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कल्पसूत्र का महत्व:पर्युषण पर्व में बताया कल्पसूत्र का महत्व

बारां20 दिन पहले
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पर्वाधिराज पर्युषण पर्व की आराधना के दौरान वर्धमान जैन नवयुवक मंडल जावरा के भावेश बोहरा, संजय जैन एवं आदित्य जैन ने चौथे दिन साेमवार को बताया कि समुद्र में डुबकी लगाकर मनचाहे मोती निकाल लेते हैं। उसी प्रकार प्रत्याख्यान नाम के पूर्व रूपीसागर में से उद्धृत करके चौदह पूर्वधर आचार्यदेव श्री भद्रबहुस्वामी ने कल्पसूत्र की रचना की है।उन्होंने कहा कि हिंदुओं में गीता, मुस्लिमों में कुरान, इसाइयों में बाइबिल, बौद्धाें में त्रिपिटक पवित्र ग्रंथ माने जाते हैं, उसी तरह जैन समाज में कल्पसूत्र को पवित्र माना जाता है। विचार का आचरण पर प्रभाव पड़ता है। भ्रष्ट विचार डूबा देता है। श्रीजैन श्वेतांबर समाज मूर्ति पूजक संघ के अध्यक्ष राजेंद्र रंगावत, गौत्तम मारू ने बताया कि मति ज्ञान, श्रुत ज्ञान, केवल ज्ञान की बोली अशोक, गौत्तम, प्रवीण बोरडिया के नाम रही।

अवधि ज्ञान राजेंद्र, कपिल, प्रीति रंगावत एवं मनःपर्य ज्ञान की बोली प्रमोद, यश, उर्मिला पारख के नाम रही। चंद्रप्रभू महिला मंडल अध्यक्ष उर्मिला जैन भाया एवं निर्मला बोरडिया ने बताया कि पर्युषण पर्व के दौरान चंद्रप्रभू मंदिर पर शाम को भक्ति एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। सोमवार को आयाेजित कार्यक्रमों में प्रथम प्रीतम बोरडिया, द्वितीय विवेक बोरडिया तथा तृतीय मयूरी मारू रही। स्नात्र पूजा प्रमोद, यश, उर्मिला पारख की तरफ से हुई।छबड़ा| श्वेतांबर जैन समाज के पर्युषण पर्व में सोमवार को चंद्रप्रभु भगवान की कलश शांतिधारा एवं पूजा-अर्चना की गई। प्रवक्ता चैनसिंह सिंघवी ने बताया कि चंद्रप्रभु भगवान की शांति धारा कलश में पूजा-अर्चना का लाभ योगेंद्र कुमार एवं इला जिंदाणी ने लिया। कल्पसूत्र का वाचन संदीप बरड़िया ने किया। शाम को प्रभावना एवं महा आरती का लाभ नरेंद्र जैन ने लिया। दोपहर को निकाली गई कल्पसूत्र की शोभायात्रा का लाभ महेंद्र कुमार व सुनीता सिंघवी ने लिया। प्रतिक्रमण हिम्मतसिंह सिंघवी ने कराया।

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