नुकसान:खराबे का असर...मंडी में पिछले साल से 3.5 लाख क्विंटल जिंस कम पहुंची

बारां2 महीने पहले
  • कॉपी लिंक
  • पिछले साल अक्टूबर में 4 लाख क्विं. के मुकाबले अभी 50 हजार क्विं. ही जिंस आई

जिले में पिछले दिनों हुई अतिवृष्टि से फसलों को भारी नुकसान हुआ है। इसका असर कृषि उपजमंडी में दिखाई दे रहा है। मंडी में सीजन शुरू होने के कारण हर साल के मुकाबले आवक महज नाममात्र ही रह गई है। सितंबर में जहां हर दिन जिसों की बंपर आवक से मंडी ठसाठस रहती थी, उसके मुकाबले आवक नहीं हो रही है। ऐसे में मंडी में खास राैनक भी नहीं दिख रही है।कृषि विभाग के अनुसार जिले में इस साल करीब 2 लाख 30 हजार हेक्टेयर में सोयाबीन, 40 हजार हेक्टेयर मे उड़द, 22 हजार हेक्टेयर में मक्का, 24 हजार हेक्टेयर में धान की बुवाई हुई थी।

मानसूनी सीजन में औसत 780 एममए के मुकाबले 1201 एमएम बारिश हुई। अगस्त की शुरुआत में करीब 10 दिन में हुई अतिवृष्टि से खेतों में पानी भर गया, जिससे फसलें नष्ट हो गई। अब किसानों को बची हुई फसलों से ही उम्मीद बनी हुई है। इस साल फसलों में उत्पादन भी कम रहा है। किसानों को सोयाबीन में महज 5 से 8 क्विंटल प्रति हेक्टेयर, उड़द 3 से 4 क्विंटल प्रति हेक्टेयर का उत्पादन मिल रहा है। अक्टूबर तक बारिश जारी रहने से फसलों की कटाई भी देरी से शुरू हुई। अभी जिंसों में नमी होने से मंडी में कई जिंसों की बंपर आवक नहीं शुरू नहीं हुई है।

खेतों में पानी भरने से फसलों में नमी, सूखने के बाद जिंस लेकर पहुंचेंगे किसान मंडी सचिव मनोज कुमार मीना ने बताया कि इस साल अतिवृष्टि से जिले में फसलों का नुकसान हुआ है। कई जगह खेतों मे पानी भरने से फसलें नष्ट हो गई, तो कई जगह फसलों की क्वालिटी खराब हो गई। बारिश भी देर तक जारी रहने से फसलों की कटाई देरी से हुई। अभी जिंस में नमी होने के कारण किसान मंडी नहीं पहंच रहे हैं। फसलों में नुकसान के कारण उत्पादन भी काफी कम रहने की आशंका है। ऐसे में इस बार मंडी में उड़द, सोयाबीन, मक्का आदि की आवक काफी कम हो रही है। मंडी में वैसे तो 15 सितंबर के बाद से सोयाबीन, उड़द, मक्का, धान की आवक शुरू हो जाती है। अक्टूबर में कृषि जिंसों की बंपर आवक होने लगती है। जिंस सूखने के बाद किसान मंडी में माल बेचने पहुंचने लगेेंगे।

खबरें और भी हैं...