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व्याख्याता के पद:स्कूलों में स्वीकृत ही नहीं अनिवार्य विषयों के व्याख्याता के पद

बारां12 दिन पहले
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राज्य सरकार ने अप्रैल 2015 में स्टाफिंग पैटर्न लागू करके स्कूलों में नामांकन अनुसार पदों का निर्धारण करके प्रति दो वर्ष बाद स्टाफिंग पैटर्न की समीक्षा करते हुए नामांकन में कमी या वृद्धि होने पर स्वीकृत पदों में कमी वृद्धि करने का आदेश पारित किया था, लेकिन छह वर्ष में एक बार भी स्टाफिंग पैटर्न की समीक्षा नहीं की गई है।राजस्थान वरिष्ठ शिक्षक संघ रेस्टा के जिलाध्यक्ष लोकेश शाक्यवाल ने बताया कि राज्य सरकार एक तरफ तो अंग्रेजी माध्यम के स्कूलों को बढ़ावा दे रही है, वहीं दूसरी ओर हिंदी माध्यम के स्कूलों में अंग्रेजी विषय के व्याख्याता के पद तक स्वीकृत नहीं हैं।

उन्होंने बताया कि स्टाफिंग पैटर्न के अनुसार उच्च माध्यमिक स्कूलों में क्रमोन्नति के समय व्याख्याताओं के केवल तीन ऐच्छिक विषयों के पद ही स्वीकृत किए जाएंगे। क्रमोन्नति के दो वर्ष बाद कक्षा 11 व 12 का नामांकन 80 या उससे अधिक होने पर ही अनिवार्य हिंदी व अंग्रेजी विषयों के व्याख्याता पद स्वीकृत किए जाएंगे।

वर्तमान में प्रदेश के करीब चार हजार स्कूलों में कक्षा 11 व 12 का नामांकन 80 से अधिक होने के बावजूद अनिवार्य विषयों के व्यख्याताओं के पद स्वीकृत नहीं है। जिले के उच्च माध्यमिक स्कूल बडगांव, रातड़िया, भूलोन, छबड़ा गुगोर, कोटरापार, हरनावदाशाहजी, बंजारी, टांचा, राई, घट्टी, शाहाबाद, समरानियां, केलवाड़ा, देवरी, मुंडियर, राजपुर, महोदरा तथा कस्बानोनेरा में कक्षा 12 में नामांकन 80 से ऊपर है। रेस्टा के प्रदेशाध्यक्ष भैरुराम चौधरी ने कहा कि स्टाफिंग पैटर्न में संशोधन करते हुए प्रदेश के सभी उच्च माध्यमिक स्कूलों में अनिवार्य अंग्रेजी व हिंदी के व्याख्याताओं के पद सृजित करें।

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