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  • Due To The Weather, There Was A Loss In Soybeans, Then Farmers Changed Their Attitude To 7 Times More Land, Sowing Maize, Bumper Yield At A Lower Cost.

फसलों की बुवाई का ट्रेंड बदला:मौसम की बेरुखी से सोयाबीन में घाटा हुआ तो किसानों ने बदल दिया रुख7 गुना अधिक रकबे में हुई थी मक्का की बुवाई, कम लागत में बंपर उपज

बारां6 दिन पहले
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  • मक्का बुवाई का रकबा पिछले साल के 350 हेक्टेयर से 7 गुना बढ़ोतरी के साथ 2320 हेक्टेयर तक रहा

मौसम की बेरुखी के कारण परंपरागत फसलों में नुकसान के कारण अब किसान फसलों की बुवाई का ट्रेंड बदल रहे हैं। करीब तीन साल से सोयाबीन और उड़द की फसल में नुकसान के कारण किसानों ने इस साल मक्का की और रुख किया था। कृषि विभाग के अनुसार जिले में पिछले साल के 11 हजार 580 हेक्टेयर से बढ़कर करीब 18 हजार रहा। ऐसे में इस बार मक्का का उत्पादन भी बंपर रहा है। कम लागत में अच्छा उत्पादन और मुनाफा मिलने से किसान उत्साहित हैं।केलवाड़ा क्षेत्र में इस साल किसानों ने परंपरागत सोयाबीन और उड़द को छाेड़ कम लागत व कम पानी वाली फसल मक्का की ओर रुख किया। इसके चलते खरीफ सीजन में मक्का बुवाई का रकबा पिछले साल के साढ़े तीन सौ हेक्टेयर से 7 गुना बढ़ोतरी के साथ 2320 हेक्टेयर तक रहा। किसानों को कम लागत में अच्छा उत्पादन मिलने से किसानों में खुशी की लहर है।कृषि पर्यवेक्षक सूरज प्रकाश मेहता के अनुसार क्षेत्र में कई किसान जो करीब 20 से 25 वर्षों से लगातार सोयाबीन की फसल लगा रहे थे, लेकिन फसल में ज्यादा लागत होने के बावजूद कभी मौसम की मार तो कभी बीमारियों का प्रकोप के अलावा लगातार एक ही फसल की वजह से जमीन में सल्फर, जिंक सहित पोषक तत्वों की कमी के कारण पैदावार कम होने लगी। किसानों को फसल की लागत निकालना भी मुश्किल हो गया था। ऐसे में क्षेत्र के किसानों ने इस साल परंपरागत सोयाबीन को छोड़ मक्का की ओर रुख दिखाया। केलवाड़ा क्षेत्र में गत पिछले साल 350 हेक्टेयर में मक्का की फसल बोई गई थी। इस साल 7 गुना बढ़ोतरी के साथ 2320 हेक्टेयर में बुवाई हुई।

मक्का की अच्छी पैदावार से किसान खुश..परिवार सहित खेतों में जुटे

बंपर उत्पादन मिला तो बढ़ाया रकबाकलोनिया कि किसान दिलीप मेहता ने बताया कि वे हर साल लगभग 50 बीघा में सोयाबीन की फसल करते थे। इसमें सिर्फ एक या दो क्विंटल प्रति बीघा ही निकलती थी। कभी मौसम की बेरुखी से फसल खराबा के कारण नुकसान होता था। उन्होंने पिछले साल 10 बीघा में मक्का की फसल बोई, जिसमें 10 क्विंटल प्रति बीघा के हिसाब से उत्पादन मिला। भाव भी अच्छा मिला। मक्का बुवाई में में सोयाबीन के मुकाबले लागत खर्च भी न के बराबर ही रहा। इस साल किसान दिलीप मेहता ने पिछले साल के मुकाबले 10 गुना अधिक यानी 100 बीघा में मक्का की फसल बुवाई की थी। अच्छी पैदावार से खुश हैं।

सोयाबीन में हुआ घाटा तो मक्का ने दिया संबलमौसम की मार के कारण सोयाबीन की फसल में लगातार दो-तीन साल से घाटा खा रहे ऊनी गांव निवासी कृषक सुनील सेन ने बताया कि सोयाबीन की फसल में नुकसान हुआ। कभी बारिश ज्यादा हो जाती है तो फसल गल गई है तो कभी कम बारिश होने व बीमारियां लगने से एवरेज नहीं निकल सका। ऐसे में पिछले साल से उन्होंने रुख बदलते हुए 30 बीघा में मक्का की बुवाई की। इसमें 175 क्विंटल मक्का की पैदावार हुई और बाजार भाव भी बेहतर मिला। ऐसे में इस साल भी उन्होंने मक्का को ही चुना। सेन ने बताया कि बारिश कम होने से गत वर्ष की अपेक्षा मक्का का एवरेज बढ़ने की संभावना है। इस फसल में सोयाबीन के मुकाबले 25 फीसदी ही खर्चा आता है और बीमारियां लगने का खतरा भी न के बराबर रहता है। हालांकि सीजन की शुरुआत में पिछले साल से थोड़ा कम रहा है।

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