पहले ही दिन फायदा / बूंदी मंडी से 7 लाख रुपए कृषक कल्याण शुल्क घटते ही बढ़ गए जिंसों के भाव, किसानों को थोड़ी राहत

7 lakh rupees from Bundi mandi, prices of commodities increased as farmers welfare fee decreases, some relief to farmers
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7 lakh rupees from Bundi mandi, prices of commodities increased as farmers welfare fee decreases, some relief to farmers

  • मंडी में जिंसों के भाव ज्यादा मिले, 9 दिन बंद रही थी मंडियां

दैनिक भास्कर

May 23, 2020, 06:08 AM IST

बूंदी. राज्य सरकार ने 5 मई को लागू कृषक कल्याण शुल्क में संशाेधन किया है। इसका असर भी मंडियों में भावों पर नजर आया। बूंदी मंडी में अनाज पर 15 से 80 रुपए तक प्रति क्विंटल भाव बढ़ गए, जिससे किसानों को कुछ राहत मिली है।
 शुक्रवार को संयुक्त शासन सचिव कृषि डॉ. एसपीसिंह की ओर से जारी अधिसूचना के मुताबिक ऊन पर कृषक  कल्याण शुल्क की दर एक सौ रुपए पर शून्य होगी। मोटे अनाज जैसे ज्वार, बाजरा, मक्का, जीरा और ईसबगोल पर यह शुल्क 100 रुपए पर 50 पैसा होगा, पहले यह 2 रुपए था। फल-सब्जी वर्ग में शामिल सभी कृषि जिंसों पर कृषक कल्याण शुल्क की दर पूर्ववत 100 रुपए पर दो रुपए होगी। अन्य सभी कृषि उपज गेहूं, धान, सरसों, चना, सोयाबीन, दलहन, ऑयल सीड्स पर शुल्क 100 रुपए पर एक रुपए होगा, जो पहले 2 रुपए था। शुल्क की संशोधित दरें शुक्रवार से ही लागू हो गई। इससे किसानों को पहले ही दिन फायदा हुआ। मंडी में उनकी जिंसों के भाव ज्यादा मिले। 2000 या इससे ज्यादा रेंजवाले अनाज के भाव में 20-30 रुपए की तेजी रही। गेहूं में 15-16 रुपए क्विंटल, सरसों में 50 रुपए तक भाव बढ़ गए। कृषक कल्याण शुल्क लगाने के विरोध में प्रदेश की सबसे बड़ी मंडियों में शुमार बूंदी की कुंवारती मंडी भी 6 से 14 मई तक मंडी बंद रही थी। सरकार से आश्वासन के बाद 15 मई को व्यापारियों ने मंडी खोल दी थी। 
शाम को मुख्यमंत्री से मिले, रात में निकाले संशोधित आदेश
गुरुवार शाम राज. खाद्य पदार्थ संघ के 27 पदाधिकारी मुख्यमंत्री से उनके आवास पर मिले थे, जिसमें बूंदी से श्रीचावल उद्योग संघ के अध्यक्ष राजेश तापड़िया, श्रीआढ़तिया संघ के अध्यक्ष हनुमान माहेश्वरी शामिल थे। पदाधिकारियों का कहना था कि इस वक्त राज्य सरकार को रेवेन्यू की जरूरत है, पर कृषक कल्याण शुल्क लगाने का फैसला मंडियों को डेमेज करेगा। कोटा, बारां, बूंदी मंडियों में ही मप्र से 800 करोड़ का धान आता है, इसके अलावा यूपी-अन्य जगहों से भी आता है। किसान को जब 2 परसेंट शुल्क से भाव में नुकसान होगा, वो वहां से माल ही नहीं आएगा। इसके बाद गुरुवार रात 10 बजे निकाले संशोधित आदेश सुबह यहां पहुंच गए। तापड़िया के अनुसार मुख्यमंत्री ने आश्वस्त किया है कि यह शुल्क जरूरत नहीं होने पर बाद में हटाया भी जा सकता है। 
^हमारी मांग कृषक कल्याण शुल्क को पूरी तरह हटाने की थी, पर सरकार के फैसले पर व्यापारी सहमत हैं। शुल्क आधा करने से भाव में थोड़ा बहुत फर्क आया है। हनुमानप्रसाद माहेश्वरी, अध्यक्ष श्रीआढ़तिया संघ
^कृषक कल्याण शुल्क में कमी के संशाेधित आदेश आ गए हैं। पहले आदेश के मुताबिक बूंदी मंडी से करीब 13 लाख रुपए शुल्क मिलता, जो अब करीब छह लाख रुपए रह जाएगा। पर इससे किसानों को फायदा हुआ है। -रामविलास यादव, सेक्रेटरी, कुंवारती मंडी

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