जलजले के बीच जिले में मुसीबत भरे रहे चार दिन:आपदा में 12 जानें गईं, 3 घायल, एक हजार से अधिक लोगों का जीवन बचाया

बूंदी2 महीने पहले
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अतिवृष्टि के दौरान जलभराव वाले क्षेत्र से सिविल डिफेंस टीम ने इस तरह लोगों को सुरक्षित निकाला। - Dainik Bhaskar
अतिवृष्टि के दौरान जलभराव वाले क्षेत्र से सिविल डिफेंस टीम ने इस तरह लोगों को सुरक्षित निकाला।
  • 4 लोग बह जाने से मरे, जबकि 8 लोगों की मकान ढह जाने से दबकर मौत

अतिवृष्टि के उन चार दिनों को भुलाना इतना आसान नहीं होगा। अलग-अलग जगह हादसों में 12 लोगों की जान जा चुकी है। इनमें 4 लोग बह जाने से मरे, जबकि 8 लोग मकान ढह जाने से दबकर मारे गए हैं। वहीं, 3 लोग मकान में दबने से घायल हुए। इन चार दिनों की बरसात ने जिले में 3920 मकान धराशायी कर दिए या नुकसान पहुंचाया। इनमें 3580 मकान कच्चे और 300 पक्के मकान शामिल हैं। इसके अलावा 120 पालतू पशु बहने या वर्षाजनित हादसों में मारे जा चुके हैं। इस कठिन समय में एसडीआरएफ व सिविल डिफेंस की टीमों ने साहस दिखाकर 1000 से अधिक लोगों का रेस्क्यू कर जीवन बचाया। टीमों के जवान अपने कार्य को जारी रखे हुए हैं।

टीमाें ने 3 अगस्त काे लाखेरी में शिवशंकर कॉलोनी, लक्ष्मी विहार, बजरंगपुरा आदि जगहों से 300-400 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया। गादेगाल में 2 व जलोदी में 8 जनों का रेस्क्यू नागरिक सुरक्षा दल ने किया। बूंदी शहर में जलभराव वाले मीरागेट, नागदी बाजार, बहादुरसिंह सर्किल, लाइन पुलिस पर नागरिक सुरक्षा दल ने लोगों को पानी से सुरक्षित बाहर निकाला। रात में जवाहर नगर कॉलोनी में एक ही परिवार के 4 जनों को पानी में फंसने पर निकाला गया। 21 गौवंशों को बाणगंगा डूब क्षेत्र से सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया। केशवरायपाटन के डूब क्षेत्र में 41 परिवारों के 151 सदस्यों को जिला प्रशासन की सहायता से सुरक्षित पहुंचाया गया।

बहाव इतना तेज था कि पैर भी जमीन पर पकड़ नहीं बना पा रहे थे, टॉर्च की रोशनी में पहुंचे परिवार तक

आपदा प्रबंधन प्रभारी कुलदीप लोधा बताते हैं कि जैतसागर झील के नाले में उफान के कारण कई कॉलोनियों में पानी भर गया था। हमें सूचना मिली कि मीरागेट कब्रिस्तान रोड पर एक कार फंसी हुई थी, जिसमें दो लोग हैं। टीम को साथ ले गए और करीब 5 फीट पानी में होकर कार तक पहुंचे, लेकिन कार में कोई नहीं मिला। उस समय रात के 12 बजे हुए थे। इसी दौरान कोटा सिविल डिफेंस से कॉल आया कि जवाहर नगर कॉलोनी में पानी में एक परिवार फंसा हुआ है, जिसे सुरक्षित स्थान पर निकालना है। उस पीड़ित परिवार को हमारे नंबर दे दिए गए थे।

कुछ मिनट बाद ही पीड़ित परिवार के मुखिया का फोन आया और उसने बताया कि वह अपनी पत्नी व दो बच्चों के साथ घर में फंसा हुआ है। मकान पानी में आधा डूब चुका है। चारों तरफ पानी होने से वहां पहुंचना काफी मुश्किल हो रहा था। बहाव काफी तेज था। उस व्यक्ति से मैंने कहा कि मोबाइल बंद मत करना हम टाॅर्च जलाकर आ रहे है। मैं सिविल डिफेंस इंचार्ज रूपेश मीणा, विशाल गोचर, रितेशकुमार गौड़, प्रिंस गौतम के साथ जवाहरनगर कॉलोनी की ओर बढ़ा। जैसे-जैसे आगे बढ़ते, बहाव तेज होने से पैरों की पकड़ नहीं हो पा रही थी। एक-दूसरे को रस्सी बांधकर चलते गए और उसे परिवार तक पहुंच गए। परिवार के चार जनों को रेस्क्यू कर सिलोर रोड पर रिश्तेदारों के पास पहुंचाया।

इन जगहों पर भी किया टीम ने रेस्क्यू

4 अगस्त काे केशवरायपाटन कीर बस्ती में मकान के नीचे दबे व्यक्तियों को एसडीआरएफ व स्थानीय प्रशासन की सहायता से बाहर निकाला गया। रूपपुरा में एक व्यक्ति को बिजली पोल से नीचे उतारकर सुरक्षित पहुंचाया गया संगावदा में टापू पर फंसे दंपती को रेस्क्यू कर एसडीआरएफ की सहयोग से सुरक्षित बाहर निकाला गया। कोटखेड़ा गांव में खेत में ज्यादा पानी आने पर दो बुजुर्गाें को बाहर निकाला गया। लाखेरी मेज नदी में फंसी यात्रीबस को रेस्क्यू टीम के सहयोग से बाहर निकाला गया। कापरेन में पानी में फंसे 6-8 जनों को सुरक्षित बाहर निकाला गया। 6 अगस्त काे माटूंदा गांव में नहर में डूबी कार को सिविल डिफेंस की टीम ने बाहर निकाला।

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