वार्डन का ऐसा पर्यावरण प्रेम...,:छात्रावास में खुद के खर्च पर लगा दिए दो हजार फलदार व छायादार पौधे, इनमें कदंब, हरसिंगार भी

करौली7 दिन पहले
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  • रानौली के राजकीय एकलव्य आवासीय स्कूल में चारों तरफ हरियाली, सात साल की मेहनत से बनी यह तस्वीर

श्रीमहावीरजी ग्रामीण मन में कुछ कर गुजरने का जज्बा हो तो हर मंजिल आसान हो जाती है। इन पंक्तियों को रानौली के राजकीय एकलव्य आवासीय स्कूल के वार्डन राजाराम मीना ने सच साबित कर दिखाया। टोडभीम निवासी राजाराम ने पेड़-पौधों से लगाव को देखते हुए 7 साल पूर्व स्कूल परिसर को हराभरा करने की ठानी। स्कूल परिसर में आज विभिन्न प्रजातियों के 2 हजार से अधिक छायादार व फलदार पेड़ हरियाली बिखेर रहे हैं। 7 साल से लगातार लगाए जा रहे पौधे अब पेड़ बनते जा रहे हैं। पौधे लगाने का काम स्वयं के खर्चे पर करते हैं।

अंजीर, वट, चांदनी, सरस, मेहंदी, आम, नींबू भी हैं

स्कूल परिसर में कदम के 70, अमरूद के 52, करंज के 500, नींबू के 15, आम के 6, सरस के 20, मेहंदी के 300, हरसिंगार के 100, चांदनी के 20, वटवृक्ष के 8, अंजीर के 20, गुलाब के 40 सहित 2 हजार से अधिक पौधे हैं। पर्यावरण प्रेम को जानते हुए उन्हें सम्मानित करते हुए कलेक्टर को भी सम्मानित करने के लिए पत्र भेजा जाएगा।

35 बीघा में बना हुआ है छात्रावास, वार्डन इनकी देखरेख भी करते हैं

वार्डन राजाराम मीना का कहना रहा कि सुरक्षित स्वच्छ और अधिक सुखी भविष्य का आनंद लेने के लिए लोगों को अपने आसपास के माहौल को सुरक्षित और स्वच्छ बनाने के लिए जागरुक होना चाहिए। यदि हम अभी से जागृत नही हुए तो आने वाले कुछ सालों में साफ हवा से सांस लेने के लिए सिर्फ पहाड़ और जंगल में ही बचे रह जाएंगे। प्रदूषण लगातार हमारी सांसें कम कर रहा है। नवजात शिशुओं पर इसका असर भी दिख रहा है। ऐसे मौकों पर हम सभी को पौधरोपण कर देखभाल करने का प्रण लेना चाहिए, जो आने वाली पीढ़ियों को साफ-सुथरी हवा देने में मददगार हो सके रानोली गांव का एकलव्य आवासीय विद्यालय 35 बीघा पक्की जमीन में बना हुआ है। विद्यालय 7 वर्ष पूर्व शुरु हुआ। वार्डन राजाराम मीना ने बताया कि आवासीय विद्यालय के खेल मैदान को छोड़कर सम्पूर्ण जमीन में पौधे लगे हुए हैं। मीणा ने बताया उन्होंने ये सभी पेड़ निजी खर्च से प्रतिवर्ष नर्सरी से लाकर लगाना शुरु किया। प्रतिवर्ष 10- 12,-हजार रुपए का खर्चा आ जाता है। 7 वर्ष में करीब 80 हजार रुपए पौधे लगाने में खर्च कर हो गए। विद्यालय के खेल मैदान की बाउंड्री के चारों अोर जमीन में 2 हजार से अधिक फलदार, छायादार व औषधीय पौधे लगे हुए हैं। शुरुआती दौर में पीपल, बरगद, पाखड़ व नीम के सौ पौधे लगाए। जिनकी लंबाई अब 25 से 30 फीट तक हो गई है। इसके अलावा कॉलेज परिसर में मौसमी फल, फूल समेत विभिन्न प्रजातियों के 2 हजार पौधे रोपित किए गए। उनकी मेहनत और लगन से इस समय पूरा स्कूल परिसर हरियाली से लहलहा रहा है। सप्ताह में एक दिन पर्यावरण संरक्षण का कार्यक्रम चलता है। अवकाश व कोरोना संक्रमण काल में भी प्रतिदिन सुबह-शाम स्वयं पौधों की देखभाल करना नहीं छोड़ा। वार्डन के इस कार्य में प्रधानाचार्य सहित अन्य स्टॉफ भी सहयोग करता है।

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