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नेहरू पार्क बरसाती नाला:जनवरी-20 तक बनना था, विभागों में तालमेल नहीं, 40% ही बना, तेज बारिश में फिर पानी-पानी होगा शहर

जोधपुर2 महीने पहलेलेखक: राजेश त्रिवेदी
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सरदार क्लब से जेएनवीयू परिसर के नाले को जोड़ने के लिए पेड़ों को काटना पड़ा, जिसका स्टूडेंट्स ने विरोध किया इसके बाद काम आगे नहीं बढ़ा। - Dainik Bhaskar
सरदार क्लब से जेएनवीयू परिसर के नाले को जोड़ने के लिए पेड़ों को काटना पड़ा, जिसका स्टूडेंट्स ने विरोध किया इसके बाद काम आगे नहीं बढ़ा।
  • 1 साल पैसों की कमी, दूसरा JNVU से विवाद
  • तीसरा साल टेंडर, 2 साल में भी नाला अधूरा

नेहरू पार्क बरसाती नाले को जोजरी से जोड़ने का काम दो साल में 50 फीसदी भी पूरा नहीं हो पाया है। यह स्थित तब है, जब इसी नाले में एक लेक्चरर के बहने की लोमहर्षक घटना और हाईकोर्ट की कड़ी नाराजगी के बाद नगर निगम को इसे जनवरी 2020 तक पूरा करना था। सरकारी विभागों में आपसी तालमेल नहीं होने से नाला निर्माण पंचवर्षीय योजना बन चुका है।

4 साल पहले हाईकोर्ट के दखल पर राज्य सरकार के नेहरू पार्क नाले निर्माण अटल मिशन फॉर रेजुवेनशन एंड अर्बन ट्रांसफॉर्मेशन (अमृत मिशन) के तहत 18 करोड़ की राशि उपलब्ध करवाने से 7 किमी लंबे नाले के निर्माण का मार्ग प्रशस्त हो गया। हालांकि कई अड़चनों के बाद 2019 में नाला निर्माण शुरू हो गया।

इसे ठेका फर्म को जनवरी 2020 तक पूरा करना था, लेकिन जेएनवीयू परिसर से जोजरी नदी तक चैनल नंबर 4470 से 11400 तक कभी जेएनवीयू तो कभी आफरी, वन विभाग, पीएचईडी व जोधपुर डिस्कॉम से सहयोग नहीं मिलने से काम गति नहीं पकड़ पाया। नतीजा, दो-सवा दो साल में 40 फीसदी निर्माण भी पूरा नहीं हो पाया।

इससे इस मानसून भी शहर को जलभराव का दंश झेलना ही पड़ेगा। ठेका फर्म का कहना है कि अगर मानसून के बाद शिफ्टिंग का काम पूरा हो जाए तो शेष 4 किमी नाला निर्माण मार्च 2022 तक पूरा हो जाएगा। आयुक्त (दक्षिण) अरुणकुमार पुराेहित ने नेहरू पार्क नाले के निर्माण का निरीक्षण किया। अड़चनाें काे दूर करने काे लेकर दूसरे विभागाें से बातचीत की।

कोर्ट ने जुलाई-17 तक जोड़ने को कहा, निगम बोला-पैसे नहीं

हाईकोर्ट ने नाले को 31 जुलाई 2017 तक जोजरी से जोड़ने को कहा। निगम के पैसे नहीं होने की बात पर हाईकोर्ट ने नाराजगी जताई। तब राज्य सरकार को 10 नवंबर 2017 तक नाले पर खर्च हाेने वाली राशि 50 फीसदी देने काे कहा।

नाला निर्माण विवाद लंबा चला, ढाई साल पहले बनी सहमति

कोर्ट ने अड़चन डालने वाले सरकारी महकमों को फटकार लगाई थी। ढाई साल पूर्व जेएनवीयू ने नाले को परिसर से निकालने की सशर्त सहमति दी थी। पहले पीली टंकी होते हुए न्यू कैंपस की दीवार के सहारे आफरी तक नाला ले जाने का प्लान था।

टेंडर प्रक्रिया में बीता डेढ़ साल फिर गुजरात की फर्म को काम

टेंडर प्रक्रिया में उलझने से नाला निर्माण का फैसला नहीं हो पाया। बाद में गुजरात की फर्म को दो साल पहले काम सौंपा, जिसने जेएनवीयू प्रशासन के साथ शर्त की पालना में जोजरी की तरफ से काम शुरू किया।

बाधाएं हटे तो भी पूरा होने में लगेंगे 8 माह और

नेहरू पार्क से सरदार क्लब के पिछले गेट तक 4.5 किमी नाला बना था, 7 किमी बनना था। दो साल में बना सिर्फ 3.5 किमी। जेएनवीयू परिसर से 90-95 पेड़ काटने की प्रक्रिया विवाद में फंस गई। फाॅरेस्ट के 275-280 पेड़ कटना बाकी है। पानी-सीवर व बिजली लाइनें शिफ्ट होनी हैं। वहीं ठेका फर्म का काम देख रहे हरिओम शर्मा ने बताया कि कोरोनाकाल में कई मजदूर काम छोड़कर गए। कार्यावधि पूरी हुए 10 माह बीते, 70 लाख का भुगतान अटका, जिससे फर्म भी मुश्किल में। वेतन चुकाने व निर्माण सामग्री लाने में दिक्कत।

  • कहां अटका: 33 केवी लाइनाें की शिफ्टिंग के बाद शुरू होगा काम,आफरी व जेएनवीयू की जमीन पर 350 पेड़ काटने का काम बाकी
  • आगे क्या उम्मीद: ठेका फर्म ने माना-मानसून के बाद शिफ्टिंग पूरी हो तो शेष रहा 4 किमी लंबा नाला मार्च 2022 तक हो सकता है पूरा
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