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गहलोत के घर में बिखरा कांग्रेस का रायता:मदेरणा परिवार को साधने के प्रयास में हुई अनदेखी से आहत दो महिला सदस्यों ने बिगाड़ा गहलोत का गणित

जोधपुर14 दिन पहले
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जोधपुर में जिला प्रमुख पद का नामांकन दाखिल करने जाती लीला मदेरणा। - Dainik Bhaskar
जोधपुर में जिला प्रमुख पद का नामांकन दाखिल करने जाती लीला मदेरणा।

मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के घर जोधपुर में आखिरकार कांग्रेस का रायता बिखर गया। जिला प्रमुख चुनाव में गहलोत के सिपहसालारों ने भरसक प्रयास किए कि एक प्रत्याशी ही नाम दाखिल करे। कांग्रेस ने लीला मदेरणा को अपना अधिकृत प्रत्याशी बनाया। पार्टी में उनका जोरदार विरोध हो गया और तीन अन्य महिला सदस्यों ने भी नामांकन दाखिल कर दिया। नाम वापसी का समय निकल जाने से पहले सिर्फ एक ने अपना नाम वापस लिया। अब कांग्रेस के सारे समीकरण गड़बड़ा गए है और उसका संकट बढ़ गया है। भाजपा की तरफ से एकमात्र प्रत्याशी मैदान में है।

गहलोत ने जाटों में प्रभावी मदेरणा परिवार को साधने के प्रयास में अन्य दावेदारों की अनदेखी कर दी। साथ ही उनके रणनीतिकार भी विरोध के स्वर को पूरी तरह से भांप नहीं पाए। लीला को प्रत्याशी बना मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने एक तीर से दो निशाने साधने का प्रयास किया। इसके साथ ही उप जिला प्रमुख पद भी रामसिंह विश्नोई के पौत्र विक्रम को देने की तैयारी है। गांवों की इस राजनीति में जाट व विश्नोई समुदाय के दो प्रभावशाली परिवारों को आगे कर गहलोत अपने बेटे वैभव के लिए राजनीतिक आधार तैयार करने में जुटे है। लेकिन दो महिला सदस्यों ने अपना नाम वापस नहीं लेकर गहलोत की गणित को गड़बड़ा कर रख दिया।

अड़ गई थी लीला

छठी बार जिला परिषद की सदस्य चुनी गई लीला मदेरणा की शुरू से ही जिला प्रमुख बनने की आकांक्षा रही। उन्होंने अपने महत्वकांक्षा को कभी दबाया भी नहीं। इस बार लीला व विधायक पुत्री दिव्या ने साफ कर दिया था कि जिला प्रमुख पद के अलावा कोई समझौता नहीं। स्थानीय स्तर पर उन्हें मनाने के लिए कई प्रस्ताव लीला के समक्ष रखे गए। लेकिन उन्होंने साफ नकार दिया। इसके बाद बद्री जाखड़ को तैयार किया गया। उनके परिवार को प्रधान के दो पद देकर शांत किया गया। इसके बाद लीला के नाम पर मोहर लग गई।

जोधपुर में राजपूत, जाट व विश्नोई का प्रभाव

जोधपुर जिले की राजनीति में राजपूत, जाट व विश्नोई जातियों का अहम प्रभाव रहा है। राजपूत लंबे अरसे से भाजपा का साथ देते रहे है। वहीं कांग्रेस के परम्परागत वोट बैंक रहे जाट माहौल देख पाळा बदलते रहे है। जबकि विश्नोई समुदाय परिस्थितियों के अनुरूप निर्णय लेता रहा है, लेकिन मोटे तौर पर अभी तक कांग्रेस से जुड़ा है। जोधपुर में इन तीन प्रमुख जातियों में से दो को साधे बगैर लोकसभा चुनाव जीतना बेहद मुश्किल माना जाता है। जोधपुर से कई बार सांसद रह चुके गहलोत इस गणित से अच्छी तरह से वाकिफ है।

वैभव के लिए तैयार किया जा रहा है आधार

गहलोत अपने बेटे वैभव के लिए राजनीतिक आधार तैयार करने का प्रयास कर रहे है। ऐसे में वे जोधपुर जिले की राजनीति में जाटों पर मजबूत पकड़ रखने वाले मदेरणा परिवार की नाराजगी लेने की स्थिति में नहीं है। वहीं विश्नोई समुदाय को साधने के लिए वे स्व. रामसिंह विश्नोई के पौत्र विक्रम विश्नोई को उप जिला प्रमुख पद देने की तैयारी में है। इन दो बड़ी जातियों को इसके माध्यम से साध कर वे वैभव की राजनीति को मजबूती देने का प्रयास कर रहे है।

गहलोत ने पहले भी रखा दोनों परिवार का ध्यान

गहलोत ने भंवरी प्रकरण के कारम संकट में घिरे मदेरणा व विश्नोई परिवार को कभी छिटकाया नहीं। इन दोनों परिवारों की सीट पर किसी अन्य को प्रत्याशी नहीं बनाया। इस परिवार के सदस्यों को ही मौका दिया। एक बार दोनों परिवार के सदस्य हार गए। लेकिन गत बार दोनों परिवार की तीसरी पीढ़ी चुनाव जीत गई।

ठसक के लिए विख्यात रहा है मदेरणा परिवार

मदेरणा परिवार अपनी ठसक के लिए विख्यात है। वे अपनी बात पर अड़ जाते है तो उन्हें समझाना बहुत मुश्किल हो जाता है। वर्ष 2009 के विधानसभा चुनाव के बाद महिपाल मदेरणा जलदाय के साथ ही जल संसाधन विभाग का मंत्री बनने को अड़ गए थे। गहलोत ने काफी प्रयास किया कि वे एक विभाग पर मान जाए। आखिरकार मदेरणा परिवार की चली और महिपाल को दो विभाग का मंत्री बनाया गया।

जाखड़ को समझाना था आसान

मुन्नी देवी का टिकट काट लीला को प्रत्याशी बनाने के लिए कांग्रेस नेताओं के लिए बद्रीराम जाखड़ को समझाना कहीं अधिक आसान रास्ता था। उन्होंने यही राह चुनी। बद्रीराम के परिवार के दो सदस्यों को प्रधान पद का प्रत्याशी बना दिया गया। लेकिन मुन्नी देवी ने भी एनवक्त पर नामांकन दाखिल कर अपने तेवर दर्शा दिए।

कांग्रेस में लीला का विरोध

कांग्रेस में मदेरणा परिवार का ही जोरदार विरोध हो रहा है। नई व युवा महिला सदस्यों का कहना है कि कब तक एक ही परिवार को अवसर मिलता रहेगा। ऐसे में पार्टी की तरफ से अधिकृत प्रत्याशी नहीं बनाए जाने के बाद मुन्नी के अलावा लीला देवी व नेहा चौधरी ने भी नामांकन दाखिल कर दिया। नाम वापसी का समय निकल जाने तक सिर्फ लीला देवी ने नाम वापस लिया।