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चंबल नदी नाव हादसे से भी सबक नहीं:5 हजार लोगों को नाव भी नसीब नहीं, पुरानी ट्यूब के सहारे पार करते रहे नदी

बूंदीएक महीने पहले
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  • मांगली नदी से आंखों देखी..लालपुरा पंचायत के 5 गांवों के लोगों की..जो रोज कुछ इस तरह जान जोखिम में डालकर मांगली नदी करते हैं पार

चंबल नदी में हुई नाव दुखांतिका ने सबको झकझोर दिया है। कोई नहीं चाहता, ऐसा हादसा दोहराया जाए, पर बूंदी जिले में कई गांव ऐसे हैं, जहां के लोगों को उफनती नदी पार करना मजबूरी है। हैरान करने वाली बात यह कि इन लोगों को तो नाव भी नसीब नहीं।

उनके पास दो ही विकल्प हैं... या तो तैरकर और तैरना नहीं आता है तो टायर ट्यूब के सहारे नदी पार करना। जो नाव के सफर से ज्यादा जाेखिमभरा और खतरनाक है। बूंदी से 12 किमी दूर ग्राम पंचायत लालपुरा के लालपुरा, बागदा, किशनपुरा, संगावदा और जालेड़ा गांवाें के बीच से प्रसिद्ध मांगली नदी गुजरती है। चारों गांवाें के लोगों को लालपुरा जाने आने के लिए मांगली नदी पार करनी पड़ती है।

इन लोगों को तो नाव भी नसीब नहीं। मजबूरी में टायर ट्यूब से ही करीब 200 फीट चौड़ी और 25 से 30 फीट गहरी नदी पार करनी पड़ती है। अभी स्कूल बंद हैं, वरना लालपुरा सहित कई गांवाें के 100 से ज्यादा बच्चों को स्कूल के लिए नदी पार कर माटूंदा जाना पड़ता है। करीब चार से पांच हजार लोगों की जिंदगी ट्यूब पर ही टिकी है। नदी पार न करो तो इन गांवों के लोगों को 200 फीट की बजाए 20-25 किमी का चक्कर काटना पड़ता है। यानी ग्राम पंचायत मुख्यालय आना-जाना 40 किमी पड़ता है।

ग्राम पंचायत मुख्यालय जाना मजबूरी : बागदा, किशनपुरा, संगावदा, जालेड़ा के लोगों को अपने पंचायत मुख्यालय लालपुरा किसी न किसी काम से आना-जाना पड़ता है। राशन लेने, मनरेगा में मजदूरी और पंचायत से जुड़े कामों के लिए उन्हें अक्सर लालपुरा आना-जाना पड़ता है। अगर नदी नहीं पार करें तो फिर लालपुरा जाने के लिए बागदा से माटूंदा, बूंदी से रामगढ़ फोरलेन होते रामगंजबालाजी, कोथ्या, ठीकरिया होकर पहुंचना पड़ता है।

स्कूली बच्चे भी ट्यूब से ही करते हैं नदी पार : महिलाओं, बुजुर्गों और स्कूली बच्चों को भी टायर ट्यूब से ही नदी पार करनी पड़ती है। लालपुरा, अंथड़ा, बंसवाड़ा, लीलेड़ा व्यासान, बागदा किशनपुरा, संगावदा, जालेड़ा के 9वीं से 12वीं तक के बच्चे को पढ़ने के लिए माटूंदा जाने के लिए नदी पार करनी पड़ती है। मानसून सीजन में यह और भी खतरनाक हो जाता है। 3 साल पहले बागदा गांव के सूरजमल मीणा भी ट्यूब से तैरकर नदी पार कर रहे थे। बीच रास्ते ट्यूब की हवा निकल गई और मीणा डूब गए। अगले दिन उनका शव मिल सका।

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