नेशनल डॉक्टर्स डे पर विशेष / ये हैं धरती के भगवान...कोरोनाकाल में मानवता को सबसे ऊपर रख सेवा में जुटे

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  • अस्पतालों में सेवाएं दे रहे डॉक्टर्स, ताकि अाप और हम रहें सुरक्षित

दैनिक भास्कर

Jul 01, 2020, 08:14 AM IST

बारां. कोरोना संक्रमण के समय डॉक्टर कोरोना से लड़ने के लिए फ्रंटलाइन योद्धा बने हुए हैं। मानवता को सबसे ऊपर रखकर पीड़ितों की सेवा में जुटे हैं। लोगों को दो गज की दूरी, फेस मास्क लगाकर रखने, साबुन से हाथ धोने और सेनेटाइजर को लेकर लोगों को जागरूक कर रहे हैं।

कोरोना के बीच इलाज को लेकर डॉक्टरों की चुनौतियां भी बढ़ी हैं। इन सबके बावजूद जिम्मेदारी को सबसे ऊपर रखकर फ्रंटलाइन योद्धा की भूमिका में अहम किरदार अदा कर रहे हैं। काेरोना वायरस संक्रमण का खतरा, गर्मी, उमस का मौसम के बीच मानव सेवा कर रहे हैं। 

बीमार लोगों के उपचार की निभा रहे जिम्मेदारी : डॉ. हंसराज
जिला अस्पताल में फिजिशियन डॉ. हंसराज सुमन ने बताया कि कोरोना वायरस संक्रमण से बचाव में दूरी ही अहम है। इसलिए मास्क पहनकर रहें। साबुन से बार-बार हाथ धोएं। उन्होंने बताया कि जिले में फिलहाल स्थिति ठीक है। इसको हल्के में नहीं लें। सावधानी बनाए रखें, अनावश्यक रूप से घर से बाहर नहीं जाएं। जहां भी जाएं, तय गाइड लाइन की पालना का ध्यान रखें। वर्तमान में कोरोना संक्रमण से बचाव ही सबसे बेहतर है। बीमार लोगों के उपचार की जिम्मेदारी बखूबी निभा रहे  हैं। ऐसे में परिवार में भी पूरी सावधानी रखकर पहुंच रहे हैं।

कोरोना संक्रमण में बचाव ही सबसे बेहतर : डॉ. नागर
जिला अस्पताल के सर्जन डॉ. देवीशंकर नागर ने बताया कि कोरोना वायरस संक्रमण में बचाव ही सबसे बेहतर है। दो गज की दूरी और मास्क लगाएं। डरें नहीं, पर एहतियात बरतकर रहें। उन्होंने बताया कि अस्पताल में पीड़ितों की सेवा करने में लगे हुए हैं। अस्पताल में कोरोना जांच के बाद ही मरीजों के ऑपरेशन किए जा रहे हैं। घर से निकलने के वक्त सावधानी बरतें। कोरोना के समय घर पर भी सावधानी बरत रहे हैं।

भविष्य की चिंता व डर से डिप्रेशन, पॉजिटिव रखें सोच : डॉ. अनुराग
जिला अस्पताल में न्यूरो साइकेट्रिस्ट डॉ. अनुराग खींची ने बताया कि कोरोना वायरस संक्रमण में लोगों में बीमारी के प्रति डर बढ़ा है। रोजगार छीनने, व्यापार में आर्थिक नुकसान, दिनचर्या बदलने का कई लोगों पर गहरा प्रभाव पड़ा है। कई लोगों को परिवार में सामंजस्य बढ़ाने में दिक्कत का सामना करना पड़ा है।

बच्चों व स्वयं के भविष्य की चिंता आदि से लोग डिप्रेशन, टेंशन की चपेट में आ रहे हैं। आम दिनों के मुकाबले मरीजों की संख्या दोगुनी से ज्यादा हो गई है। बचाव के लिए पॉजिटिव सोच बनाए रखें। हिम्मत रखें और विश्वास बनाए रखें। दो गज की दूरी, सावधानियां, मास्क जरूर पहनकर रखें। उन्होंने बताया कि शुरुआती लॉकडाउन में 45 दिन कोटा अपने परिवार से नहीं मिल पाया। लोगों की सेवा कर अच्छा लगा।

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