गंगा सप्तमी:आज गंगा सप्तमी,भगवान शिव की‎ जटाओं से अवतरित हुई थी मां गंगा‎

करौली14 दिन पहले
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  • भगवान शिव का जलाभिषेक करने के साथ दान-पुण्य का है महत्व‎

हिंदू धर्म में गंगा सप्तमी काफी महत्वपूर्ण मानी गई है। गंगा सप्तमी हर साल वैशाख माह के शुक्ल पक्ष में सप्तमी तिथि को मनाई जाती है। गंगा सप्तमी को मां गंगा के जन्मदिन के रूप में मनाया जाता है। पौराणिक मान्यता है कि इसी दिन देवी गंगा ने पृथ्वी पर पुनर्जन्म लिया था।
हिंदू धर्म में हर साल वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि को मनाई जाने वाली गंगा सप्तमी का बहुत ही खास महत्व है। राज्याचार्य पंडित प्रकाश चंद जती ने बताया कि हिंदू पंचांग के अनुसार,वैशाख माह शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि के दिन गंगा स्वर्ग लोक से भगवान शिव शंकर की जटाओं में पहुंची थीं,इसलिए इस दिन को गंगा जयंती और गंगा सप्तमी के रूप में मनाया जाता है। मान्यता है कि इस दिन मां गंगा की पूजा- अर्चना करने से समस्त पापों से मुक्ति मिलती है। इसके अलावा गंगा सप्तमी पर गंगा जी में स्नान का बहुत अधिक महत्व होता है।
भगवान शिव की जटाओं से अवतरित हुई मां गंगा उन्होंने बताया कि धार्मिक पुराणों के अनुसार राजा भगीरथी के अथक प्रयासों से ही मां गंगा भगवान शिव की जटाओं से होती हुई पृथ्वी पर अवतरित हुईं थीं।
गंगा सप्तमी हर साल वैशाख माह के शुक्ल पक्ष में सप्तमी तिथि को मनाई जाती है। इस साल गंगा सप्तमी 8 मई रविवार को मनाई जावेगी। उन्होंने बताया कि जन्म से लेकर मृत्यु तक हर शुभ काम में गंगा जल का उपयोग किया जाता है। मां गंगा को मोक्ष प्रदान करने वाली माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन मां गंगा की पूजा-अर्चना की जाए तो अशुभ ग्रहों के प्रभाव से भी छुटकारा मिलता है।
दान-पुण्य का महत्व
कहा जाता है कि गंगा सप्तमी के दिन सुबह सूर्योदय से पहले उठकर गंगा नदी में स्नान करना बहुत ही शुभ होता है और भक्तों के पाप कर्मों का नाश होता है। यदि गंगा नदी में स्नान करना संभव नहीं हो तो नहाने के पानी में थोड़ा सा गंगा जल मिला कर स्नान किया जा सकता है। ये भी मान्यता है कि इस दिन माता गंगा के पवित्र जल के छींटे मारने भर से सारे पापों का अंत हो जाता है। गंगा सप्तमी के दिन दान-पुण्य का विशेष महत्व बताया गया है।
राज्याचार्य पंडित प्रकाश चंद जती ने बताया कि गंगा सप्तमी के दिन चांदी या स्टील के कलश में गंगाजल लें। इस कलश में पांच बेलपत्र डाल कर इस जल से ओम नमः शिवाय मंत्र का जाप करते हुए भगवान शिव का अभिषेक करें। मान्यता के अनुसार ये उपाय करने से सौभाग्य की प्राप्ति होती है। गंगा सप्तमी के पावन पर्व पर रोगी को गंगा स्नान कराया जाए तो उसके रोगों का क्षय होता है और उसे मां गंगा स्वस्थ होने का वरदान देती हैं। गंगा सप्तमी के दिन स्नान करके मां गंगा को श्रीफल अर्पित करना चाहिए। इससे व्यक्ति को कभी धन की कमी नहीं होती है।

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