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निशुल्क पीडियाट्रिक वार्ड:संक्रमित बच्चों के लिए बनाया वार्ड, पढ़ाई, मनोरंजन और खेलकूद की भी सुविधा

जोधपुर21 दिन पहले
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पीडियाट्रिक वार्ड में गिटार सहित खिलौनों की व्यवस्था है। - Dainik Bhaskar
पीडियाट्रिक वार्ड में गिटार सहित खिलौनों की व्यवस्था है।
  • प्रदेश में अपनी तरह का पहला वार्ड, बच्चों को लाने-ले जाने को एंबुलेंस व ऑटो भी खरीदे

कोरोना की तीसरी लहर में बच्चों पर संभावित खतरे को देखते हुए चार दोस्तों ने चौहाबो सेक्टर 21 में बंद पड़ी एसेंट सीनियर सैकंडरी स्कूल में 30 बेड का निजी निशुल्क पीडियाट्रिक वार्ड बनाया है। स्कूल निदेशक महेंद्रसिंह गुर्जर व लाल बूंद जिंदगी संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष रजत गौड़ और उनके दो दोस्तों की ओर से शुरू किए गए इस वार्ड में बच्चों को इलाज और जांचों के साथ पढ़ाई, खेलकूद व मनोरंजन की हर सुविधा भी मिलेगी।

यहां नवजात से लेकर 15 साल तक के कोरोना संक्रमित बच्चों के लिए 24 घंटे चाइल्ड स्पेशलिस्ट, सर्जन, न्यूरो सर्जन, फिजिशियन और मेडिकल एक्सपर्ट की सुविधा रहेगी। महेंद्रसिंह गुर्जर व रजत गौड़ ने बताया कि वार्ड का उद्घाटन राजस्थान हाईकोर्ट के न्यायाधीश मनोज गर्ग, संभागीय आयुक्त राजेश शर्मा, बाल संरक्षण आयोग की चेयरमैन संगीता बेनीवाल, कलेक्टर इंद्रजीतसिंह, सीएमएचओ बलवंत मंडा के अलावा वर्चुअल समारोह में आरसीए के चेयरमैन वैभव गहलोत, विधायक मनीषा पंवार, विधायक महेंद्रसिंह विश्नोई व सुनील परिहार जुड़ेंगे।
खून जांच के लिए खरीदी 10 लाख की मशीन, ऑक्सीजन सिलेंडर व कंसंट्रेटर भी मिलेंगे
प्रदेश निजी स्तर पर खोले गए किसी भी निशुल्क कोविड वार्ड में ब्लड जांच व सैंपलिंग की सुविधा नहीं है, लेकिन लाल बूंद जिंदगी संस्थान की ओर से दस लाख रुपए की लागत से पूरी लैब बनाई है ताकि मरीजों या उनके परिजनों को ब्लड जांच के लिए बाहर नहीं जाना पड़े।

बच्चों को लाने ले जाने के लिए टीम ने दो एंबुलेंस भी खरीदी हैं। इसके लिए ऑक्सीजन सिलेंडर, ऑक्सीजन कंसंट्रेटर सहित जरूरत के सभी मेडिकल उपकरण और मेडिकल टीम की सुविधा भी निशुल्क रहेगी। शहर की तंग गलियों में रहने वाले मेडिकल स्टाफ और मरीज के साथ पैरेंट्स को लाने-ले जाने के लिए टीम ने दो तिपहिया ऑटो रिक्शा भी खरीदे हैं।

बच्चों-पैरेंटस के लिए संगीत व योगा व बुक बैंक भी
वार्ड में भर्ती बच्चों के के साथ उनके अभिभावकों के लिए अलग से रहने और खाने-पीने की व्यवस्था होगी। म्यूजिक व योग की विशेष क्लासेज के साथ किस्से-कहानियों और जनरल नॉलेज से जुड़ी किताबों का मिनी बुक बैंक भी है। पहली से 12वीं तक का कोई भी बच्चा किसी भी विषय के बारे में पढ़ाई करना चाहता है तो स्पेशलिस्ट के रूप में टीचर्स वर्चुअल क्लास लेंगे।

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