गुड न्यूज / बारिश का पानी रोकने के लिए तलाइयां खुदवाई, खेतों में कराई मेड़बंदी नतीजा-डार्क जोन में आई बंजर भूमि

बारां के कुंजेड़ गांव में ग्रामीणाें के श्रमदान से बना तालाब। बारां के कुंजेड़ गांव में ग्रामीणाें के श्रमदान से बना तालाब।
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बारां के कुंजेड़ गांव में ग्रामीणाें के श्रमदान से बना तालाब।बारां के कुंजेड़ गांव में ग्रामीणाें के श्रमदान से बना तालाब।

  • जिले का कुंजेड़ गांव 4 साल पहले डार्क जोन में था, ग्रामीणों को पानी के लिए करना पड़ रहा था संघर्ष

दैनिक भास्कर

Jun 30, 2020, 07:35 AM IST

बारां. अगर आदमी ठान ले, ताे कुछ भी असंभव नहीं है। इस बात काे हकीकत में बदला है बारां के कुंजेड़ गांव के पूर्व सरपंच प्रशांत पाटनी जैन ने। 5 हजार की आबादी वाला कुंजेड़ गांव 4 साल पहले तक डार्क जाेन में था, सारी जमीन बंजर हाे गई थी और ग्रामीणाें काे पीने के पानी का इंतजाम करने के लिए भी काफी संघर्ष करना पड़ता था। ऐसे में तत्कालीन सरपंच प्रशांत ने ये परेशानी दूर करने का बीड़ा उठाया और अपने मिशन में जुट गए।

उन्हाेंने विशेषज्ञाें से बात की ताे सभी ने कहा कि बारिश के पानी को बचाने से ही गांव का संकट दूर हाे पाएगा। बस फिर क्या था, प्रशांत ने गांव के सभी लाेगाें काे यह बात समझाई और पूरा गांव जुट गया। प्रशांत ने गांव की तलाइयां गहरी करवा दी, एनीकट बनवा दिए और बारिश के पानी को रोकने के लिए 500 मीटर लंबे नाले को सही करवाकर गांव का वाटर लेवल सुधार दिया।

आज यह स्थिति है कि गांव का पेयजल संकट खत्म हो गया और यहां 200 बीघा उजाड़ चट्टानी और अतिक्रमण वाली जमीन पर 12 हजार पेड़ का गार्डन विकसित हाे चुका है।

एक आरओ से सालभर में बेकार हाेता है 14 हजार लीटर पानी

  • एक आरओ मशीन से हर साल 14 हजार लीटर पानी नष्ट हो जाता है। इसका इस्तेमाल सिंचाई, टॉयलेट और गाड़ी धोने में किया जा सकता है।
  • स्वीमिंग पूल से हर महीने 3,700 लीटर पानी भाप बनकर उड़ जाता है।
  • बाथ टब में नहाने में जहां 300 से 500 लीटर पानी खर्च होता है, वहीं बाल्टी से नहाने में 100 से 150 लीटर ही पानी खर्च होता है। 
  • दो से चार कपड़े हाथ से धुलें तो 25 से 30 ली. पानी खर्च होता है। वॉशिंग मशीन में 75 ली. पानी लगता है।
  • ब्रश या शेविंग करते समय नल खुला रहे तो 4-5 ली. पानी बह जाता है। नल के सही उपयोग से महीने में 150 लीटर पानी बच सकता है। 
  • शॉवर से नहाने में 75 लीटर तक पानी खर्च होता है। बाल्टी से नहाने पर 80% तक बचाया जा सकता है।  
  • बर्तन धोने में बाल्टी या टब का इस्तेमाल किया जाए तो चार लोगों के परिवार में रोज करीब 20 से 25 लीटर पानी बच जाता है। 

पानी बचने के साथ ही ग्रामीणों को मिला रोजगार
प्रशांत ने बताया 2016 में मुख्यमंत्री जल स्वावलंबन याेजना के तहत पेयजल समस्या दूर करने और बंजर भूमि काे हरा-भरा करने का विचार आया। मैंने संकल्प लिया कि बारिश के बहते पानी को हर साल में रोकना है अाैर सहेजना है। बरसाती पानी के संरक्षण के लिए करीब 200 बीघा जमीन को अतिक्रमण से मुक्त करवाया, इसमें मनरेगा योजना के तहत 10 हजार छायादार, फलदार और फूलदार पौधे लगाए।

इसके बाद 2 हजार पौधे और लगाए। इन पौधों को जीवित रखने के लिए सबसे बड़ी समस्या डार्क जोन में बसे इस गांव में पानी की थी। एक कंपनी ने सीएसआर के तहत यहां करीब 500 मीटर लंबा बरसाती नाले में बारिश के पानी को रोकने के लिए काम शुरू करवाया। मैंने वहां मनरेगा में काम करवाया, इससे ग्रामीणाें काे राेजगार भी मिला। 

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