पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें

भास्कर ग्राउंड रिपोर्ट:पूरे प्रदेश में अनलॉक-4 लेकिन जेडीए लॉकडाउन में, जनता के लिए सिर्फ सुबह 11 से 1 बजे तक खुलते हैं द्वार

जोधपुर14 दिन पहले
  • कॉपी लिंक
जनता से दूर फाइल ट्रेकिंग सिस्टम का डिस्प्ले। - Dainik Bhaskar
जनता से दूर फाइल ट्रेकिंग सिस्टम का डिस्प्ले।
  • जनता से जुड़े विभाग में अनोखी व्यवस्था, उस पर भी ये हाल- 2328 प्रकरणों में से 948 ही निस्तारित किए

पूरा प्रदेश भले अनलॉक-4 में खुल रहा है, लेकिन जोधपुर विकास प्राधिकरण में अब भी लॉकडाउन जारी है। यहां पर पट्टा बनाना, नियमन और नाम ट्रांसफर जैसे कार्य और प्रकरण लेकर आने वाली जनता को सुबह 11 बजे से दोपहर 1 बजे तक ही प्रवेश की अनुमति है। इसके बाद जेडीए के गेट बंद हो जाते हैं। यह लॉकडाउन तकरीबन 15 दिन से चल रहा है।

कायदे से देखा जाए तो जनता का प्रवेश समय खत्म होने के बाद सभी कर्मचारियों और अफसरों को पूरी तरह काम पर केंद्रित हो जाना चाहिए। लेकिन भास्कर ने जब जेडीए की एकल खिड़की पर आए आवेदनों को जांचा तो तस्वीर अलग ही नजर आई।

एकल खिड़की पर साढ़े छह माह में 2328 आवेदन प्राप्त हुए, जिनमें से सिर्फ 948 का ही निस्तारण हुआ। 1091 प्रकरण तय समय के बाद भी पेंडिंग चल रहे हैं। 289 प्रकरण तय सीमा में हैं, लेकिन अब तक इनका निस्तारण नहीं हुआ है। यानी जेडीए में जनता की एंट्री भी सीमित कर दी गई है, उनके जाने के बाद भी जनता के कामों पर कोई फोकस नहीं हो रहा है।

सिर्फ कागजों में राजस्थान लोक सेवा गारंटी अधिनियम

इधर जब जनता के काम तय समय पर नहीं होते तो वे येन-केन प्रकारेण जेडीए में आने और अपने प्रकरण का स्टेटस जानने की जद्दोजेहद में लग जाते हैं। इसके लिए वे तय समय के बाद भी जेडीए में आने की जुगत लगाते दिखते हैं। हालांकि सरकार ने लोगों को चक्कर लगाने से निजात दिलाने और दलालों पर अंकुश लगाने को राजस्थान लोक सेवा गारंटी अधिनियम लागू किया है।

इस अधिनियम में हर श्रेणी के कार्य पूरे करने की समय सीमा निर्धारित की गई है, साथ ही कार्य को अटकाने वाले कर्मियों पर कार्रवाई का भी प्रावधान है। हालांकि हकीकत यह है कि इस अधिनियम के तहत जेडीए में काम ही नहीं हो रहा है।

ना तो तय समय पर लोगों के प्रकरणों का निस्तारण होता है और ना ही ऐसा करने पर किसी कर्मचारी पर कार्रवाई। जेडीए सचिव और आयुक्त द्वारा हर दोपहर 3 से 5 बजे तक जनता की सुनवाई करने की परंपरा रही है, वह परंपरा भी इस नई समय सीमा के कारण खत्म हो गई है।

जनता से दूर फाइल ट्रेकिंग सिस्टम का डिस्प्ले

जनता के प्रकरणों पर कार्रवाई चल रही है, ये दर्शाने को बाकायदा फाइल ट्रेकिंग सिस्टम का डिस्प्ले भी लगाया गया है। हालांकि ये डिस्प्ले जेडीए चेयरमैन के कमरे के बाहर है, जहां पर जनता 1 बजे के बाद पहुंच ही नहीं सकती। डिस्प्ले कई बार बंद भी पड़ा रहता है।

जनता के लिए सिस्टम ऑनलाइन, लेकिन ऑफिस में वही ढर्रा

जनता के लिए तो हर आवेदन को ऑनलाइन कर दिया गया है, लेकिन उनके प्रकरणों की समीक्षा से लेकर निस्तारण तक का ढर्रा वही पुराना चल रहा है।

जयपुर जेडीए में भी पाबंदी, पर लोगों के काम का पुख्ता सिस्टम, पेंडेंसी पर आरएएस पर भी कार्रवाई

जयपुर जेडीए में भी आगंतुकों के लिए समय सीमा तय है, लेकिन वहां ऑनलाइन सिस्टम एवं फाइल ट्रेकिंग सिस्टम पूरी तरह चुस्त है। कोरोनाकाल में ही जब यहां पर प्रकरणों की पेंडेंसी बढ़ गई तो आयुक्त गौरव गोयल ने संबंधित 7 जोन उपायुक्त सहित 12 अफसरों को नोटिस देकर, भविष्य में 16 सीसी नोटिस की चेतावनी दी।

स्टाफ-लोगों की सुरक्षा के लिए प्रवेश सीमा

सीधी बात- कमर चौधरी, जेडीए आयुक्त

Q. जेडीए में प्रवेश समय की बाध्यता क्यों?

कोविड गाइडलाइन पालना में स्टाफ और लोगों की सुरक्षा के मद्देनजर ये कदम उठाया।

Q. 6 माह में एकल खिड़की के अधिकांश प्रकरणाें का निस्तारण क्याें नही हुआ?

एकल खिड़की पर आए प्रकरणाें की हर सप्ताह समीक्षा करता हूं। सचिव स्तर पर भी राेज समीक्षा हाेती है।

  • भास्कर: लाेकसेवा गारंटी अधिनियम के तहत आगंतुकों के काम तय समय पर हो रहे हैं?

अधिकांश काम डेडलाइन से पहले हाेते हैं। जिन पत्रावलियाें में कमी हाेती है, वे अटकती हैं।

खबरें और भी हैं...