दीपोत्सव की तैयारी:पॉट्री विलेज ठीकरदा में बन रहे मिट्‌टी के 10 लाख दीये

बूंदी2 महीने पहले
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विदेशी टूरिस्ट का पसंदीदा पॉट्री विलेज ठीकरदा में इन दिनों मिट्‌टी की सौंधी खुशबू बिखर रही है। दिवाली के लिए इस पाॅट्री विलेज के घर-घर में 10 लाख से ज्यादा दीये तैयार हो रहे हैं। कोरोना में लोगों ने ठंडा पानी पीना बंद कर दिया तो ठीकरदा में मिट्‌टी की मटकियों की डिमांड खत्म हो गई, पर इस दिवाली लक्ष्मीजी उनके घरों में पधारेंगी। चाइनीज लाइटों को छोड़कर लोग मिट्‌टी के दीयों की तरफ लौट रहे हैं। 30 परिवार दीये बना रहे हैं।गुढ़ा बांध की मिट्‌टी से बन रहे दीयों की होलसेल में रेट 50 पैसा प्रति दीया है। वही दीया मार्केट में एक रुपए में बिकता है। दीये बनाने का काम दिवाली से महीनेभर पहले शुरू हो जाता है। गांव के चौथमल प्रजापत, भगवान प्रजापत, लालचंद प्रजापत बताते हैं कि कोरोना का असर इस गांव पर भी पड़ा। टूरिस्ट दो साल से नहीं आ रहे। उम्मीद है कि इस बार हमारी भी दिवाली अच्छी मनेगी।

इस बार मनेगी अच्छी दिवाली, दो माह से चल रही है एडवांस बुकिंगडेढ़ लाख दीये बना रहे सुरेश प्रजापत बताते हैं कि अब गांव की दिवाली मनेगी। उनके पास मध्यप्रदेश, कोटा, झालावाड़, सुमेरगंजमंडी, बूंदी, टोंक, जयपुर, अजमेर से दीयों की डिमांड आ रही है। यहां के दीयों की चमक ही अलग है। 2 माह से एडवांस बुकिंग चल रही है। लोग खरीदने आना शुरू हो गए हैं।

मिट्‌टी के दीये का बढ़ रहा क्रेजचौथमल प्रजापत बताते हैं कि चाइनीज लाइटें मार्केट में हैं, पर अब मिट्‌टी के दीयों का क्रेज बढ़ रहा है। दिवाली से पहले 50 हजार दीये बनाने हैं। कोटा, टोंक, बारां सहित आसपास के कई जिलों से खरीदार एडवांस बुकिंग करा चुके हैं। हर घर में 20 से 25 हजार दीये बनेंगे। ठीकरदा में मिट्‌टी की मटकियां, करवे, कलश, सुराही, दीये, गुल्लक बनाए जाते हैं। ठीकरदा पाॅट्री विलेज के युवा कारीगर कुछ नया करना चाहते हैं।

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