खुशहाली की कामना:भोलूपुरा के कारिश देव दरबार के मेले में भक्तों की उमड़ी भीड़, परिवार में खुशहाली की कामना की

हिन्डौन5 महीने पहले
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कुड़गांव पतरामपुरा ग्राम पंचायत के भोलूपुरा गांव में स्थित मंदिर में हर वर्ष भादो की पंचमी के अवसर पर आयोजित होने वाले कारिश देव के दरबार में बुधवार को भव्य मेले का आयोजन हुआ, जिसमें श्रद्धालुओं ने बाबा के दरबार में धोक लगा एवं कनक दंडवत कर परिवार की खुशहाली की मनौतियां मांगी। मेला समापन के बाद देर शाम से कुश्ती, नाल दौड़, ऊंची कूद सहित अन्य प्रतियोगिताओं का आसपास के सैकड़ों गांवों के हजारों दर्शक एवं श्रद्धालुओं की भीड़ ने आनंद लिया। कारिश देव बाबा के दरबार में आयोजित मेले में आसपास ग्रामीण क्षेत्र के पुरुष महिला श्रद्धालुओं का ग्रामीण परिधानों में सज धज कर सुबह से ही आना शुरू हो गया। महिलाएं गीतों पर नृत्य करते हुए चल रही थी। वही कुछ श्रद्धालुओं ने कनक दंडवत करते हुए बाबा के दरबार में पहुंच कर हाजिरी लगाई और अपने परिवार के खुशहाली की मनौतियां मांगी। पूर्व सरपंच राजवीर सिंह, सरपंच वीरेंद्र गुर्जर पूर्व, राकेश गुर्जर, फौजी जीतराम गुर्जर, सुरेश बिंदापुर सहित गुर्जर समाज के पंच पटेल एवं गणमान्य लोगों ने बताया कि गांव में भादो की पंचमी को हर वर्ष कारिश देव के मंदिर में भव्य मेले का आयोजन होता है जिसमें आसपास ग्रामीण क्षेत्रों के हजारों श्रद्धालु एवं सांप, बिच्छू, गोयरा सहित अन्य विषैले जीव जंतुओं के डसे या कांटे पीड़ित लोग यहां पूरे वर्ष आकर अपना उपचार करवाते हैं। इस प्रकार के मरीजों की इस मेले में भारी भीड़ रहती है। इसलिए इस देव को जहर की दवा कारिश देव के नाम से भी जाना जाता है।

इस मेले में विशेष तौर पर गुर्जर समाज के भोलूपुरा, नयावास, पतरामपुर ,खंडेपुरा ,रत्तीपुरा, विंदापुरा, सहित गुर्जर समाज के 8 गांवों के हर घर में मेले के अवसर पर पकवान बनाकर बाबा के दरबार में प्रसादी के रूप में चढ़ाने के साथ बहन बेटियों एवं रिश्तेदारों को बुलाने की मान्यता सदियों से चल रही है, जो आज भी कायम है। गुर्जर समाज के पंच पटेल एवं लोगों द्वारा मेले में आने वाले आसपास ग्रामीण क्षेत्रों के श्रद्धालुओं के लिए भोजन पानी एवं प्रसादी की व्यवस्थाएं रहती हैं। वही कारिश देव के दरबार में भादो की पंचमी को लगने वाले भव्य मेले में आसपास सहित दूरदराज ग्रामीण क्षेत्रों के लोग भी दर्शन के लिए आते हैं। मेला आयोजन पर गुर्जर समाज के रिश्तेदार एवं आसपास ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले दर्शनार्थी एवं अन्य लोग यहां आयोजित होने वाली ऊंची कूद, नाल कुश्ती जैसी प्रतियोगिताओं का आनंद लेते हैं। इन प्रतियोगिताओं का आयोजन आम बस्ती की ओर से किया जाता है।
परंपरा : कलश यात्रा से मेले का शुभारंभ किया
यहां की एक अनोखी परंपरा यह रही है कि मेला शुभारंभ से पूर्व गुर्जर समाज के लोगों की ओर से कलश यात्रा निकाल कर मेले का शुभारंभ किया आता है। बुधवार को भी महिलाओं ने 51 कलश धारण कर गांव के शिव मंदिर से कलश यात्रा कर शुरू की और देव बाबा के जयकारों के साथ मंदिर प्रांगण मेला स्थल पहुंची।

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