गुर्जर समाज में रोष:गुर्जर महिलाओं की लूगड़ी पर कर्नल बैंसला का नाम, समाजजन बोले, लुभाने के लिए यह प्रयास ठीक नहीं है

करौलीएक महीने पहले
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  • 2007 में आंदोलन के वक्त रेल की पटरी के नाम से लुभाया था

गुर्जर समाज मे कर्नल किरोड़ी बैंसला के नाम से लूगड़ी आने से समाज में रोष है। गुर्जर समाज के लोगों ने बताया की गुर्जर एक जाति ही नहीं एक संस्कृति के नाम से भी जानी जाती है। व्यापारी वर्ग महिलाओं को आकर्षित करने के लिए बाजार में कपड़े जारी कर देते है। 2007 में रेल रोको गुर्जर आरक्षण आंदोलन हुआ तो रेल की पटरी के नाम से गुर्जर महिलाओं को लुभाने के लिए कपड़े दुकानों पर मिलने लगे। कुछ दिनों बाद गुर्जर आरक्षण के नाम पर कपड़े देखने को मिले।

सोशल मीडिया का युवाओं में क्रेज बढ़ा तो फेसबुक और व्हाट्सएप के नाम से बाजार में गुर्जर महिलाओं के लिए लुगड़ा जारी किया गया। रेल की पटरी, गुर्जर आरक्षण व सोशल मीडिया के नाम पर गुर्जर महिलाओं ने लुगड़ा खरीदने की होड़ लग गई। हिण्डौन सिटी व महू कस्बे के बाजार में कपड़े की दुकानों पर गुर्जर महिलाओं को इस तरह के लुगड़ा खरीदते देखा गया। पिछले दो तीन दिन से सोशल मीडिया पर कर्नल बैंसला के नाम के नाम पर जारी किया गया लुगड़ा जबरदस्त वायरल हुआ है। इस लुगड़ी का अधिकतर युवा विरोध भी कर रहे है तो कई युवा पसन्द भी कर रहे है। गुर्जर समाज के जन नायक का महिलाओं के पहनावे से अंकित करने से समाज के युवाओं में रोष है।

तीन से पांच हजार तक का पहनावा एक महिला का
गुर्जर महिलाओं के सम्पूर्ण पहनावे की बाजार में कीमत करीब 3 से 5 हजार के आस-पास होती है। व्यापारी वर्ग भी गुर्जर महिलाओं के लिए आए दिन तरह-तरह के नाम से कपड़े जारी करते है, उनमें भी इन कपड़ों को बेचने का एक अलग उत्साह नजर आता है।

बैंसला के नाम के लुगड़ी को नहीं बेचने का निवेदन
सुमरण पीलवाड़ का कहना है की गुर्जर समाज के सामाजिक लीडर रहे कर्नल किरोड़ी बैंसला के नाम से लुगड़ाओं पर अंकित कर बाजारों में बेचा जा रहा है। लिखकर समाज विशेष की महिलाओं को टारगेट किया गया है। इसे समाज के युवा सहन नहीं करेंगे।
सोशल मीडिया के माध्यम से जानकारी मिली है कि हमारे समाज की महिलाओं के लिए व्यापारी वर्ग ने गुर्जर समाज को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर पहचान देने वाले युग पुरुष स्व. कर्नल किरोड़ी सिंह बैंसला के नाम से बाजार में लुगड़ा जारी किया है। हम सभी युवा वर्ग इस लुगड़ी का विरोध करते है साथ ही व्यापारी वर्ग से कर्नल बैंसला के नाम के लुगड़ी को नहीं बेचने का निवेदन करते है। कर्नल बैंसला का नाम कपड़ों के बजाए शिक्षा के मंदिरों में आना चाहिए। व्यापारी वर्ग को अगर कर्नल बैंसला को सम्मान देना है तो स्कूल, कॉलेज व लाइब्रेरी की स्थापना करवाएं।
-सुरेन्द्र खटाना कैमरी (सामाजिक कार्यकर्ता)

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