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यह है राजस्थान के पूर्व का द्वार...:मामती की पहाड़ियों के बीच पुरातन किला सौंदर्य को कर देता है दोगुना

बारांएक महीने पहले
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  • पर्यटन बढ़ने से क्षेत्र में आएगी खुशहाली
  • पर्यटकों की आवाजाही बढ़ाने के लिए लगातार हो रहा काम

जिला मुख्यालय से 80 किमी दूर स्थित शाहाबाद प्रकृति, पुरातत्व और सांस्कृतिक विविधता का केंद्र है। मामती पहाड़ियों के बीच 1400 ई. में बने किले और शाहाबाद का सौंदर्य बारिश के बाद दोगुना हो जाता है। ईस्ट वेस्ट कॉरिडोर के तहत नेशनल हाइवे-27 फोरलेन बनने के बाद से राजस्थान के पूर्व का द्वार बन गया है। अब यहां के पुरातात्विक स्थलों की सार-संभाल होने लगी है। कस्बे से करीब दो किमी दूरी पर स्थित किले तक बने प्राचीन मार्ग की सफाई और देखरेख हो तो पर्यटकों की आवाजाही बढ़ेगी।

1400 ई. में बना है किला नवलवान तोप है आकर्षक

इतिहासविद डॉ. मधुकांत दुबे ने बताया कि शाहबाद किले का निर्माण 1400 ईस्वी में हुआ। 1838 ईस्वी में झाला जालिम सिंह ने इसकी मरम्मत करवाई थी। इसके बुर्ज पर लगी नवलवान तोप आकर्षक है। भवन, बाला किला के साथ दोनों तरफ प्राकृतिक खोह भी बनी हैं।नेशनल हाइवे-27 फोरलेन बनने से उत्तरप्रदेश के झांसी, मध्यप्रदेश के ओरछा, खजुराहो, शिवपुरी, माधव नेशनल पार्क, ओरछा, ग्वालियर, आगरा के लिए सीधा सपंर्क बन गया है। यह कोटा, बूंदी, उदयपुर, झालावाड़ सहित रणथंभौर के लिए भी पहुंच आसान हो गई है। पर्यटक प्राकृतिक सौंदर्य, पुरातात्विक स्थल और सांस्कृतिक विविधता देखने के लिए ठहर जाते हैं। पुरातत्व विभाग के अधीक्षक उमरावसिंह ने बताया कि शाहाबाद किला सहित प्राकृतिक सौंदर्य और सांस्कृतिक विविधता विशेष है। आगामी समय में यहां पर पर्यटन के लिए अपार संभावनाएं हैं।

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