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भास्कर खास:विश्वास हमारे लिए वैक्सीन है, संदेह को वायरस मानिए; सभी को अधर्म से बचाता है पर्यूषण पर्व

बारां6 दिन पहले
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  • सुख के समय अच्छा लगता है, लेकिन कष्ट के समय जीवन अशांत हो जाता है

मुनि सुधा सागर महाराजकोरोनाकाल की तमाम उलझनों में व्यक्ति परेशान है। एेसे में पर्व और धर्म जीवन को शांति देते हैं, मार्गदर्शक बनते हैं। सुख के समय अच्छा लगता है, लेकिन कष्ट व दुख के समय जीवन अशांत हो जाता है। धर्म से साहस बढ़ता है।अधर्म हम पर हावी है। इसे दूर करने के लिए पर्यूषण के 10 धर्म का पालन जरूरी है। इसलिए पर्यूषण पर्व के दौरान 10 दिन धर्मरत रहकर समाज के काम में बड़े और बच्चों को भी जोड़ने के लिए आवश्यक पहल करें। हमारे देश को श्रीराम, सीता, तीर्थंकर भगवान महावीर की जरूरत है। पूर्व की राजनीति में मर्यादा थी। जब भी राजनीति में धर्म आता है, तब इस भूमि पर रामायण बनती। और जब धर्म में राजनीति आई है, तब महाभारत हुआ है। कोरोना महामारी को देखते हुए हमें हौसला और घोंसला नहीं छोड़ना चाहिए। विश्वास ही वैक्सीन है। संदेह ही वायरस है।

ये हैं दशलक्षण के 10 पर्व1. उत्तम क्षमा : क्राेध-बैर छाेड़कर सभी से क्षमा मांगना और क्षमा करना। 2. उत्तम मार्दव : अहंकार काे त्याग कर नम्र होना। 3. उत्तम आर्जव : भाव की शुद्धता। 4. उत्तम सत्य : यथार्थ बोलना। 5. उत्तम शौच : मन में कोई लोभ न रखना। 6. उत्तम संयम : मन, वचन और शरीर को काबू में रखना। 7. उत्तम तप : मलीन वृत्तियों को दूर करने के लिए जो बल चाहिए, उसके लिए तपस्या करना। 8. उत्तम त्याग : पात्र को ज्ञान। 9. उत्तम अकिंचनता : किसी भी चीज में ममता न रखना। 10. उत्तम ब्रह्मचर्य : सद्गुणों का अभ्यास करना।

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