राहत की खबर:काेटा से आया 850 टन यूरिया, आज 500 टन डीएपी भी आएगा, किसानों को मिलेगी राहत

बारां2 महीने पहले
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  • जिले में इस साल सरसों व गेहंू की बुवाई का रकबा बढ़ा, इसलिए खाद की डिमांड ज्यादा रहीं

जिले में रबी फसलों की बुवाई के चलते किसानों को खाद की किल्लत का सामना करना पड़ रहा है। मंगलवार को जिले को 850 टन यूरिया मिला है, जिससे किसानों को कुछ हद तक राहत मिलने की संभावना है। जिले में खाद के लिए किसानों को घंटो लाइन में लगने के बाद भी पर्याप्त रूप से खाद नहीं मिल पा रहा है। जिससे रबी फसलो की बुवाई का कार्य भी प्रभावित हो रहा है। किसान खाद लेने के लिए खाद की दुकानों के चक्कर लगा रहे हैं।

किसानों का कहना है कि डीएपी और यूरिया खाद नहीं मिलने से रबी की फसल बुवाई नहीं हो पा रही है। जिले में इस साल सरसों और गेंहू की बुवाई का रकबा बढ़ा है, जिससे भी खाद की डिमांड ज्यादा हो रही है।रबी फसलों की बुवाई के बीच जिले में मंगलवार को 850 टन यूरिया कोटा से मिला है। यह यूरिया बुधवार तक खाद की दुकानो पर पंहुच जाएगा, जिससे किसानों को भी राहत मिलेगी। इसके अलावा जिले को प्रतिदिन गढ़ेपान स्थित चंबल फर्टिलाइजर्स से भी प्रतिदिन 500 से 600 टन यूरिया भी मिल रहा है। जिसे भी खाद की दुकानों पर पंहुचाया जा रहा है। वहीं बुधवार को जिले को 500 टन डीएपी भी मिलेगा। यह बुधवार शाम तक खाद की दुकानों पर पंहुच जाएगा। जिससे डीएपी को लेकर भी किसानों को भी राहत मिलेगी। जिले में रबी सीजन के दौरान 18 हजार 500 मिट्रिक टन डीएपी की डिमांड थी। इसके मुकाबले अबतक 16 हजार 996 मिट्रिक टन डीएपी जिले को मिल चुका है।

10 दिसंबर को आएगी 3 हजार टन यूरिया की रैक जिले में यूरिया की डिमांड के बीच राहत की खबर है। कृषि अधिकारीयों के अनुसार जिले को 10 दिसंबर को 3 हजार 50 टन यूरिया की एक रैक बारां आएगी। इससे बहुत हद तक यूरिया की डिमांड पूरी हो जाएगी व किसानों को भी राहत मिलेगी। इस रैक से आने वाली यूरिया को क्रय-विक्रय समिति में पहुंचाया जाएगा। जिले में रबी सीजन में 65 हजार मिट्रिक टन की डिमांड थी। इसके मुकाबले मंगलवार तक 50 हजार मैट्रिक टन यूरिया जिले को मिल चुका है।

अब आगामी समय में भी यूरिया की उपलब्धता को लेकर प्रयास किए जा रहे है।लक्ष्य से ज्यादा रकबा बढ़ने से खाद की डिमांड भी बढ़ीइस बार कृषि विभाग की ओर से विभिन्न फसलों की बुवाई को लेकर लक्ष्य लिया गया था। कृषि अधिकारियों के अनुसार जिले में इस बार विभाग की ओर से सरसों का 1 लाख 20 हजार हैक्टेयर क्षेत्र में सरसों की बुवाई का लक्ष्य रखा था। इसके मुकाबले जिले में अब तक 1 लाख 43 हजार हैक्टेयर से अधिक क्षेत्र में सरसों की बुवाई हाे चुकी है। इसके अलावा गेहूं की बुवाई का कार्य चल रहा है। इसकी वजह से भी जिले में खाद की डिमांड बढ़ी है। चने में कम खाद की आवश्यकता होती है, लेकिन सरसों-गेहूं में खाद की ज्यादा जरूरत होने से डिमांड भी बढ़ी है।

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