समय के साथ परंपरा खत्म:बदलते समय के साथ रियासतकालीन सांझी की भी परंपरा खत्म हो रही है

करौली12 दिन पहले
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करौली। श्री राधा- मदनमोहन जी मंदिर परिसर में सजी सांझी की झांकी। - Dainik Bhaskar
करौली। श्री राधा- मदनमोहन जी मंदिर परिसर में सजी सांझी की झांकी।
  • करौली के श्री राधा-मदनमोहन जी महाराज मंदिर में सजती है सांझी की झांकी

बदलते समय के साथ -साथ रियासतकालीन सांझी की भी परंपरा खत्म होती जा रही है। आधुनिकता ने नई पीढ़ी को लोक कलाओं से दूर कर दिया है। इन लोक कलाओं में से एक सांझी भी है। जिसे पहले घरों में भाद्रपद पूर्णिमा से अमावस्या तक श्राद्ध पक्ष के दौरान पूरे 16 दिनों तक स्थान दिया जाता था और शाम को पूजा -अर्चना की जाती थी। लेकिन अब सांझी के गीत सुनाई नहीं देते हैं। लेकिन शहर के आराध्यदेव श्री राधा - मदनमोहन जी महाराज मंदिर परिसर में यह परंपरा आज भी कायम है।

जहां श्राद्ध पक्ष के दौरान एक पखवाड़े तक भगवान श्री कृष्ण की विभिन्न लीला स्थलों का चित्रण सांझी के रूप में किया जाता है। श्री राधा-मदनमोहन जी महाराज मंदिर ट्रस्ट प्रबंधक मलखान पाल व सहायक प्रबंधक भूपेन्द्र पाल ने बताया कि ब्रज संस्कृति से ओतप्रोत करौली में रियासत काल से ही सांझी की परंपरा चली आ रही है। लेकिन तीन दशक पहले श्राद्ध पक्ष के दौरान शहर के कई घरों में सांझी बनाने की परंपरा रही है। घरों के बाहर चबूतरों व घरों की दीवारों पर सांझी को बालिकाएं गोबर से बनाती थी और बड़ी सांझी बनाने के लिए किसी जगह पर दिनभर तैयारियां चलती थी। घरों में तीसरे पहर से बालिकाएं सांझी की तैयारियां में जुट जाती थी और शाम को सांझी की पूजा - अर्चना करने के साथ सांझी के गीत गाती। सांझी सजाने के लिए गुलाल,कोयले, चावल आदि को पीसकर अलग-अलग रंग बनाए जाते और कपड़े में छानकर सांझी में भरे जाते थे। ट्रस्ट प्रबंधक ने बताया कि रियासतकालीन सांझी की परंपरा शहर के आराध्यदेव श्री राधा - मदनमोहन जी महाराज मंदिर में देखने को मिलती है। सांझी में ब्रज चौरासी कोस में आने वाले भगवान श्री कृष्ण के स्थलों को चुटकी के सहारे रंगों से आकार देकर सजाया जाता है। जिन्हें देखने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु आते हैं। सांझी ब्रजमंडल में भगवान श्री कृष्ण की लीला स्थलों से जुड़ी है। सांझी में प्रतिदिन भगवान श्री कृष्ण से जुड़ी अलग - अलग प्रकार की झांकी बनाई जाती हैं और सांझी का समापन पित्र पक्ष की अमावस्या के दिन कोट बनाया जाता है, जिसमें श्री राधा - कृष्ण की युगल झांकी सजाई जाती है। उन्होंने बताया कि श्री राधा-मदनमोहन जी महाराज मंदिर की सांझी में ब्रज मंडल 84 कोस की परिक्रमा में आने वाले भगवान श्री कृष्ण की लीला स्थलों को दर्शाया जाता है। सांझी में श्राद्ध पक्ष तक प्रतिदिन पूर्णिमा-कमल, प्रतिपदा-मधुवन, तालवन, कुमोदवन, बहुलावन, शांतनु कुंड, राधा कुंड, कुसुम सरोवर, गोवर्धन,रामवन,बरसाना ,नंदगाव, कोकिला वन, शेषशायी कोड़ानाथ, वृन्दावन, मथुरा, गोकुल, दाऊजी आरै समापन के दिन कोट बनाया जाता है। इसमें श्री राधा-कृष्ण की युगल झांकी होती है।

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