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मोतीपुरा थर्मल प्लांट हादसा:छह दिन बाद मलबे से मिला श्रमिक का शव, ग्रामीणों ने लेने से कर दिया इंकार

बारां14 दिन पहले
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छबड़ा. मोतीपुरा स्थित थर्मल पावर प्लांट की ईएसपी गिरने से दबे श्रमिक का शव लेकर जाती रेस्क्यू टीम।   फोटो: नितेश यादव - Dainik Bhaskar
छबड़ा. मोतीपुरा स्थित थर्मल पावर प्लांट की ईएसपी गिरने से दबे श्रमिक का शव लेकर जाती रेस्क्यू टीम। फोटो: नितेश यादव
  • थर्मल की चौथी इकाई में ईएसपी गिरने से दबे श्रमिक की चल रही थी तलाश, तीन को पहले ही किया था रेस्क्यू
  • ग्रामीण बोले..मृतक के आश्रितों को दें मुआवजा, दोषी ठेकेदार व अधिकारियों पर करें कार्रवाई

मोतीपुरा सुपर थर्मल पावर प्लांट की चौथी इकाई की ईएसपी पिछले बुधवार को गिर गई थी। इसमें दबे एक श्रमिक की तलाश के लिए रेस्क्यू चलाया जा रहा था। मंगलवार शाम को रेस्क्यू टीम ने श्रमिक का शव बरामद किया है, जिसे पोस्टमार्टम के लिए छबड़ा अस्पताल लाए। ग्रामीणों ने मामले में दोषी अधिकारियों, ठेकेदारों, कंपनी पर कार्रवाई की मांग और मृतक आश्रित को मुआवजा व सरकारी नौकरी की मांग को लेकर शव लेने से इंकार कर दिया।पिछले बुधवार को मोतीपुरा थर्मल पावर प्लांट की इकाई संख्या 4 की ईएसपी गिरने से इसमें 4 श्रमिक दब गए थे। इनमें से 3 को निकाल लिया गया था तथा एक श्रमिक दिनेश मेहता मलबे में दब गया।

जिनका एनडीआरएफ और एसडीआरएफ टीमों ने एसडीएम मनीषा तिवारी व डीएसपी ओंमेंद्र सिंह शेखावत की निगरानी में रेस्क्यू किया। श्रमिक का सुराग नहीं लगने पर सोमवार को डॉग स्क्वायड भी थर्मल पहुंची। डॉग की निशानदेही पर ईएसपी में रेस्क्यू चलाया। मंगलवार शाम को श्रमिक का शव बरामद किया गया। रेस्क्यू ऑपरेशन में एसडीआरएफ प्रभारी मोरपाल, दीपक, अमृतलाल, महेंद्र, मनीष कुमार, शैतान सिंह, रोहिताश्व, दारा सिंह, प्रकाशचंद शामिल थे। एसडीएम मनीषा तिवारी और डीएसपी ओमेंद्र सिंह शेखावत मौजूद रहे। शव को मोतीपुरा थर्मल से छबड़ा लाते समय ग्रामीणों ने रास्ते में एंबुलेंस व अन्य वाहनों को रोक लिया। ग्रामीण मामले में दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई व मृतक आश्रितों को मुआवजे की मांग कर रहे थे। अधिकारियों की समझाइश के बाद छबड़ा अस्पताल शव पहुंचाया। यहां परिजनों व ग्रामीणों ने शव लेने से इंकार कर दिया।

परिजनों व ग्रामीणाें ने यह रखी मांगे

मृतक के परिवारजनों को एक करोड़ रुपए मुआवजा राशि दी जाए।{ मृतक छोटे भाई को मोतीपुरा थर्मल में स्थाई सरकारी नौकरी दी जाए। घटना के दोषी अधिकारियों व ठेकेदारों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करते हुए तुंरत गिरफ्तार किया जाए।{ अन्य घायलों का निशुल्क उपचार करवाया जाए। उन्हें 20-20 लाख रुपए आर्थिक सहायता दी जाए।{ घायलों को स्थाई नौकरी दी जाए।{ सोलेट मटेरियल कंपनी के खिलाफ भी मुकदमा दर्ज कर कार्रवाई की जाए।

दो महीने बाद होना था दिनेश का विवाह, छिन गया परिवार का इकलौता सहारा श्रमिक दिनेश मेहता के छोटे भाई चरणसिंह ने बताया कि उसके परिवार में माता, पिता व एक बहन है। बहन की शादी हो चुकी है। दिनेश मेहता की 2 माह पूर्व मध्यप्रदेश के गुना जिले के बरखेड़ा में सगाई हुई है एवं 2 माह बाद दिनेश की शादी थी। चरण सिंह ने बताया कि उनके पास सिर्फ एक बीघा के लगभग जमीन है। भाई दिनेश ही घर का खर्चा चलाता था। थर्मल में ईएसपी गिरने की घटना के बाद से रेस्क्यू स्थल पर उसके परिजन खड़े रहे और दिनेश के सुरक्षित निकलने की उम्मीद लगाए हुए थे।

मंगलवार शाम को उसका शव बरामद होने से परिजन फूट-फूटकर रोने लगे।परिजनों का आराेप.. होपर में ओवरलोड राख होने के बावजूद कराया कामश्रमिक के परिजनों ने प्लांट प्रशासन पर लगाए गंभीर आरोप मलबे में दबे श्रमिक दिनेश मेहता के परिजनों ने प्लांट प्रशासन पर आरोप लगाते हुए कहा कि थर्मल प्रशासन की ओर से धीमी गति से रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया। परिजनों ने आरोप लगाए की थर्मल प्रशासन की ओर से होपर में ओवरलोड राख भरी होने के बाद भी श्रमिकों से कार्य कराया जा रहा था। शिकायत करने पर नौकरी छोड़ देने के लिए कहा जाता था।

दिनेश मेहता के साथी श्रमिकों ने बताया कि जिस रात्रि को हादसा हुआ उस रात्रि को जिन अधिकारियों की ड्यूटी थी। वह अधिकारी वहां मौजूद नहीं थे।^अभी श्रमिक का शव मिला है, उसको पोस्टमार्टम के लिए छबड़ा अस्पताल लाया गया है। परिजनों की ओर से अभी कुछ मांगे प्राप्त हुई हैं। इस संबंध में उच्चाधिकारियों काे अवगत करा दिया है। मामले में नियमानुसार कार्रवाई होगी, वो की जाएगी।- मनीषा तिवारी, एसडीएम, छबड़ा

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