार्षदों को तव्वजो नहीं देना भी एक अहम कारण सिद्ध हुआ।

निगम में आईएएस नहीं आरएएस बेहतर: नेता प्रतिपक्ष

नेता प्रतिपक्ष गणपतसिंह चौहान ने कहा कि- यह सरकार का फैसला है। निगम जैसी संस्था में आरएएस होना उचित है। इससे रूटीन कार्यों के साथ प्रशासनिक एवं शहर के विकास कार्य भी गति से होते हैं। रेवेन्यू के मामले में भी आईएएस के मुकाबले आरएएस बेहतर सिद्ध होते हैं।

ट्रांसफर से प्रशासन शहरों के संग अभियान पर असर पड़ेगा: मेयर

शहर हित में वे (डॉ. यादव) मेरी बात मानते थे, और मैं भी उनकी किसी बात पर विरोध नहीं करती थी। हालांकि उन्हें हटाने का फैसला सरकार का है। लेकिन इसका प्रशासन शहरों के संग अभियान पर असर पड़ेगा।

समीकरण यह भी - दो माह बाद प्रशासन शहरों के संग के लिए दोनों आयुक्त आरएएस लगाने की संभावना

राज्य सरकार 2 अक्टूबर से प्रशासन शहरों के संग अभियान चला रही है। जोधपुर में कोरोनाकाल के चलते पिछले एक-डेढ़ साल से काम मंथर गति से हो रहे हैं। सरकार की मंशा है कि अभियान में ज्यादा से ज्यादा लोगों के काम हों, ताकि सरकार की छवि को चमका सके। ऐसे में लोगों को पट्‌टे देने की मंशा है। कांग्रेस नेताओं का मानना है कि अभियान के दौरान आरएएस ही आयुक्त के पद पर हो तो लोगों के ज्यादा काम होंगे।

... इधर, ईद के पहले आरएएस अफसर अयूब खां बहाल, जोधपुर से दूर रहेंगे

छह माह पहले शहर के बहुचर्चित निमाज हवेली को लेकर उठे विवाद के बाद आरएएस अधिकारी व तत्कालीन उपायुक्त (उत्तर) अयूब खां को चार्जशीट देते हुए उत्तर आयुक्त रोहिताश्वसिंह तोमर ने सस्पेंड कर दिया था। इसके बाद जांच कमेटी भी गठित हुई थी। इस मामले में राज्य सरकार ने ईद के एक दिन पहले यानि मंगलवार को अयूब खां को सशर्त बहाल कर दिया। फिलहाल सरकार उन्हें जोधपुर में पदस्थापन की इच्छुक नहीं हैं।

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