बुवाई का सीजन:डीएपी की डिमांड 22000 मीट्रिक टन की, मिला 14450 मीट्रिक टन

बूंदी2 महीने पहले
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  • इस बार गेहूं व सरसों के रकबे में अच्छी बढ़ाेतरी होगी, यूरिया के समय भी किसानों को किल्लत झेलनी पड़ सकती है

2 लाख 55 हैक्टेयर में बुवाई के लिए 22000 मेट्रिक टन डीएपी की जरूरत है, जबकि आवंटन 14450 मेट्रिक टन ही हुआ है। पहले ही बरसात के कारण सरसों की बुवाई का समय निकलता जा रहा है और अब किसानों ने बुवाई की तैयारी शुरू की तो डीएपी की किल्लत आ गई है। 15 सितंबर से सरसों की बुवाई शुरू हो जाती है।इस बार बरसात के कारण देरी हो रही है। डीएपी का उपयोग बुवाई के समय होता है और सभी फसलों में इसकी जरूरत रहती है। रबी की बुवाई के लिए कृषि विभाग ने जयपुर आयुक्तालय में 22000 मेट्रिक टन की डिमांड भेजी थी, जिसकी तुलना में 14450 मेट्रिक टन डीएपी का आवंटन हुआ है, जबकि अक्टूबर से दिसंबर तक 18000 मेट्रिक टन की आवश्यकता रहती है।

डिमांड काे देखते हुए नैनवां में 500 डीएपी के कट्‌टे महज तीन घंटे में ही बिक गए।खरीफ का बचा 4200 मेट्रिक टन डीएपी किसानों को मिल रहा है, जिसे कोऑपरेटिव सोसायटियां व डीलरों के माध्यम से बंटवाया जा रहा है। सरसों की बुवाई के लिए किसानों को 10 हजार मेट्रिक टन डीएपी चाहिए, जबकि 4200 मेट्रिक टन डीएपी ही उपलब्ध है, जो भी अब कम होता जा रहा है।3 घंटे में बंट गए डीएपी के 500 बैगशहर में एक खाद विक्रेता की दुकान पर बुधवार को 500 बैग डीएपी खाद आया, जिसे लेने के लिए किसानों की सुबह से ही भीड़ लग गई।

विक्रेता ने एक किसान को अधिकतम 5 बैग दिए, लेकिन 9 से 12 बजे तक 3 घंटे में 500 बैग बंट गए। बाद में बाए किसानों को निराश लौटे। देवपुरा के किसान मायाराम, कोरमा के महावीर बैरवा, सुवान्या के बद्रीलाल, रालड़ी के किसान रामकिशन ने बताया कि डीएपी आने पर दौड़कर दुकान पर पहुंचे, लेकिन नंबर आने से पहले ही बंट चुका था। बीजलवा के रामसागर व फोरीबाई ने बताया कि पांच-पांच बैग ही डीएपी मिला है, वह भी लाइन में लगकर लेना पड़ा। खाद विक्रेता राजेश मित्तल ने बताया कि टोक जिले के किसान भी आ रहे हैं, लेकिन क्षेत्रीय किसानों को आधार कार्ड देखकर दे रहे हैं।

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