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गर्मी में खिला रहे सर्दी की डाइट:अफसरों ने 21.5 लाख बच्चों को गर्मी में बंटवाई गुड़-मूंगफली की चिक्की

करौलीएक महीने पहले
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योगेश शर्मा | भरतपुर/करौली सरकारी सिस्टम बिना सोचे-समझे बजट को कैसे ठिकाने लगाता है। यह खबर उसका ज्वलंत उदाहरण है। शिक्षा विभाग के अफसर इस भीषण गर्मी में धौलपुर-करौली समेत 12 जिलों के 21.5 लाख कुपोषित बच्चों को हाई प्रोटीन के नाम पर गुड़ और मूंगफली से बनी चिक्की खिला रहे हैं। वह भी थोड़ी बहुत नहीं बल्कि 1 से 1.5 किलो तक। जबकि एक्सपर्ट का कहना है कि यह चीज सर्दियों में खिलाई जानी चाहिए थी। इस समय गर्मी में खिलाने से तो बच्चों की तबीयत ही खराब होगी। क्योंकि कुपोषित बच्चों का पाचन तंत्र पहले ही काफी कमजोर होता है।

दरअसल, नेशनल फैमिली हैल्थ सर्वे में राज्य के 7 जिलों में 75% और 5 पिछड़े जिलों में अधिकांश बच्चे कुपोषित पाए गए थे। इनका कुपोषण दूर करने के लिए केन्द्रीय शिक्षा मंत्रालय ने दिसंबर, 2021 में इन्हें कोई भी पोषण खाद्य-पदार्थ खिलाने का आदेश दिया। इस पर राज्य के शिक्षा विभाग ने कुपोषित बच्चों को चिक्की खिलाने का निर्णय किया। इनमें कक्षा 1 से 5वीं के विद्यार्थियों को 1 किलो और 6ठी से 8वीं के बच्चों को 1.5 किलो चिक्की देना तय हुआ। यह मात्रा 40 दिन के हिसाब से तय की गई थी। लेकिन, शिक्षा विभाग ने खरीद का आदेश देने में ही 3 महीने लगा दिए। मिड-डे-मील आयुक्त ने राजस्थान राज्य सहकारी उपभोक्ता संघ (कॉनफेड) को 29 मार्च को चिक्की खरीद कर स्कूलों में सप्लाई करने का आदेश दिया। जबकि 12 मार्च से ही तेज गर्मी शुरू हो चुकी थी।

अप्रैल के दूसरे पखवाड़े में जब गर्मी पीक पर आई तो स्कूलों में चिक्की सप्लाई शुरू हुई। चूंकि यह सप्लाई 55 दिन यानि 17 मई तक सप्लाई होनी थी। लेकिन, तेज गर्मी की वजह से 11 मई को ही छुट्टियां हो गईं। हालांकि तब तक करीब 98% स्कूलों में चिक्की वितरण हो गया था। लेकिन, छुट्टियां होने के कारण बाकी बचे 2% स्कूलों ने चिक्की की सप्लाई लेने से इनकार कर दिया। इसलिए मिड डे मील आयुक्तालय ने 18 मई को फिर जिला शिक्षा अधिकारियों को चिक्की की सप्लाई लेने और बच्चो में वितरित करवाने का आदेश जारी कर दिया।

एक्सपर्ट व्यू : इससे बच्चों को उल्टी-दस्त हो सकते हैं : डाइटीशियन
^कुपोषित बच्चों का पाचनतंत्र पूरी विकसित नहीं होता। गुड और मूंगफली दोनों पचाने में भारी होते हैं। मेटाबॉलिज्म में ज्यादा गर्मी पैदा होगी। ऐसे में उन्हें उल्टी-दस्त हो सकती है। इस तापमान पर तो अंकुरित अनाज या छाछ-राबड़ी जैसे खाद्य-पदार्थ देने चाहिए।
-डॉ स्वाति व्यास, एसोसिएट प्रोफेसर(फूड एंड न्यूट्रिशियन), आईआईएस यूनिवर्सिटी, जयपुर

राज्य में 12 मार्च से ही शुरू हो गई थीं गर्मियां, अप्रैल और मई में आया पीक : मौसम विभाग
^प्रदेश में गर्मी का दौर 12 मार्च से ही शुरू हो चुका है। अप्रेल और मई में गर्मी पीक पर रही है। इस अवधि में बारिश और आंधी अपेक्षाकृत कम चलने के कारण लू-ताप के दौर ज्यादा लंबे चले हैं। इस दौरान तापमान भी कई बार पीक पर यानि 47-48 डिग्री तक पहुंचा है। रात के तापमान में भी काफी बढ़ोत्तरी देखने को मिली। हालांकि बीच में आंधी-बारिश की वजह से तापमान कम-ज्यादा भी हुआ।-राधेश्याम शर्मा, निदेशक, मौसम केन्द्र, जयपुर

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