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  • 326 Crore Liters Of Water Stopped In Four Closures In Shergarh Sanctuary, 1140 Hectares Of Grassland Developed, The Gates Of Tourism Will Open

रंग ला रहे प्रयास:शेरगढ़ अभयारण्य में चार क्लोजर में 326 करोड़ लीटर पानी रुका 1140 हैक्टेयर में घास का मैदान विकसित, खुलेंगे पर्यटन के द्वार

बारां4 दिन पहले
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बारां. शेरगढ़ अभयारण्य में पानी के संग्रहण को लेकर कार्य कराए गए हैं। - Dainik Bhaskar
बारां. शेरगढ़ अभयारण्य में पानी के संग्रहण को लेकर कार्य कराए गए हैं।
  • 70 लाख की लागत से बनाए हैं चार क्लोजर, जंगल में स्कूली बच्चों को ट्रैिकंग करवाने की योजना तािक शुरू हो सके पर्यटन

सकतपुर सकतपुर के समीपवर्ती शेरगढ़ अभयारण्य में वन विभाग के प्रयास रंग लाने लगे हैं। इस साल जैव विविधता (बायोडाइवर्सिंटी) क्लोजर बनाए हैं। जिसमें 1140 हैक्टेयर में घास के मैदान विकसित हुए हैं और 326 करोड़ लीटर पानी रुका है। इससे शेरगढ़ में शाकाहारी वन्यजीवों के बढ़ने से खाद्य श्रृंखला से जुड़े सभी जीव बढ़ने से जैव विविधता की समृद्धि बढ़ेगी। जल्द ही यहां स्कूली बच्चों को ट्रेकिंग कराई जाएगी। जिससे यहां पर पर्यटन प्रांरभ हो सकेगा। चार क्लोजरों के निर्माण पर 70 लाख रुपए खर्च किए गए हैं।वन विभाग वाइल्ड लाइफ कोटा एसीएफ अनुराग भटनागर ने बताया कि शेरगढ़ अभयारण्य को प्रदेश के पर्यटन मानचित्र पर लाने के लिए वन विभाग भरसक प्रयास कर रहा है। जल्दी ही इस क्षेत्र में स्कूल के बच्चों को जागरुकता शिविर के माध्यम से जंगल में ट्रेकिंग कराई जाएगी। उन्हें वन एवं वन्यजीवों के बारे में जागरूक किया जाएगा।

इस साल ही बनाया है शेरगढ़ में प्रवेश द्वार एसीएफ भटनागर ने बताया कि शेरगढ़ अभयारण में पैंथर, भेड़िया, चीतल, चिंकारा, काले हिरण, नील गाय, सिवेट, नेवला, जरख, सियार, अजगर, कोबरा, करैत सर्प आदि वन्य प्राणी हैं। साथ ही कई प्रकार के पक्षियों का भी यहां बसेरा है। पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए इस साल ही मुख्यद्वार का निर्माण कराया है। जिस पर पैंथर, मगरमच्छ, गोडावण, सारस, क्रेन, वुल्फ, चिंकारा एवं ब्लैक बक के लाइफ साइज एक्जीबिटस लगाए गए हैं।

उपजाऊ मिट्‌टी को रोकेगी घास घास पानी को एक स्पंज की तरह सोख लेती है। पानी रोकने के साथ-साथ यह क्षेत्र की मिट्टी को भी बहने से रोकती हैै। एक इंच मिट्टी बनने में सैंकड़ों वर्ष लग जाते हैं। यदि घास एवं पेड़ न तो हो तो यह शीर्ष की सबसे उपजाऊ मिट्‌टी पानी के साथ बहकर नदी में और वहां से समुद्र तक पहुंच जाती है।

जलसंरक्षण से चारे की पैदावार, जरूरत होगी पूरीइस साल शेरगढ़ अभयारण्य में तीन एनिकट कंवरजी का बड, भभूखा नाला एवं आचोली एनिकट बनाए हैं। जिसमें भी लाखों-करोड़ों लीटर जल संचित किया गया एवं मृदा संरक्षण भी किया गया। इसी के साथ तलाई निर्माण कार्य भोला तलाई, गेबियन निर्माण कार्य कराए जाकर मृदा व जल संरक्षण किया है। इससे अभयारण्य में स्थित जंगल हरे-भरे होंगे। वही जमीन में वर्षा जल के पुनर्भरण से क्षेत्र के कुएं, बावड़ी आदि में भी सालभर पानी का संचय बना रहेगा। इससे क्षेत्र के ग्रामीणों को भी लाभ मिलेगा।

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