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  • Visit Anandi Mata In Navratri... 3 Goddess Statues Are Enshrined In A Blissful Form In The Ancient Temple Of Shahabad Fort, Devotees Reach From All Over The Country

पहली बार भास्कर में:नवरात्र में कीजिए आनंदी माता के दर्शन...शाहाबाद किले के प्राचीन मंदिर में आनंदमयी स्वरूप में विराजी हैं 3 देवी प्रतिमाएं, देशभर से पहुंचते हैं श्रद्धालु

बारां2 महीने पहले
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  • जिला मुख्यालय से 80 किमी दूर मामती की पहाड़ी पर स्थित है मंदिर, किला निर्माण के समय ही हुई थी स्थापना

जिला मुख्यालय से 80 किमी दूर स्थित मामती की पहाड़ी पर बने शाहाबाद किले में आनंदी माता का प्राचीन मंदिर है। यहां आनंद की देवी के रूप में सरस्वती, पार्वती और लक्ष्मी की पूजा होती है। मान्यता है कि माता के दर्शनों से कष्ट दूर होते हैं। सुख-समृद्धि और मनोकामना पूरी होती है। यहां देशभर से श्रद्धालु माता के दर्शनों के लिए पहुंचते हैं। किला निर्माण से पहले ही देवी की स्थापना हुई।

शाहाबाद किले के भीतर बने बाला किले के पीछे दक्षिण-पश्चिम छोर पर आनंदी माता मंदिर है। इसमें आनंदी माता सहित त्रिदेवियां विराजमान हैं। क्षेत्र सहित दूरदराज से लोग माता के दर्शनों और पूजन के लिए पहुंचते हैं। बुजुर्ग रविशंकर शुक्ला ने बताया कि किले में स्थित मंदिर में तीनों देवियों को लेकर जानकार गोकुल के महावन से जुड़ा हुआ बताते हैं। देवी के तीन स्वरूप यहां पर विराजमान हैं। इसमें बंदी देवी मां-मां लक्ष्मी का स्वरूप है। आनंदीदेवी-महिषासुर मर्दिनी (कात्यायनी) मां पार्वती का स्वरूप है और मनोवांच्छा देवी-मनवांछित फल देने वाली सरस्वती माता है। बुजुर्गों के अनुसार किले के समय ही देवियों की स्थापना हुई थी। सर्वसमाज से लोग यहां पर मुंडन, भंडारा सहित विभिन्न कार्यक्रम के लिए पहुंचते हैं।

इतिहास...9वीं शताब्दी में हुआ था किले का निर्माणइतिहासविद मधुकांत दुबे के अनुसार शाहाबाद किले के निर्माण की सही तिथि और इसके निर्माताओं के बारे में प्रमाणिक जानकारी का अभाव है। कुछ इतिहासकारों के अनुसार इस दुर्ग का निर्माण 9वीं शताब्दी ईस्वी के लगभग परमार शासकों ने कराया था। जिनका उस समय इस क्षेत्र पर आधिपत्य था। जबकि दूसरी मान्यता के अनुसार शाहाबाद के इस किले का निर्माता चाैहान राजा मुकुटमणि देव था, जो कि रणथंभौर के प्रसिद्ध शासक राव हम्मीर देव चाैहान के वंश से था।

हो रही उपेक्षा...मंदिर को भी जीर्णोद्धार कार्य में शामिल करे पुरातत्व विभाग कस्बेवासियों का कहना है कि पुरातत्व विभाग की ओर से किले के संरक्षण का कार्य किया जा रहा है। विभाग की ओर से मंदिर के भवन व परिसर में कार्य नहीं किए हैं। विभागीय अधिकारियों की मनमानी को लेकर आमजन में आक्रोश व्याप्त है।भक्तों को दिया स्वप्न: वर्तमान में माता जिस परिसर में विराजमान है, उसका जा सहयोग से कुछ साल पहले निर्माण हुआ है। मंदिर की छत गिरने पर प्रतिमाओं को अस्थाई रूप से हटा दिया था। देवी के स्वप्न देने पर जनसहयोग से निर्माण किया।सरकारी खर्चे पर होती थी पूजा: कई दशक पहले तक मंदिर का पूजा खर्च प्रशासन वहन करता था। पुजारी के निधन के बाद सरकारी मदद बंद कर दी।

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