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विश्व थैलेसीमिया दिवस आज:आपके रक्तदान से 120 मासूमों के चेहरे पर आती है मुस्कान

बारांएक महीने पहले
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जिला अस्पताल के ब्लड बैंक में रक्तदान करता युवक। - Dainik Bhaskar
जिला अस्पताल के ब्लड बैंक में रक्तदान करता युवक।
  • जिले में 120 बच्चे थैलेसीमिया से पीड़ित, किसी को सात तो किसी को 15 दिन में चढ़ाना पड़ता है ब्लड

थैलेसीमिया पीड़ित बच्चों का जीवन शुरू होने से पहले ही संघर्ष भरा होता है। इनमें से किसी को 7 तो किसी को 15 दिन में खून चढ़ाना पड़ता है। जिले में 120 बच्चे थैलेसीमिया से पीड़ित है। खून की कमी से इनकी स्थिति कभी भी गंभीर हो जाती है। खून चढ़ाने पर यह बच्चे फिर से खेलने कूदने लगते हैं।

सरकारी अस्पताल और ब्लड बैंक के साथ रक्तदाता पीड़ित बच्चों के लिए जीवनदाता साबित होते हैं। थैलेसीमिया बीमारी में खून चढ़ाने के अलावा कोई उपचार नहीं है। केवल बोनमैरो ट्रांसफर जो बहुत महंगा है। बीमारी से पीड़ित बच्चे बचपन से ही इस बीमारी से लड़ रहे हैं। इन बच्चों को खुद पता नहीं है कि वो असाध्य रोग से पीड़ित हैं। शरीर में ताकत होने पर खूब खेलते हैं। कुछ ही दिनों में कमजोरी आने पर बिस्तर पर आ जाते हैं।

गर्मी में बढ़ जाती है थैलेसीमिया पड़ित बच्चों की परेशानी

परिजनों की हालत भी यह है कि बच्चों की बीमारी के बारे में बताते ही रो पड़ते है, थैलेसीमिया से पीड़ित इन बच्चों का जीवन दूसरों के दिए हुए रक्त के भरोसे ही है। गर्मी के मौसम में इन बच्चों की परेशानी और बढ़ रही है, क्योंकि गर्मी में लोग रक्तदान कम करते है। गर्मी के मौसम में ब्लड बैंक आकर लोग रक्तदान कर इनके जीवन में आगे भी मुस्कुराहट ला सकते हैं।

जिले में थैलेसीमिया बच्चों को हर महीने करीब 250 यूनिट ब्लड की आवश्यकता होती है। जिसे नियमित रक्तदाता, स्वंयसेवी संस्थाओं और जिले में किए गए कैंपों के माध्यम से पूरा करते हैं। वर्तमान में कोरोना संक्रमण के बीच रक्तदान को लेकर परेशानी बढ़ी है। इन बच्चों के स्वैच्छिक रक्तदान करें, ताकि उनके चेहरे की मुस्कान बनी रहे।
- डॉ. बिहारी लाल मीणा, पीएमओ व प्रभारी ब्लड बैंक बारां

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