नवरात्र आज से:देश में सिर्फ सोरसन में होती है ब्रह्माणी माता की पीठ की पूजा

अंता15 दिन पहले
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  • सिंदूर और कनेर के पत्तों से होता है पीठ का शृंगार, करीब 700 वर्ष पहले माता की प्रतिमा का प्राकट्य होने की मान्यता

कस्बे से करीब 20 किमी दूर सोरसन गांव में ब्रह्मणी माता का प्राचीन मंदिर है। जहां ब्रह्मणी माता प्रतिमा की पीठ की पूजा होती है। देश का यह पहला मंदिर है, जहां माता की पीठ का पूजन किया जाता है। यहां ब्रह्मणी माता का प्राकट्य करीब 700 वर्ष पहले माना जाता है। तब से ही सोरसन श्रीगौड़ ब्राह्मण के खोखरजी के वंशज ही मंदिर में पूजा करते हैं। परंपराओं में एक गुजराती परिवार के सदस्यों को सप्तशती का पाठ करने, मीणों के राव भारहठ परिवार के सदस्यों को नगाड़े बजाने का अधिकार मिला हुआ है।

चारों ओर से परकोटे से घिरा मंदिर, गुफा मंदिर भी नामयह मंदिर चारों ओर से परकोटे से घिरा हुआ है। इसे गुफा मंदिर भी कहा जाता है। मंदिर के तीन प्रवेश द्वारों में से दो द्वार कलात्मक हैं। मुख्य प्रवेश द्वार पूर्वाभिमुख है। परिसर के बीच में गुंबद, द्वार, मंडप और शिखरयुक्त गर्भगृह है। गर्भगृह के प्रवेश द्वार की चौखट 5 गुणा 7 के आकार की है, लेकिन प्रवेश मार्ग तीन गुणा ढ़ाई फीट का ही है। इसमें झुककर ही प्रवेश किया जा सकता है। पुजारी भी झुककर पूजा करते हैं।

500 साल से प्रज्वलित अखंड ज्योति इस मंदिर में करीब पांच सौ सालों से अखंड ज्योति प्रज्वलित है। यहां दो ज्योति चलती है, लेकिन इसको एक ही माना जाता है। जब कभी अखंड ज्योति से बत्ती को निकालकर नई बत्ती लगाई जाती है तो इस दौरान अखंड ज्योति खंडित ना हो, इसको लेकर एक अन्य ज्योति भी इसके साथ ही चलती रहती है।नियमित लगता है दाल-बाटी का भोगब्रह्माणी माता के मंिदर में प्रतिदिन दाल-बाटी का भोग लगाया जाता है। जिसे भी सिर्फ मंदिर के पुजारी ही बनाते हैं। नंदवाना बोहरा परिवार की यह आराध्य देवी है।

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