चिंता:तालाबों में पानी कम, इस बार सिंघाड़े पर संकट

करौली15 दिन पहले
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मासलपुर। कोलुआ तालाब में सिंघाड़े। घटते जलस्तर से किसान चिंतित। - Dainik Bhaskar
मासलपुर। कोलुआ तालाब में सिंघाड़े। घटते जलस्तर से किसान चिंतित।
  • मासलपुर के तालाबों में इस बार कम जलभराव, आने लगे सिंघाड़े, घटते जलस्तर से किसानों को उत्पादन घटने की आशंका

मासलपुर के तालाबों में कम जलभराव होने पर ही आषाढ़ मास में सिंघाड़े की फसल बुवाई का कार्य कर दिया लेकिन अच्छी बरसात नहीं होने से तालाबों में पर्याप्त जलभराव नहीं हुआ है। फसल में सिंघाड़े का फल आने लग गया है। तालाबों में लगातार घटते जलस्तर से किसानों को चिंता सताने लगी है। सिंघाड़ा उत्पादक किसान हंसराम कश्यप और राधेश्याम कश्यप ने बताया कि कोलुआ तालाब में पांच से सात किसानों द्वारा सिंघाड़े की फसल लगाई है। एक लाख लगाने के बाद िंघाड़े का फल आने लग गया है।

पहली बरसात होने पर ही कर देते हैं सिंघाड़े की बुवाई

सिंघाड़ा उत्पादक किसानों ने बताया कि तालाबों में कम जल स्तर होने पर ही बुवाई का कार्य सरलता से किया जा सकता है। इसलिए मानसून की पहली बरसात होने के बाद ही सिंघाड़ा फसल की बुवाई का कार्य कर दिया जाता है। अच्छे मानसून की उम्मीद को लेकर उनके द्वारा सिंघाड़े की फसल का की बुवाई का कार्य किया जाता है। लेकिन इस बार कमजोर मानसून के चलते तालाबों में पर्याप्त जलभराव नहीं हो पाया है। ऐसे में सिंघाड़े की फसल से लागत निकलने की संभावना भी नहीं लगती है। किसान ने बताया कि फसल में सिंघाड़ा का फल आने लग गया है, लेकिन तालाबों में लगातार जल स्तर घटता चला जा रहा है। अच्छी बरसात आने पर ही सिंघाड़े की फसल बच सकती है अन्यथा सिंघाड़े की फसल बर्बाद हो जाएगी। ऐसे में बीज की लागत निकालना मुश्किल हो जाएगा। कोलुआ तालाब के अलावा महुआ का तालाब, ढावरे बाबा के पास स्थित तालाब, पूंछ री तालाब सहित कई ऐसे तालाब है जिनमें सिंघाड़े की बुवाई करने के बाद बरसात नहीं होने से पर्याप्त जलभराव नहीं हो पाया है।

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