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अव्यवस्था - जान का जोखिम:एनेस्थेटिक की कमी से रोज रेफर हो रहे मरीज, प्रसूताओं व शिशु को जान का जोखिम

बारां20 दिन पहले
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बारां. एमसीएच अस्पताल में एनेस्थेटिक चिकित्सक की कमी के चलते सिजेरियन डिलीवरी केस रेफर हो रहे हैं। - Dainik Bhaskar
बारां. एमसीएच अस्पताल में एनेस्थेटिक चिकित्सक की कमी के चलते सिजेरियन डिलीवरी केस रेफर हो रहे हैं।
  • जिला अस्पताल में रोज 20 से 35 प्रसूताएं डिलीवरी के लिए होती हैं भर्ती, 3-4 केस हर दिन रेफर
  • दूरदराज व ग्रामीण क्षेत्रों से पहुंचने वाली प्रसूताओं को उठानी पड़ रही परेशानी

सरकार की ओर से एक तरफ जननी सुरक्षा के दावे किए जा रहे हैं, लेकिन दूसरी तरफ अस्पतालों में चिकित्सा इंतजाम दुरुस्त नहीं किए जा रहे हैं। इसके चलते प्रसूताओं व नवजातों की जान पर बन आती है। जिले के सबसे बड़े मातृ एवं शिशु अस्पताल (एमसीएच) महज एकमात्र एनेस्थेटिक के भरोसे संचालित हो रहा है।जिला अस्पताल के एमसीएच विंग से हर दिन बड़ी संख्या में डिलीवरी केस रैफर करने पड़ रहे हैं। इमरजेंसी में एनेस्थेटिक की अनुपलब्धता बताते हुए हर दिन तीन से चार सीजेरियन केस रेफर किए जा रहे हैं। दूरदराज व ग्रामीण क्षेत्रों से पहुंुचने वाली प्रसूताओं को परेशानी झेलनी पड़ रही है। लंबा समय बीतने के बावजूद यहां एनेस्थेटिक नहीं मिलने से सुधार नहीं हो पा रहा है। कई बार आक्रोशित परिजनों व स्टाफ के बीच बहस होती है। समस्या को लेकर स्थानीय जनप्रतिनिधि भी ध्यान नहीं दे रहे हैं।

यह समस्या...4 पदों के मुकाबले एक ही ऐनेस्थेटिक, कम हो रहे सीजेरियन प्रसव गौरतलब है कि जिला मुख्यालय पर स्थित एमसीएच अस्पताल एनेस्थेटिक में जिलेभर से हर दिन 20 से 35 प्रसूताएं डिलीवरी के लिए पहुंचती है। सीएचसी व पीएचसी से रेफर होकर यहां पहुंची महिलाओं को यहां भी सुरक्षित प्रसव के नाम पर इंतजाम नाकाफी साबित हो रहे हैं। यहां चार पदाें के मुकाबले महज एक ही एनेस्थेटिक डाॅक्टर पदस्थ है। ऐसे में यहां महज 2 से 3 ही सीजेरियन डिलेवरी हो पा रही है। कई सीजेरियन व अन्य इमरजेंसी स्थिति होने पर प्रसूताओं को डिलीवरी के लिए रेफर किया जा रहा है। कई बार समय पर ऑपरेशन नहीं होने से प्रसूताओं व गर्भस्थ शिशु की जान पर बन आती है। परिजन आनन फानन में निजी अस्पताल व कोटा लेकर जाना पड़ रहा है।

बिगड़ी व्यवस्था...जुलाई में 10 और सितंबर में अब तक 8 केस हो चुके रेफर जिला अस्पताल प्रबंधन के अनुसार एमसीएच विंग के लैबर रूम में जुलाई में 820 से ज्यादा डिलीवरी केस आए। इसके मुकाबले सिर्फ 615 डिलीवरी हुई हैं। अगस्त में 894 एडमिशन के मुकाबले महज 549 डिलीवरी हुई। एनेस्थेटिक नहीं होने से जुलाई में 10 केस व सितंबर में अब तक 8 केस रेफर हुए हैं। अस्पताल में सुबह की ही पारी में ही सीजेरियन डिलीवरी हो रही है। इसके बाद अधिकांश केस रेफर किए जा रहे हैं। एनेस्थिटिक की अनुपलब्धता के अलावा रिकाॅर्ड में अन्य कारण बताकर भी केस रेफर किए जा रहे हैं। कुछ माह पहले तक अस्पताल में एक एनेस्थेटिक व दूसरा प्रतिनियुक्ति पर लगा था। दोनों के तबादले के बाद व्यवस्था गड़बड़ा गई है।

दूरदराज से रेफर होकर जिला अस्पताल आते हैं, यहां से भी कर रहे रेफरसूत्रों का कहना है कि प्रसव के लिए दूरदराज गावों से गर्भवतियों को पीएचसी व सीएचसी से जिला अस्पताल रेफर कर दिया जाता है। लेकिन यहां इमरजेंसी के दौरान भी एनेस्थेटिक चिकित्सक के उपलब्ध नहीं होने के कारण सीजेरियन डिलेवरी नहीं हो पाती हैं।

सिर्फ एक ही पारी में महज दो से तीन सीजेरियन हो पा रहे हैं। ऐसे में अधिकांश सीजेरियन डिलीवरी के केस रेफर हो रहे हैं। दर्द से तड़पती प्रसूताओं व तीमारदारों को काफी परेशानी झेलनी पड़ रही है।^एनेस्थेटिक डॉक्टर की कमी के कारण परेशानी बनी हुई है। प्रसूताओं व शिशु को किसी तरह का जोखिम न हों, इसके लिए उन्हें समय पर हायर सेंटर के लिए रैफर किया जाता है। एनेस्थेटिक चिकित्सक लगाने के लिए सीएमएचओं व जिला कलेक्टर को अवगत पत्र लिखकर अवगत करवाया हैं।- रामबुदेश मीना, पीएमओ, जिला अस्पताल

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