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  • Corona Period: Less Demand For Milk, Curd, Buttermilk, Ice Cream In The Market, Saras Milk Is Reaching 50% In The Market Of Baran, 60 Lakhs Of The Societies. Stuck

भास्कर पड़ताल:कोरोना काल : बाजार में दूध, दही, छाछ, आइसक्रीम की मांग कम, बारां के बाजार में 50% ही पहुंच रहा सरस का दूध, समितियों के 60 लाख रु. अटके

बारांएक महीने पहले
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  • दूध समितियों से 35 फीसदी कलेक्शन हुआ कम, ऐसे हालात में पशुपालकों और किसानों की कैसे बढ़ सकेगी आय
  • कम भाव भी वजह... खुले बाजार में फैट की कीमत 7 रुपए और डेयरी पर सिर्फ साढ़े 5 रुपए

कोरोना संक्रमण के चलते डेयरी उद्योग पर भी काफी असर पड़ा है। दूध उत्पादों की डिमांड कम होने से झालावाड़ डेयरी पर आर्थिक परेशानी बनी हुई है। करीब 6 माह से जिले की दूध उत्पादक समितियों का करीब 60 लाख रुपए का भुगतान अटका हुआ है। ऐसे में झालावाड़ डेयरी से जुड़ी जिले की रजिस्टर्ड कई दूध उत्पादक समितियां ठप हो गई हैं।ऐसे में इनसे जुड़े पशुपालकों व दूध उत्पादक समितियों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। साथ ही इसका प्रभाव जिले के दूध उत्पादन व सप्लाई पर भी हो रहा है। इधर, उत्पादक समितियों की ओर से बकाया भुगतान शीघ्र नहीं होने पर आंदोलन की चेतावनी दी गई है। बारां-झालावाड़ डेयरी प्रबंधन के अनुसार जिले की 98 दूध उत्पादक समितियां रजिस्टर्ड थीं, लेकिन वर्तमान में सिर्फ 13 ही दूध उत्पादक समितियां संचालित हो रही हैं।

सप्लाई घटी...10 हजार लीटर से 5 हजार लीटर प्रतिदिन रह गईमुख्य प्रबंधक राकेश शर्मा ने बताया कि जिले में सामान्य दिनों में रजिस्टर्ड विभिन्न समितियों से हर दिन 12 हजार लीटर दूध एकत्रित किया जाता था, जो वर्तमान में 8 से 9 हजार लीटर प्रतिदिन रह गया है। इसका प्रभाव जिले में डेयरी की ओर से प्रतिदिन होने वाली सप्लाई पर भी हुआ है। झालावाड़ डेयरी की ओर से जिले मेें 10 हजार लीटर प्रतिदिन की सप्लाई होती थी, जो अब डिमांड कम होने से 5 से 6 हजार लीटर प्रतिदिन पर रह गई है। मुख्य प्रबंधक शर्मा का कहना है कि कोरोना काल के दौरान बाजार में दूध, दही, छाछ, आइसक्रीम व अन्य दूध उत्पादों की डिमांड कम चल रही है।

यह पीड़ा है...दूध उत्पादक समिति के संचालकों की

मार्च से ही अटका है 25 लाख का भुगतान, पशुपालकों को कैसे चुकाएंबाज आमली दुग्ध उत्पादक समिति के जगदीश गुर्जर ने बताया कि वे बारां डेयरी से पिछले 20 सालों से जुड़े हुए हैं। रोजाना 900 से 1000 लीटर दूध की सप्लाई झालावाड़-बारां दुग्ध उत्पादक संघ लिमिटेड को देते हैं। उन्होंने बताया कि मार्च के बाद से ही सप्लाई का भुगतान नहीं मिला है, जो करीब 25 लाख रुपए से अधिक का है। उन्हें पशुपालकों व किसानों को भी भुगतान करने में परेशानी आ रही है। किसी से उधार लेेकर भुगतान करने की मजबूरी हो रही है। भुगतान के लिए हर दिन किसानों व पशुपालकों से कहासुनी होती है। सरकार की ओर से दूध का भाव 5.50 रुपए प्रति फैट निर्धारित है। अभी सीएलआर कटौतियां अधिक हो रही हैं। ऐसे में पशुपालकों को 4.80 रुपए प्रति फैट का भाव मिल रहा है। जबकि प्राइवेट सेक्टर व स्थानीय बाजारों में 7 रुपए प्रति फैट का भाव मिल रहा है।

भुगतान में देरी से पशुपालक नहीं कर रहे सप्लाई, समिति हुई ठपशाहाबाद क्षेत्र के सिरसोद दुग्ध उत्पादक समिति के सचिव संजीव कुमार ने बताया कि समिति की ओर से एकत्रित कर रोजाना करीब 700 से 800 लीटर दूध की सप्लाई झालावाड़ डेयरी के लिए की जाती थी, लेकिन अब बकाया भुगतान और कम भाव मिलने से समिति बंद है। अप्रैल में दी गई दूध सप्लाई का करीब चार लाख से अधिक का भुगतान बकाया है। उनका कहना है कि झालावाड़ डेयरी की ओर से 5.50 रुपए प्रति फैट के हिसाब से भुगतान किया जाता है, लेकिन कटौती अधिक होती है। जबकि प्राइवेट डेयरियां आदि 7 रुपए प्रति फैट से भी अधिक का भाव दे रही है। पहले पशुपालकों व किसानों को हर 10 दिन में भुगतान कर जाता था, लेकिन भुगतान में देरी से पशुपालकों ने सप्लाई बंद कर दी है।

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