पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

Install App

2 ग्रुप बनाकर कर रहे ट्रायल स्टडी :एम्स में शुरू हुआ प्लाज्मा थैरेपी से इलाज

जाेधपुर15 दिन पहले
  • कॉपी लिंक
  • विशेषज्ञ बोले- अभी कुछ कहना जल्दबाजी
Advertisement
Advertisement

एम्स में प्लाज्मा थैरेपी से कोरोना के मध्यम मरीजों का इलाज शुरु कर दिया है। दरअसल 8 मई को एम्स जोधपुर और डॉ. एसएन मेडिकल कॉलेज दोनों को आईसीएमआर से कोरोना मरीजों पर प्लाज्मा थैरेपी ट्रायल स्टडी की अनुमति मिली। इसके बाद कोरोना संक्रमण से स्वस्थ हुए लोगों से संपर्क कर प्लाज्मा एकत्रित करने का काम शुरू किया।

एम्स जोधपुर में 6 जून को पहला व्यक्ति प्लाज्मा थैरेपी में सहयोग को तैयार। लेकिन आईसीएमआर ने उस मरीज को कंट्रोल ग्रुप के लिए चुना। एम्स में 9 जून को पहली महिला कोरोना संक्रमित मरीज को प्लाज्मा चढ़ाया। उसके बाद बुजुर्ग मरीज जो दूसरी बीमारी से भी ग्रसित थे, उन्हें सप्ताह भर पहले प्लाज्मा की डोज दी गई। गाइडलाइन में परिवर्तन हाेने से एम्स ने इसे अपनी स्टडी में शामिल नहीं किया।

दो दिन पहले एक अन्य महिला को एम्स ने प्लाज्मा चढ़ाया। जानकारी के अनुसार अब तक जिन्हें भी प्लाज्मा चढ़ाया, उनकी स्थिति में सुधार दिखा। हालांकि विशेषज्ञ डॉक्टर मरीजों की स्थिति में सुधार को अभी अच्छे परिणाम के रुप में नहीं ले रहे, क्योंकि स्टडी के रिजल्ट के लिए केवल तीन मरीजों पर कुछ कहना जल्दबाजी होगी।

दो ग्रुप बनाकर कर रहे हैं स्टडी
एम्स में प्लाज्मा थैरेपी ट्रायल स्टडी के लिए कोराेना संक्रमिताें के दो ग्रुप बनाए हैं। एक कंट्रोल ग्रुप है, जिसमें मरीजो को प्लाज्मा थैरेपी की बजाय रूटीन दवाएं आदि दे रहे हैं। दूसरा थैरेपी ग्रुप में मरीजों में प्लाज्मा चढ़ाने के साथ ही दवा भी दी जा रही है। दोनों ग्रुप में देखा जा रहा है कि कितने मरीज बिना प्लाज्मा थैरेपी ठीक हो रहे हैं। साथ ही दोनों की रीकवरी मे कितना समय लग रहा है। हालांकि स्टडी अभी शुरू हुई जिसके रिजल्ट आने में समय लगेगा।
1 मरीज के लिए एमडीएम से सहयोग
एम्स में भर्ती कोरोना संक्रमित बुजुर्ग को प्लाज्मा थैरेपी ऑफ लेवल पर देने के लिए डॉक्टर तैयार हो गए। लेकिन बुजुर्ग का ब्लड ग्रुप बी पॉजिटिव था जिसका कोई प्लाज्मा डोनर नहीं था। मरीज की जान बचाने काे एम्स ने एमडीएम ब्लड बैंक प्रभारी डॉ. जीसी मीणा से संपर्क कर वहां मौजूद बी पॉजिटिव प्लाज्मा मंगाकर दो डोज बुजुर्ग को चढ़ाया। इसके बाद उनकी स्थिति में सुधार है। गाैरतलब है कि एमडीएम में कोरोना से सही होकर डिस्चार्ज हुए 11 मरीजों ने प्लाज्मा डोनेट किया है।  

क्या होती है प्लाजा थैरेपी

कोरोना संक्रमण से स्वस्थ हाेने वालाें के ब्लड में जो एंटीबॉडीज बन जाते हैं उन्हें ही प्लाज्मा कहते हैं। इस थैरेपी में स्वस्थ हुए व्यक्ति के ब्लड से एंटीबॉडीज निकालकर कोरोना पीड़ित के शरीर में डाली जाती हैं। यह एंटीबॉडी संक्रमण खत्म करने में मदद करती है।

ज्यादातर मामलों में जब एंटीबॉडी बन जाती है तो वायरस नष्ट हो जाता है। ऐसे में वायरस को मात देकर स्वस्थ हुआ व्यक्ति ब्लड डोनेट करता है, तो उसके खून से प्लाज्मा में मौजूद एंटीबॉडी को दूसरे मरीज में डाला जा सकता है। संक्रमि‍त शरीर में जाकर एंटीबॉडी काम शुरू करते हैं और मरीज को ठीक होने में मदद करते हैं।

कौन दे सकता है
कोरोना संक्रमित मरीज जो कि लक्षण मुक्त हो गया है। उसके बाद 28 दिन भी पूरे कर चुका है। वह प्लाज्मा डोनेट कर सकता है।

क्या प्रक्रिया है
कोरोना से स्वस्थ हुए व्यक्ति का प्लाज्मा लेते हैं। एम्स ब्लड बैंक में व्यक्ति की पूरी जांच कर फिट होने पर एफेरेसिस मशीन से प्रोसिजर करते हैं। 35 मिनट के प्रोसेस में डोनर से 500 एमएल प्लाज्मा निकालते हैं। बाकी ब्लड फिर चढ़ा देते हैं। प्लाज्मा बीमार व्यक्ति की अनुमति के बाद चढ़ाया जाता है। जिस ग्रुप का डोनर है उसी ग्रुप वाले कोरोना संक्रमित मॉडरेट मरीज को प्लाजमा दे सकते हैं। एक व्यक्ति से निकाला प्लाज्मा दो संक्रमितों के काम आ सकता है। गाइडलाइन के अनुसार प्लाज्मा की दो डोज एक व्यक्ति को दी जाएगी। पहली डोज के बाद कोई रिएक्शन या समस्या नहीं होती है तो 24 घंटे बाद दूसरी डोज देते हैं।

प्लाज्मा डोनर यहां करें संपर्क
कोरोना संक्रमण से स्वस्थ एवं प्लाज्मा देने के इच्छुक सीधे हॉस्पिटल आने की बजाय एम्स ब्लड बैंक प्रभारी को 0291-2831436 पर संपर्क रजिस्ट्रेशन करवा सकते हैं। यहां जानकारी लेने के बाद डोनर को निश्चित समय पर एम्स ब्लड बैंक में बुलाया जाएगा।

Advertisement
0

आज का राशिफल

मेष
मेष|Aries

पॉजिटिव - आज का दिन पारिवारिक और आर्थिक दोनों दृष्टि से शुभ फलदायी है। व्यक्तिगत कार्यों में सफलता मिलने से मानसिक शांति का अनुभव करेंगे। कठिन से कठिन कार्य को आप अपने दृढ़ निश्चय से पूरा करने की क्षमत...

और पढ़ें

Advertisement