कोरोना इफेक्ट / जोधपुर पर्यटन अनिश्चितकाल के लिए खत्म, इससे जुड़े 70 हजार लोग के लिए घर चलाना भी हुआ मुश्किल

टूरिस्ट सीजन में मेहरानगढ़ पहाड़ी सैलानियो के वाहनों से भरी रहती है। साल के इन महीनों में भी हजारों लोग आते हैं। लॉकडाउन ने किले और उसकी पार्किंग को पूरी तरह सूना कर दिया है। टूरिस्ट सीजन में मेहरानगढ़ पहाड़ी सैलानियो के वाहनों से भरी रहती है। साल के इन महीनों में भी हजारों लोग आते हैं। लॉकडाउन ने किले और उसकी पार्किंग को पूरी तरह सूना कर दिया है।
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टूरिस्ट सीजन में मेहरानगढ़ पहाड़ी सैलानियो के वाहनों से भरी रहती है। साल के इन महीनों में भी हजारों लोग आते हैं। लॉकडाउन ने किले और उसकी पार्किंग को पूरी तरह सूना कर दिया है।टूरिस्ट सीजन में मेहरानगढ़ पहाड़ी सैलानियो के वाहनों से भरी रहती है। साल के इन महीनों में भी हजारों लोग आते हैं। लॉकडाउन ने किले और उसकी पार्किंग को पूरी तरह सूना कर दिया है।

  • विश्व में ब्ल्यूसिटी की पहचान और टाॅप टूरिस्ट व वेडिंग डेस्टिनेशन में सन्नाटा
  • जोधपुर पर्यटन से जुड़े 70 हजार लोगों के अस्तित्व का संघर्ष

दैनिक भास्कर

May 24, 2020, 06:39 AM IST

जोधपुर. विश्व के टूरिस्ट डेस्टिनेशन में अग्रणी। प्रतिवर्ष 10 लाख अतिथियाें की अगवानी करने वाला। नामी शादियाें का आमंत्रित स्थल बनने वाला। रोजगार व टर्नओवर के मामले में शहर की टाॅप-5 इंडस्ट्रीज में एक। साथ ही 70 हजार घराें का चूल्हा जलाने वाला, यानी जाेधपुर टूरिज्म। लेकिन काेराेना प्रहार ने पर्यटन काे अनिश्चितकाल के लिए खत्म कर दिया है।
पर्यटन ऐसी इंडस्ट्री है जाे कि हालात सुधरने की स्थिति मेें भी सबसे अंत में पुनर्जीवित हो पाएगी। इन परिस्थितियों में इस इंडस्ट्री से जुड़े करीब 70 हजार लोग और उनके परिवार बुरी तरह संकट में आ गए हैं। पर्यटन से जुड़े हर क्षेत्र की अपनी पीड़ा है और अस्तित्व बनाए रखने के लिए सरकार से उम्मीद भी।
हाेटल : 40 फीसदी जॉब जा सकते हैं
हाेटल 350  , रेस्टाेरेंट, गेस्ट हाउस 300

रोजगार 40,000
हालात :  

काेराेना वाॅरियर्स काे ठहराने वाली चंद हाेटल्स काे छाेड़ सारी हाेटलें बंद हैं। यही हालात गेस्टहाउस, रिसाॅर्ट्स के हैं। जाेधाणा हाेटल्स एवं रेस्टाेरेंट्स साेसायटी के अनुसार इन्हें लंबे समय बिना आय चलाना नामुमकिन है। सोसायटी अध्यक्ष जेएम बूब कहते हैं कि होटल इंडस्ट्री के लिए सबसे चुनौतीपूर्ण समय है।

कई कांट्रैक्ट लेबर बेरोजगार हो चुके हैं। करीब 40% तक नाैकरियां जा सकती हैं। होटल्स चालू हो भी जाएं तो खर्च काफी बढ़ जाएंगे। रेस्टाेरेंट्स का किराया व इलेक्ट्रीसिटी फिक्स चार्ज भी भारी पड़ रहा। स्थितियां कब सामान्य होंगी, यह भी पता नहीं है।
डिमांड 

डोमेस्टिक टूरिज्म काे बढ़ावा देने की स्कीम। इलेक्ट्रिसिटी फिक्स चार्ज व अन्य चार्जेस में राहत दी जाए।
गाइड : लंबे समय तक काम मिलने के आसार नहीं
रोजगार 300   

हालात :

शहर में करीब 300 टूरिस्ट गाइड हैं जिनकी सैलानी ना आने तक कोई आमदनी नहीं हाेनी है। गाइड्स को लाइसेंस टूरिज्म डिपार्टमेंट देता है और इन्हें हर 2 साल में फीस देकर रिन्यू कराना होता है। फिर भी जीवन या स्वास्थ्य बीमा या आपदा की स्थिति में सहायता का कोई प्रावधान नहीं है।

जोधपुर गाइड एसोसिएशन महासचिव ऋषिराजसिंह कहते हैं, 1 साल हालात सुधरते नहीं दिख रहे। गाइड्स चिंता में हैं कि घर कैसे चलाएंगे? जोधपुर टूरिस्ट गाइड एसो. महासचिव मानसिंह कहते हैं कि टूरिज्म शुरू होने से पहले जीविकोपार्जन करना गाइड्स के लिए चुनौती है।
डिमांड

 टूरिज्म आरंभ तक सम्मानजनक भरण-पोषण भत्ता, लोन ब्याज में राहत।
ट्रेवल एजेंसी ना तो बुकिंग आ रही और ना ही इंक्वायरी
रोजगार 100               

हालात :  

शहर में करीब 25 ट्रेवल एजेंसियां हैं जो पर्यटकों को लाने, घुमाने, रुकवाने आदि व्यवस्थाएं करती हैं। दो महीने से इनके पास काम नहीं है। ट्रेवल एजेंट एसोसिएशन ऑफ जोधपुर महासचिव नरेंद्रसिंह खींची कहते हैं- अभी एक भी बुकिंग नहीं है और ना कोई पूछताछ आ रही है। हालात नहीं सुधरे तो छंटनी होगी। उधर कोरोना समाप्ति की कोई डेडलाइन नहीं दिख रही है।

यहां मुख्यत: यूराेपियन क्लाइंट आता है, और काेराेना से पूरा यूराेप कोरोना की चपेट में है। जिन देशाें में हालात कुछ काबू में हैं, वहां भी टूरिज्म के लिए नहीं जाने की एडवायजरी जारी हैं। ऐसे में अभी इन चीजाें का अंत नजर नहीं आ रहा है। 
डिमांड 

डाेमेस्टिक टूरिज्म को बढ़ावा। सुरक्षा उपाय अपना विदेशियों को बुलाने की योजना।
माॅन्यूमेंट्स, कलाकार : रोजगार-आय का प्रश्न
रोजगार 25,000

 हालात

माॅन्यूमेंट्स, टेक्सटाइल-ज्वैलरी-हैंडीक्राफ्ट-मसाला शाेरूम, कलाकार, आर्टिस्ट, हस्तशिल्पी, आर्टिजन्स, कन्वेंसर, विलेज सफारी के आर्टिजंस, मनी एक्सचेंज आदि के माध्यम से 20-25 हजार लाेगाें का राेजगार जुड़ा है। इन सबकी आय भी अनिश्चित काल के लिए खत्म हाे चुकी है। इनसे जुड़े अधिकांश लोग बरसों से यही काम कर रहे हैं। अब इन परिस्थितियाें में इन लोगों को ये भी नहीं समझ आ रहा कि ट्रेड के दुबारा शुरू हाेने तक काम क्या करें?
डिमांड

विशेष पैकेज, हर वर्ग के लिए राहत की व्यवस्था।
राहत ऐसी कि आहत हुए टूरिस्ट गाइड्स
हाल ही में सरकार ने विभिन्न श्रेणी के कामगारों के लिए घोषित दो माह के निशुल्क राशन की सूची में टूरिस्ट गाइड्स को भी लिया। हालांकि इस सूची में आने पर अधिकांश गाइड्स ने आपत्ति जताई है। गाइड्स का कहना है कि वे पेशेवर एवं पढ़े-लिखे होने के साथ ही विदेशियों के सामने भारत के सांस्कृतिक राजदूत की सम्माजनक भूमिका निभाते हैं।

इसके बावजूद उन्हें कामगारों की श्रेणी में लेना गलत है। उन्हें सम्मानजनक भरण-पोषण भत्ता अथवा पैकेज मिलना चाहिए।

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