फसलों के लिए हानिकारक:मिट्टी परीक्षण कर किसान फसलों में यूरिया का करें उपयोग, ज्यादा उपयोग करना फसलों के लिए घातक

करौली2 महीने पहले
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कुड़गांव। मंडावरा में गेहूं फसल की पहली सिंचाई के साथ खेत में यूरिया देता किसान। - Dainik Bhaskar
कुड़गांव। मंडावरा में गेहूं फसल की पहली सिंचाई के साथ खेत में यूरिया देता किसान।
  • कृषि विशेषज्ञों की सलाह बोवनी के बाद सरसों में 30 से 45 एवं गेहूं में 21 दिन बाद करें फसल सिंचाई शुरू

कुड़गांव इन दिनों रबी की फसल सरसों, गेहूं, चना कि ज्यादा से ज्यादा अच्छी पैदावार है, भरा चमकदार दाना पाने के लिए किसानों में बढ़ रही यूरिया के उपयोग की प्रतिस्पर्धा को देखते हुए कृषि अधिकारियों ने किसानों को तय मानक दंड के हिसाब से यूरिया उपयोग की सलाह दी है। इससे भविष्य में उनको संकट का सामना नहीं करना पड़ेगा। कृषि अधिकारी एवं पर्यवेक्षकों ने किसानों को यूरिया का उपयोग मिट्टी परीक्षण रिपोर्ट के अनुसार फसलों में उपयोग करने के बारे में बताया है। अधिकांश किसानों की यह धारणा बनी रहती है कि सिंचाई के समय ज्यादा यूरिया के उपयोग से गेहूं की पैदावार अच्छी मिलती है। जबकि कृषि अधिकारियों का मत है खेत में जितनी नाइट्रोजन जरूरत हो, उसी के अनुसार यूरिया का उपयोग किया जाए।

अधिक उपयोग से जमीन में अमलीयता बढ़ती है

कृषि निदेशक रामलाल जाट सहायक उप निदेशक अनिल कुमार शर्मा करौली द्वारा गत दिवस कुड़गांव में किसानों को यूरिया वितरण के दौरान बताया कि फसलों में यूरिया का ज्यादा उपयोग किसानों को भविष्य में समस्या बन सकता है। इससे जमीन की अमलीयता बढ़ने से समस्या आ सकती है। फसल की पैदावार भी प्रभावित हो सकती है। वर्तमान में कई किसान एक-एक हेक्टेयर भूमि की फसल में 5 बोरी यूरिया का उपयोग सिंचाई के दौरान करते देखे जा रहे हैं।

प्रति हेक्टर में 5-6 कटटे देने से आती है किल्लत

कृषि अधिकारी के अनुसार ज्यादा यूरिया डालने से फसलों में नुकसान के साथ पैदावार प्रभावित होंगी वही किसानों को खेतों में रासायनिक खाद का मिट्टी परीक्षण और कृषि विशेषज्ञों की सलाह के अनुसार नहीं देना चाहिए। अक्सर देखा जाता है किसान प्रति हेक्टर में 5-6 बोरी से ज्यादा यूरिया सिंचाई के समय दे रहे हैं। जो रासायनिक खाद का उपयोग सुखद के साथ दुखद भी पैदा कर सकता है।

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