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पावरलेस सरपंच:184 पंचायतों पर जड़े ताले, बोले-26 जनवरी पर मिठाई बांटने के भी पैसे नहीं

बूंदीएक महीने पहले
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केशवरायपाटन. सूनगर में पंचायत को ताला लगाते हुए सरपंच। - Dainik Bhaskar
केशवरायपाटन. सूनगर में पंचायत को ताला लगाते हुए सरपंच।
  • पीडी खाते बंद करने और फाइनेंस पावर लौटाने की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं जिले के सरपंच
  • 30 जनवरी को जयपुर में तय करेंगे आंदोलन की अगली रणनीति

पंचायतों के वित्तीय पावर लौटाने और पीडी खाते बंद करने की मांग को लेकर जिले की 184 ग्राम पंचायतों में सरपंचों ने गुरुवार को एक दिन के लिए ताले जड़ दिए। तालाबंदी के चलते ग्रामीणों और मनरेगा श्रमिकों के पंचायत से संबंधित काम अटक गए। आंदोलन का अगला कदम अब 30 जनवरी को जयपुर में तय होगा। जहां सरपंच संघ की प्रदेश कार्यकारिणी और प्रदेश के हर जिले के सरपंच संघ जिलाध्यक्ष व ब्लॉक अध्यक्ष इकट्ठा होंगे।

सरपंच संघ जिलाध्यक्ष आनंदीलाल मीणा ने बताया कि जिले के सभी सरपंचों ने अपनी पंचायतों को ताला लगाकर कार्य बहिष्कार किया। यदि सरकार सरपंचों की मांगें नहीं मानती हैं और पीडी खाते खोलने पर रोक नहीं लगाती है तो आंदोलन और तेज किया जाएगा। हालत यह है कि ग्राम पंचायतों के पास 26 जनवरी (गणतंत्र दिवस) की मिठाई बांटने तक के लिए पैसा नहीं है।

इससे ज्यादा वित्तीय स्थिति क्या खराब हो सकती है। सरकार थोड़ी भी संवेदनशील है तो सरपंचों की पीड़ा सुनें। हालत यह है कि सालभर हो गए सरपंच बने, पर विकास के नाम पर हम कंकर तक नहीं लगा सकते। पेन-रजिस्टर तक अपनी मर्जी से नहीं खरीद सकते। पंचायतों में सारे काम ठप पड़े हैं।

खत्म हो गई पंचायतों की भुगतान की पावर

जानकारी के अनुसार पहले मैनुअल, चैक से पंचायतें भुगतान कर दिया करती थीं, अब सबकुछ ऑनलाइन हो गया है। प्लान से लेकर प्रशासनिक, तकनीकी, वित्तीय स्वीकृति तक सॉफ्टवेयर पर डालनी होती है। यूसी, भुगतान भी ऑनलाइन हो गया है। यानी पांच रुपए के लिए भी पूरा प्रोसेस फॉलो करना पड़ता है। पहले अपने हिसाब से पंचायतें चेक काट देती थीं।

अब काम होगा तो ही भुगतान होगा। अभी 184 में से अभी 40-50 पंचायतें ही ऑनलाइन हुई हैं। नए बने सरपंच पूर्व के मंजूर काम बदलना चाहते हैं, जो ऑनलाइन होने की वजह से नहीं बदल सकते। आनेवाले दिनों में पंचायत समितियों के प्रधानों को भी ऐसी ही समस्या का सामना करना पड़ेगा। दूसरी वजह यह भी है कि केंद्रीय वित्त आयोग से भी अभी एक किश्त जारी हुई है, जबकि राज्य वित्त आयोग से एक भी किश्त जारी नहीं हुई है।

सरपंचों का कहना है कि ग्रामसभाओं में लिए जानेवाले प्रस्तावों का कोई मतलब नहीं रह जाता, जब बजट ही नहीं है। एक वर्ष में पंचायतों ने बैठकर प्रस्ताव तैयार कर विकास के लिए भिजवाए। विकास कार्य भी पास हो गए, लेकिन बजट की कमी के चलते कुछ भी हो नहीं पाया।

सरपंचों की मांग राज्य सरकार के स्तर की है। इसमें हम कुछ नहीं कर सकते, हमारे स्तर के जो भी काम हैं, वो किए जा रहे हैं। तालाबंदी से निश्चित तौर पर ग्रामीणों को अपने कामों को लेकर परेशानी हुई है।
- मुरलीधर प्रतिहार, सीईओ

पब्लिक डेबिट (पीडी) खाता खोलने का सरपंच इसलिए कर रहे हैं विरोध

राज्य सरकार ने प्रदेश में पंचायतीराज में पब्लिक डेबिट (पीडी) खाता खोलकर नई व्यवस्था कर दी है। अब पंचायताें में हाेने वाले कार्याें का भुगतान इसी खाते से हाेगा। सरपंचाें काे कहना है कि इससे जिले की ग्राम पंचायतों सहित राज्यभर में गांवाें के विकास के काम अटक गए हैं। उनका कहना है कि इससे गांव में मूलभूत सुविधाओं के कार्य नहीं हाे पाएंगे, क्याेंकि पीडी खाते से विकास कार्य के लिए धनराशि निकालने की प्रक्रिया लंबी और जटिल कर दी है।

गांव के विकास के लिए केंद्र व राज्य सरकार द्वारा ग्राम पंचायतों के नाम बैंक खाते में विकास कार्यों की राशि भेजती थी। जो फर्म काम करती थी उसे काम होने पर चेक काट कर भुगतान कर दिया जाता था। अब सरकार ने पीडी खाता खोल दिया है। इसकी कस्टोडियन राज्य सरकार ही है। यानी सरकार गांव के विकास के कामकाज पर पूरी निगाह रखेगी। इस पर वित्त विभाग का पूरा कंट्रोल होगा।

इस उदाहरण से समझें, कैसे हाेगी गांवाें के विकास में परेशानी

यदि किसी गांव में आवारा जानवर की मौत हो जाती है और उसे गांव के बाहर फिंकवाने के लिए किसी को लगाया जाता है और उसका पारिश्रमिक का भुगतान करना है या गांव में सफाई के लिए श्रमिकों को भुगतान करना है तो उन्हें ग्राम पंचायत के बैंक खाते से पैसा निकाल कर भुगतान नहीं किया जा सकता।

जानवर फिंकवाने का बिल बनाकर ट्रेजरी में भेजना होगा। इसके बाद भी कोई गारंटी नहीं कि उसका भुगतान तुरंत हो जाए। मूलभूत सुविधाओं से जुड़े सभी कार्यों के बिल भेजना होगा। फंड के अभाव में बिल भुगतान का समय लंबा भी हो सकता है। इस बात का जिले भर में सरपंच विरोध कर रहे हैं।

पंचायतों के खाते का पहले और अब में अंतर

पहले : पूर्व में राशि सीधी ग्राम पंचायतों के खाते में हस्तांतरित की जाती थी, जिसका उपयोग सीधे ग्राम पंचायत द्वारा बैंक खाते से जाता था।

अब : राशि पीडी यानी पब्लिक डेबिट अकाउंट में हस्तांतरित की जाएगी। ग्राम पंचायत द्वारा कार्य के बदले चेक को ट्रेजरी से पारित होने के बाद पंचायत को राशि का भुगतान प्राप्त होगा। अब ग्राम पंचायतों द्वारा जारी फर्मों के चेक भी ट्रेजरी द्वारा ही पारित होंगे।

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