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पर्व:अक्षय तृतीया 14 मई को, इस बार अबूझ मुहूर्त पर बन रहे गजकेसरी व लक्ष्मीनारायण योग, दान करने से मिलेगा पुण्य

बारांएक महीने पहले
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  • तृतीया तिथि की शुरुआत शुक्रवार को सूर्योदय से शुरू होगी, इसी दिन रोहिणी नक्षत्र का योग भी होना शुभ रहेगा

अक्षय तृतीया इस बार 14 मई को है। इस दिन परशुराम जयंती भी मनाई जाती है। ये पर्व लक्ष्मीनारायण और गजकेसरी योग में मनाए जाएंगे। इस साल तृतीया तिथि की शुरुआत शुक्रवार को सूर्योदय से शुरू हो जाएगी और इसी दिन रोहिणी नक्षत्र का योग भी तृतीया तिथि में होना विशेष शुभ रहेगा। इसी दिन सतयुग एवं त्रेतायुग का आरंभ माना जाता है। इस दिन किया गया जप, तप, ज्ञान, स्नान, दान आदि अक्षय रहते हैं। इसी कारण इसे अक्षय तृतीया कहा जाता है।

ज्योतिषियों ने इसे अबूझ मुहूर्त की भी संज्ञा दी है। इस दिन भगवान परशुराम का जन्म हुआ था। ऐसे में इसे परशुराम तीज भी कहते हैं। भगवान नर और नारायण ने भी इसी दिन अवतार लिया था।कोरोना संक्रमण काल होने की वजह से इस साल श्रद्धालु गंगास्नान के लिए नहीं जा पाएंगे। ऐसे में वह गंगाजल मिलाकर स्नान करेंगे तो पुण्य की प्राप्ति होगी। इसी तरह से दान करने के लिए उसका संकल्प लें और हालात ठीक होने पर धर्म स्थान पर दान कर दें।

पितरों की तृप्ति का पर्व माना है अक्षय तृतीया इसी दिन श्री बद्रीनारायण जी के पट खुलते हैं। ज्योतिषयो के अनुसार अक्षय तृतीया पर तिल सहित कुशों के जल से पितरों को जलदान करने से उनकी अनंत काल तक तृप्ति होती है। इस तिथि से ही गौरी व्रत की शुरुआत होती है। इसे करने से अखंड सौभाग्य और समृद्धि मिलती है। अक्षय तृतीया पर गंगास्नान का भी बड़ा महत्व है। इस दिन गंगा स्नान करने या घर पर ही पानी में गंगाजल मिलाकर नहाने से हर तरह के पाप खत्म हो जाते हैं।

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