ब्लड डोनेट कर बचाई जान:ब्लड डोनेट कर अध्यापक ने बचाई अभिभावक की जान

हिन्डौन14 दिन पहले
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  • ब्लड इंफेक्शन से खून की कमी से जिंदगी और मौत के बीच जूझ रहा था युवक

कुड़गांव ग्राम पंचायत बीजलपुर के गांव माढई विद्यालय में नन्ही छात्रा अभिभावक के साथ जो लंबे समय से डायबिटीज व अन्य बीमारी के कारण हीमोग्लोबिन की कमी से जिंदगी और मौत के बीच जूझ रहा था । जिसकी अध्यापक ने ब्लड डोनेट कर जान बचाई और एक नन्ही छात्रा के सिर से उजड़ते पिता के सहारे को भी जीवनदान मिला है। बीजलपुर ग्राम पंचायत के गांव माढई के राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय के प्रधानाध्यापक धर्मराज मीणा ने बताया कि विद्यालय की कक्षा आठ में राजू लाल बेसवा की छात्रा बिंदिया बैरवा अध्ययनरत है। वह विद्यालय में अधिकांश समय अनुपस्थित एवं कक्षा में गुमसुम रहती थी। जिसके बारे में अध्यापकों ने कई बार उसकी साथी छात्र-छात्राओं से भी पूछा और अनुपस्थित रहने के बारे में सूचना भेजकर घर तक अवगत करवाया गया लेकिन उसके बावजूद भी वह स्कूल आने में असमर्थ रहती थी। इसको लेकर प्रधानाध्यापक धर्मराज मीणा एवं अन्य स्टाफ के साथ बालिका के घर पहुंचे और देखा तो पिता राजू लाल बैरवा किसी बीमारी से पीड़ित पलंग पर लेटा हुआ था। विद्यालय स्टाफ ने पीड़ित से पूछा तो उसने बताया कि वह छोटी सी उम्र में ही पत्थर एवं कारीगरी के कार्य में लग चुका था। शादी के बाद वह अपने परिवार पालन के लिए दिल्ली, जयपुर, कोटा, करौली, गंगापुर सहित आसपास के गांवों में रहकर कारीगरी का कार्य किया था। पत्थर एवं कारीगरी का कार्य करने से धीरे-धीरे पैरों में ब्लड इन्फेक्शन एवं डायबिटीज शुगर बीपी हाई की बीमारी हो गई थी ।

कारीगरी का कार्य करने से धीरे धीरे पैरों में ब्लड इन्फेक्शन शुगर एवं बीपी जैसी अन्य बीमारियों से पीड़ित राजू लाल बैरवा ने सर्वप्रथम सवाई माधोपुर अपना इलाज करवाया लेकिन ठीक नहीं होने पर इसके बाद डेढ़ वर्ष तक लगातार एस, एम, एस, अस्पताल में भर्ती रहकर उपचार करवाया जहां उसे बीपी शुगर एवं पैरों में ब्लड इंफेक्शन घोषित किया गया था। लेकिन परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण संपूर्ण इलाज कराने में असमर्थ रहा । जिससे उसके दोनों पैर खराब हो चुके हैं एक तरफ परिवार पालन का बोझ दूसरी तरफ चलने फिरने में असमर्थ होने के कारण परिवार पालन के लिए अपने घर पर छोटी सी दुकान खोलकर परिवार का पालन पोषण कर रहा है। जिसके एक बच्चा व एक बच्ची है।

उसने बताया कि वह बीपीएल परिवार से है। पैरों में ब्लड इंफेक्शन शुगर एवं अन्य बीमारी से हालत गंभीर होने एवं ब्लड की कमी के कारण शरीर पर सूजन आ गई जिससे वह कई माह से पलंग पर लेटा जिंदगी और मौत से जूझ रहा है। इस पर अध्यापकों ने उसे ब्लड देने का हौसला जुटाया और पीड़ित के परिजनों ने करौली अस्पताल ले जाने की बात कही। जिस पर पत्नी करौली सरकारी अस्पताल लेकर पहुंची, जहां विद्यालय के अध्यापक बने सिंह सैनी पीड़ित के लिए फरिश्ता बनकर पहुंचे और अस्पताल में जाकर उन्होंने ब्लड डोनेट कर पीड़ित की जिंदगी बचाई।

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